Friday, July 20, 2018
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शाम को पूजा करते वक्त इस बात का रखे ख्याल,

हर घर में पूजा घर जरूर होता है। जिसमें लोग नियमित तौर पर भगवान का ध्यान कर पूजा और उपवासना करते हैं। पर कई बार ऐसा होता है सुबह शाम पूजा-पाठ करने के बाद मन को शांति मिलती है व घर में सुख का वास नहीं होता। इसके पीछ यह कारण भी हो सकता है कि आप पूजा करते समय नियमों का पालन नहीं करते हैं। अगर आप पूजा करते समय कई छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखेंगे तो इससे देवता प्रसन्न होते हैं जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और आपकी मनोकामना भी पूरी होती है। अगर आप भी शाम को करते हैं पूजा, तो इन बातों का रखें खास ख्याल

 

– अगर आप सूर्य डूब जाने के बाद या रात होने पर पूजा कर रहे हैं तो शंख और घंटियां कभी ना बजाए। क्योंकि सूर्यास्त के बाद देवी-देवता सोने चले जाते हैं।
– संध्या के बाद पूजा करते हैं तो पूजा के लिए फूल तोड़ कर न लाएं, सूर्य डूब जाने के बाद फूलों को छेड़ना अच्छा नहीं माना जाता।
– सूर्य भगवान दिन के देवता हैं। इसलिए दिन में अगर कोई विशेष पूजा कर रहे हैं तो साथ में सूर्यदेव की पूजा भी जरूर करनी चाहिए, परंतु सूर्य डूब जाने के बाद सूर्य देव की पूजा ना करें।

– पूजा के स्थान पर भंगवान की बहुत बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। ज्यादा से ज्यादा आप छह इंच की मूर्ति रख सकते हैं।
– संध्या होने के बाद तुलसी का पत्ता गलती से भी न तोड़ें इससे लक्ष्मी नाराज हो जाएंगी। इसलिए अगर शाम या रात में पूजा करनी है तो दिन के समय ही तुलसी पत्ता तोड़ कर रख लें।
-जब भी पूजा करें ध्यान रखें देवी-देवाताओं को अनामिका यानि अंगूठे के बगल वाली उंगली से तिलक लगाते हैं।
-पूजा में पान का पता जरूर रखें क्योंकि इससे देवता प्रसन्न होते हैं।
-पूजा करने के बाद दीपक को भगवान के सामने ही रखना चाहिए। कई भी इधर-उधर नहीं रखना चाहिए।
-पूजा के दीपक को देसी घी से जलाए तो सफेद बती का इस्तेमाल करें।
-भगवान शिव की पूजा करते वक्त भगवान शिव को कभी भी हल्दी न चढ़ाए।
-घर के पूजा स्थल में कभी भी सुखें फूल या माला न रखें।
-कभी भी गणेश जी को तुलसी, विष्णु जी को चावल, देवी को दूर्वा, सूर्य को विल्व पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए इससे भगवान नाराज हो जाते हैं।

13 जुलाई से शुरू हो रहे हैं गुप्त नवरात्रे, इस विधि से पूजा करने से मिलेगी माँ दुर्गा की कृपा….

आषाढ़ मास का ‘गुप्त नवरात्रि पर्व’ इस बार 13 जुलाई से 21 जुलाई तक मनाया जाएगा। ये पर्व ऋतुओं के संधिकाल पर पड़ते हैं। संधिकाल को उपासना की दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्व दिया गया है। वर्ष की उपासना के लिए नवरात्रि को ही माना गया है, जैसे कि ‘शरद् काले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी।’ किंतु उपासकों की इच्छा बढ़ी तो उन्होंने वर्ष चक्र में 2 नवरात्रि की व्यवस्था की। प्रथम संवत् प्रारंभ होते ही बसंत नवरात्रि व दूसरा शरद नवरात्रि, जो कि आपस में 6 माह के अंतराल पर आते हैं। अब भक्तों ने 2 गुप्त नवरात्रि की व्यवस्था की जिसमें कि आषाढ़ सुदी प्रतिपदा (एकम) से नवमी तक पहला गुप्त नवरात्र तथा पौष सुदी प्रतिप्रदा (एकम) से नवमी तक दूसरा गुप्त नवरात्र मनाया जाता है। ये दोनों नवरात्रि युक्त संगत है, क्योंकि ये दोनों नवरात्रि अयन के पूर्व संख्या संक्रांति के हैं।

