
*मध्य प्रदेश शासन द्वारा स्टांप शुल्क वृद्धि केबिनेट फैसले को वापस लेने हेतु अधिवक्ताओं ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन।*
खण्डवा//मध्य प्रदेश शासन द्वारा विगत 6 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में लिए गए स्टांप शुल्क वृद्धि निर्णय को अधिवक्ताओं ने असंगत बताते हुए इसे आमजन और गरीब ग्रामीण पक्षकारों पर आर्थिक बोझ बताया।
नवगठित नोटरी संघ खंडवा के अध्यक्ष अरुण दुबे एवं जिलाअधिवक्ता संघ खंडवा के अध्यक्ष रविंद्र पाथरिकर के नेतृत्व में आज नोटरी और अधिवक्ताओं ने जिला कलेक्टर श्री ऋषभ गुप्ता को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम से एक ज्ञापन सौपकर स्टांप शुल्क वृद्धि को वापस लिए जाने की मांग की।
वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश थापक ने बताया कि ₹50 के स्टांप पर बनने वाला शपथ पत्र अब नए नियम अनुसार ₹200 के स्टांप पर बनाया जाएगा वहीं सामान्य अनुबंध ₹500 के स्टांप पर 1000 के स्टांप पर बनेगा और ₹1000 के स्टांप पर प्रॉपर्टी संबंधी अनुबंध और पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे दस्तावेज 2000 से ₹5000 के के स्टांप पर बनेंगे ।
प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 7000 रु है ऐसे में शासन के हर महकमो में हर योजना व प्रोसेस में शपथपत्र आवश्यक है, जो स्टाम्प शुल्क वृध्दि से आमजन विशेषकर गरीब ग्रामीण जनता पर आर्थिक भार बढेगा।
ज्ञापन देने वाले अधिवक्ताओं में रजनीश सोनी जितेंद्र राउत, संतोष गौड़, गिरीश तिवारी, जितेंद्र कुमार गुप्ता, प्रणय गुप्ता, राजेंद्र ठाकुर, आनंद सोहनी, अभिषेक सोहनी, जुगल किशोर महेश्वरी, विजय मालाकार, अभिषेक मालाकार, द्वारकादास असवानी, सुषमा शर्मा ,कल्पना उपाध्याय, सुनील आर्य, प्रशांत सोनी ,मनीष राय, राहुल चौरे सहित अन्य अधिवक्ता

गण उपस्थित थे।