प्रातः और सायंकाल, ब्राह्ममुहूर्त्त एवं गोधूलि वेला दिन और रात्रि के सन्धिकाल हैं। इन्हें उपासना के लिए उपयुक्त माना गया है। इसी प्रकार ऋतु संधिकाल के नौ-नौ दिन दोनों नवरात्रों में विशिष्ट रूप से साधना-अनुष्ठानों के लिए महत्त्वपूर्ण माने गये हैं।

नवरात्रि साधना को दो भागें में बांटा जा सकता है…

1. एक उन दिनों की जानेवाली जप संख्या एवं विधान प्रक्रिया।
2. दूसरे आहार-विहार संबंधित प्रतिबंधों की तपश्चर्या।

इन दोनों को मिलाकर ही अनुष्ठान पुरश्चरणों की विशेष साधना संपन्न होती है।

जप संख्या के बारे में विधान

9 दिनों में 24 हजार गायत्री मंत्रों का जप पूरा होना चाहिए। कारण 24 हजार जप का लघु गायत्री अनुष्ठान होता है। प्रतिदिन 27 माला जप करने से 9 दिन में 240 मालाएं अथवा 2400 मंत्र जप पूरा हो जाता है। मोटा अनुपात घंटे में 11- 11 माला का रहता है। इस प्रकार प्रायः दो से ढ़ाई घंटे इस जप में लग जाते हैं। चूंकि उसमें संख्या विधान मुख्य है इसलिए गणना के लिए माला का उपयोग आवश्यक है। सामान्य उपासना में घड़ी की सहायता से 45 मिनट का पता चल सकता है, पर जप में गति की न्यूनाधिकता रहने से संख्या की जानकारी बिना माला के नहीं हो सकती। इसलिए नवरात्रि साधना में गणना की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए माला का उपयोग आवश्यक माना गया है।जिनसे यह साधना न बन पड़े, वे प्रतिदिन 12 माला करके 108 माला का अनुष्ठान कर सकते हैं।

उपासना विधि

उपासना की विधि सामान्य नियमों के अनुरूप ही है। स्नानादि से निवृत्त होकर आसन बिछाकर पूर्व को मुख करके बैठें। जिन्होंने कोई प्रतिमा या चित्र किसी स्थिर स्थान पर प्रतिष्ठित कर रखा हो वे दिशा का भेद छोड़कर उस प्रतिमा के सम्मुख ही बैठें। वरूण देव तथा अग्नि देव को साक्षी करने के लिए पास में जल पात्र रख लें और घृत का दीपक या अगरबत्ती जला लें सन्ध्यावन्दन करके, गायत्री माता का आह्वान करें। आह्वान मन्त्र जिन्हें याद न हो वे गायत्री शक्ति की मानसिक भावना करें। धूप, दीप, अक्षत, नैवेद्य, पुष्प, फल, चन्दन, दूर्वा, सुपारी आदि पूजा की जो मांगलिक वस्तुएं उपलब्ध हों उनसे चित्र या प्रतिमा का पूजन कर लें। जो लोग निराकार को मानने वाले हों वे धूपबत्ती या दीपक की अग्नि को ही माता का प्रतीक मान कर उसे प्रणाम कर लें। अपने गायत्री गुरु का भी इस समय पूजन वंदन कर लेना चाहिए, यही शाप मोचन है।

इस तरह आत्म शुद्धि और देव पूजन के बाद जप आरंभ हो जाता है। जप के साथ-साथ सविता देवता के प्रकाश का अपने में प्रवेश होते पूर्ववत् अनुभव किया जाता है। सूर्य अर्घ्य आदि अन्य सब बातें उसी प्रकार चलती हैं, जैसी दैनिक साधना में। हर दिन जो आधा घंटा जप करना होता था, वह अलग से नहीं करना होता वरन् इन्हीं 27 मालाओं में सम्मिलित हो जाता है।

गायत्री मंत्र एवं भावार्थ

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

भावार्थ : उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को संमार्ग की ओर प्रेरित करें।

अनुष्ठान में पालन करने के लिए दो नियम अनिवार्य हैं…

1. इन 9 दिनों ब्रह्मचर्य पालन अनिवार्य रूप से आवश्यक है।

2. दूसरा अनिवार्य नियम है उपवास, जिनके लिए संभव हो वे नौ दिन फल, दूध पर रहें। एक समय अन्नाहार, एक समय फलाहार, दो समय दूध और फल, एक समय आहार, एक समय फल दूध का आहार, केवल दूध का आहार इनमें से जो भी उपवास अपनी सामर्थ्यानुसार हो उसी के अनुसार साधना आरंभ कर देनी चाहिए। जिनसे इतना भी न बन पड़े वे अन्नाहार पर भी रह सकते हैं, पर नमक और शक्कर छोड़कर अस्वाद व्रत का पालन उन्हें भी करना चाहिए। भोजन में अनेक वस्तुएं न लेकर दो ही वस्तुएं ली जाएं। जैसे- रोटी, दाल। रोटी- शाक, चावल- दाल, दलिया, दही आदि।

अनुष्ठान में पालन करने के लिए तीन सामान्य नियम हैं…

1. कोमल शैया का त्याग
2. अपनी शारीरिक सेवाएं अपने हाथों करना
3. हिंसा द्रव्यों का त्याग (चमड़े के जूते , रेशम, कस्तूरी, मांस, अण्डा )।

अनुष्ठान के दिनों में मनोविकारों और चरित्र दोनों पर कठोर दृष्टि रखी जानी चाहिए। साथ ही फ्ने मन को भटकने न दें। झूठ, क्रोध, छल, कटुवचन , अशिष्ट आचरण, चोरी, चालाकी, जैसे आचरणों से बचा जाना चाहिए। ईर्ष्या, द्वेष, कामुकता, प्रतिशोध जैसी दुर्भावनाओं से मन को जितना बचाया जा सके उतना अच्छा है।

शुक्रवार को माँ लक्ष्मी के साथ करे इनकी भी पूजा ,जल्द मिलेगा लाभ..

कलयुग में आपकी सफलता को तय करने का पैमाना आपकी संपत्ति को माना जाता है। आपके पास जितनी अधिक संपत्ति होगी आपको जीवन में उतना ही सफल व्‍यक्ति समझा जाएगा। शास्‍त्रों में बताया गया है कि धन समृद्धि की प्राप्ति के लिए आपको केवल देवी लक्ष्मी ही नहीं कुबेर देवता की भी उपासना करनी चाहिए। ऐसा करने से कुबेर देवता प्रसन्‍न होते हैं और आपके घर में भी धन वर्षा होने लगती है। कुबेर देवता को खुश करने के लिए आपको क्‍या करना चाहिए यह जानने से पहले आइए जानते हैं कुबेर देवता का अस्तित्‍व…


भगवान शिव ने प्रसन्‍न होकर कुबेर को सौंपा यह जिम्‍मा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पहले कुबेर एक सामान्‍य मनुष्‍य थे, जो भगवान शिव की कठोर तपस्‍या किया करते थे। शिव ने प्रसन्‍न होकर पूरे संसार की संपत्ति का अधिपति उन्‍हें नियुक्‍त कर दिया। कुबेर की प्रसन्‍नता का ठिकाना नहीं था और एक दिन उनके मन में लालच आ गया। तब भगवान शिव ने कुबेर को सबक सिखाने के लिए अपने पुत्र गणेश को भेजा।

गणेशजी ने ऐसे सिखाया सबक
एक बार कुबेर देवता ने सभी देवताओं के लिए भोज का आयोजन रखा। भगवान गणेश ने वहां सबसे पहले पहुंचकर सारा भोजन चट कर लिया। उनको भूख इतनी तेज लगी थी कि जब वह कुबेर को खाने चले तो तब कुबेर को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्‍हें समझ आया कि हमें अपनी शक्तियों का गलत इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए। बस इसी अहसास के बाद वह धन के देवता कुबेर के रूप स्‍थापित हो गए। इसलिए लोग धन का आहृवान करने के लिए उनकी पूजा करते हैं।

कुबेर यंत्र
कुबेर यंत्र तांबे की बनी एक प्‍लेट के समान होती है, जिस पर कुबेर देवता का यंत्र बना रहता है। इस यंत्र में 72 कतार और 72 वर्ग होते हैं। जीवन में सुख, संपन्‍नता और ऐश्‍वर्य की प्राप्ति के लिए 72 के अंक को शुभ माना जाता है। इस यंत्र को आप अपने घर, ऑफिस या फिर अपनी दुकान पर भी रख सकते हैं। बेहतर परिणाम के लिए आपको इस यंत्र की रोजाना पूजा करना अनिवार्य है।

इन बातों का रखें विशेष ख्‍याल
-कुबेर यंत्र को सदैव एक फ्लैट सत‍ह पर ही रखें। यदि आप इसे लटकाना चाहते हैं तो इसका मुख उत्‍तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए। ध्‍यान रहे कि यह आपकी आंखों के सामने रहना चाहिए।
-रोजाना पूजा-पाठ शुरू करने से पहले कुबेर देवता के सामने सुगंधिम अगरबत्तियां जलाएं। इससे सकारात्‍मक ऊर्जा घर के अंदर प्रवेश करती है और नकारात्‍मक ऊर्जा घर से बाहर चली जाती है।

इस मंत्र का करें उच्‍चारण
कुबेर यंत्र के मध्‍य में ध्‍यान केंद्रित करते हुए अब कुबेर मंत्र का जप शुरू करें।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥
इस मंत्र का रोजाना कम से कम 21 या 108 बार बार जप करें।

पूजा सामग्री
धन के अधिपति कुबेर देवता की पूजा के लिए आपको हल्‍दी, जल, लकड़ी, कुबेर यंत्र, पीत वस्‍त्र, कलश, आम का पल्‍लो, पुष्‍प, अक्षत, चंदन, कुमकुम, पीपल के पत्‍ते, सुपारी, दीप, घी, तेल, दूध, शहद, दही, धूप गेहूं की आवश्‍यकता होती है।

इस प्रकार करें पूजा
शुक्ल पक्ष के किसी भी शुक्रवार को रात्रि में कुबेर देवता की पूजा का शुभारंभ करना चाहिए। प्रात: रोजाना काम पर जाने से पहले आपको कुबेर देवता का आशीर्वाद लेकर निकलना चाहिए। आप अपने जीवन में जल्‍द ही बदलाव महसूस करने लगेंगे और आपके काम में भी बरकत होगी।

इस वजह से सुनी जाती हैं भगवान सत्यनारायण की कथा…

हिन्दू धर्म के अनुसार सभी घरों में किसी भी शुभ काम को करने से पहले भगवान सत्यनारायण की कथा कराई जाती है. लेकिन कभी अपने ये सोचा कि ऐसा क्यों होता है. अगर नहीं तो आज हम आपको बताएंगे सत्यनारायण की कथा से जुडी कुछ ख़ास बातें और इस कथा का महत्व. शास्त्रों के मुताबिक ऐसा माना गया है कि जो भी इस कथा को सुनता है और व्यक्ति अगर व्रत रखता है तो उसके जीवन में आये सारे दुखों को श्री हरि विष्णु खुद हर लेते हैं और उसके जीवन को खुशहाल बना देते है.

स्कन्द पुराण के मुताबिक भगवान सत्यनारायण श्री को भगवान् विष्णु का दूसरा रूप माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि इसी कथा को भगवान विष्णु ने देवर्षि नारद को अपने मुख से बताया था. खास बात यह है कि इस कथा को सुनने का सबसे शुभ दिन पूर्णिमा का दिन बताया गया है. ऐसा भी बताया गया है कि जो इस कथा को सुन नहीं पाते है वह पूर्णिमा को भगवान सत्यनारायण का मन में ध्यान कर लें.

ऐसा करने से आपको हर काम में सफलता मिलेगी. पुराणों में ऐसा भी बताया गया है कि जिस स्थान पर भी श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा होती है उस घर में गौरी-गणेश, नवग्रह, समस्त भगवान प्रवेश करते है और उस घर के सभी सदस्यों को परेशानी से दूर रखते है. सत्यनारायण की कथा कराने का उत्तम स्थान केले के पेड़ के नीचे अथवा घर के ब्रह्म स्थान पर बताया गया है.

केवल वास्तु ही नही बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी घर में सुख शांति रखते हैं पौधे….

आज जैसे जैसे विज्ञान तरक्की करते जा रहा है वैसे वैसे ही विज्ञान के कुछ बुरे परिणाम भी सामने आ रहे है जिसकी वजह से पूरी दुनिया में लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इसी प्रदूषण से मुक्ति पाने के लिए अब बहुत से लोग अपने घरों में ही छोटे छोटे पौधे लगाने लगे है और खुद को प्रकृति से जुड़ा हुआ महसूस करते है। आज भारत में पौधों की महत्ता इतनी ज्यादा बढ़ गयी है कि लगभग हर घर में एक पौधा जरूर देखने को मिल जाता है।

लेकिन आपको बता दें कि भारत में कुछ लोग अपने घरों में पौधे इसलिए भी लगाते है ताकि उनके घर में हमेशा भगवान का वास बना रहे। आज हम आपको कुछ ऐसे ही पौधों के बारे में बताने जा रहे है जिन्हे घर में रखने से आपके घर में सुख शांति का वास होता है और हमेशा एक सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। केवल इतना ही नहीं बल्कि अब वैज्ञानिकों ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि घर में इन पौधों को रखने का बहुत फायदा होता है।

पीपल का पेड़
हिन्दू शास्त्र में पीपल के पेड़ को अवस्था के नाम से भी जाना जाता है और इस पेड़ की पत्तियों में बहुत ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन मौजूद होती है इसलिए कहा जाता है कि रोज़ सुबह शाम कुछ देर के लिए पीपल के पेड़ के आसपास टहलना चाहिए। लेकिन गलती से भी इस पेड़ को घर के आंगन में न लगाएं क्योंकि इस पेड़ की जड़े इतनी गहरी होती है कि आपके घर की नींव हिला सकती है।

नीम का पेड़
नीम के पेड़ में बहुत से औषधीय गुण मौजूद होते है और अक्सर इसका इस्तेमाल कीटनाशक दवाइयों के बनाने में किया जाता है। केवल इतना ही नहीं बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी बहुत ज्यादा है और नवरात्र में नीम के पेड़ को एक देवी के रूप में भी पूजा जाता है। हालांकि इस पेड़ को आप घर के आंगन में निश्चिंत होकर लगा सकते है।

आम का पेड़
आम के पेड़ के बहुत से फायदे मौजूद है क्योंकि एक तरह जहाँ यह खाने के लिए मीठे मीठे आम देता है तो वहीं इसकी पत्तियों में भी औषधीय गुण मौजूद होते है। धार्मिक दृष्टि से आम के पेड़ की पत्तियों का इस्तेमाल पूजा पाठ के दौरान किया जाता है। इसलिए इस पेड़ को भी आप अपने आंगन में लगा सकते है।

कटहल का पेड़
आम की ही तरह कटहल का इस्तेमाल भी हमारे घर में एक खाद्य पदार्थ के रूप में होता है। कटहल एक ऐसा फल है जिससे बहुत तरह के खाद्य पदार्थ बनाए जा सकते है। साथ ही इसकी पत्तियों का प्रयोग भी पूजा पाठ में किया जाता है। इस पेड़ की छाया भी बहुत घनी होती है इसलिए इसे भी आंगन में लगा सकते है।

केले का पेड़
केले का पेड़ घर में लगाने के बहुत ही फायदे होते है। इस पेड़ का इस्तेमाल एक फल के रूप में भी किया जा सकता है और बहुत सी जगहों पर केले के पेड़ की पत्तियों को थाल के रूप में भी परोसा जाता है। इस पेड़ को भी आप अपने बगीचे में लगाकर पर्याप्त फल प्राप्त कर सकते है।

नारियल का पेड़
नारियल का पेड़ एक ऐसा पेड़ होता है जिसके हर हिस्से का प्रयोग किया जा सकता है। नारियल से तहत सारे व्यंजन बनाये जा सकते है तो इसकी पत्तियों से झोपड़ी भी बनाई जा सकती है। अगर आप चाहे तो इसे भी अपने बगीचे या आंगन में लगा सकते है।

चंदन का पेड़
चंदन के पेड़ को सभी पेड़ो में सबसे ज्यादा कीमती माना गया है। इसकी लड़की से बहुत तरह की कलात्मक वस्तुए बनाई जा सकती है और इसकी लकड़ी को घिस कर चंदन का प्रयोग भगवान की पूजा में भी किया जा सकता है। केवल इतना ही नहीं बल्कि इस पेड़ की लकड़ी भी काफी महंगी होती है।

 

रविवार के दिन लाल गाय को ये चीज खिलाने से घर में आ जाती हैं सुख शांति…..

एक सुखी परिवार देखने में जितना अच्छा लगता है उतना ही मुश्किल होता है उसे हमेशा ऐसे ही बरकरार रखना। हर परिवार में एक दिन ऐसा समय जरूर आता है जब परिवार में आपस में मनमुटाव शुरू हो जाते है। कुछ परिवार तो ऐसे भी होते है जिनमें हमेशा ही लड़ाई झगड़ा होता रहता है। कई बार तो इतनी छोटी छोटी बातों पर लड़ाई हो जाती है कि बाद में सोचने पर पता चलता है कि लड़ाई की तो कोई वजह ही नहीं थी।

इसलिए आज हम आपको एक ऐसा उपाय बताने जा रहे है जिसका पालन अगर आप रविवार के दिन करते है तो आपके लिए बहुत ही ज्यादा फायदा होगा और फिर कभी घर में क्लेश नहीं होगा। दरअसल रविवार को सूर्य भगवान का दिन माना गया है और इस दिन सूर्य भगवान की पूजा करने से घर में हमेशा सुख शांति बनी रहती है।

लाल गाय को खिलाए ये चीज

साथ ही अगर आप रविवार के दिन लाल गाय पर कुमुकम का तिलक लगा कर उसकी पूजा करे तो इससे भी घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। इसके लिए आपको घर में आटे की 11 लोई बना कर उसमें घी और शक्कर डाल कर उसे लाल गाय को खिलाना चाहिए।

यह उपाय सभी राशि के लोग कर सकते है और इस उपाय को अपनाने से आपके घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होगी। केवल इतना ही नहीं बल्कि आपको धन लाभ होने के भी विशेष अवसर मिलेंगे। साथ ही अगर आपको नेत्र दोष है तो आपको रविवार के दिन सूर्य भगवान पर चढ़ाए हुए जल से अपनी आंखों को धोना चाहिए।

घर या दूकान के बाहर टंगे नींबू-मिर्ची के इस वैज्ञानिक लाभ को जानकर हैरान रह जायेगे आप……

हिन्दू धार्मिक ग्रंथ में इंसान से जुड़ी सभी बातों का इतनी स्पष्टता के साथ उल्लेख किया गया है कि इंसान को जीवन में कभी भी किसी समस्या का सामना न करना पड़े। हिन्दू धर्म ग्रंथो में इंसान के ऊपर लगने वाली बुरी नजर का भी वर्णन किया गया है। बुरी नजर एक ऐसी नकारात्मक शक्ति होती है जो किसी भी इंसान के जीवन को बर्बाद कर देती है।

शायद यही कारण है कि भारत में लगभग हर घर या दुकान के बाहर नींबू और हरीमिर्च लटकी हुई दिखाई देती है क्योंकि शास्त्रों में कहा गया है कि नींबू और हरी मिर्च लटकाने से बुरी नजर से बचा जा सकता है क्योंकि नींबू का खट्टापन और मिर्च का तीखापन नजर लगाने वाले इंसान की एकाग्रता भंग कर देता है।

लेकिन अब नींबू और मिर्च को घर के बाहर लटकाने के वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक फायदे भी खोज निकाले है। वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट किया है कि जिस भी घर के बाहर नींबू और हरीमिर्च लटकी होती है वहां इंसान अगर उसे देखता है तो उसके स्वाद को भी अनुभव करने लगता है जिसकी वजह से वह जल्द ही उस जगह से हट जाता है।

केवल इतना ही नहीं बल्कि यह भी माना गया है कि नींबू और हरीमिर्च में कुछ ऐसे गुण मौजूद होते है जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध बना रहता है। साथ ही यह भी माना गया है कि नींबू आसपास की सभी नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है।

जगत के पालनहार भगवान विष्णु के इस रूप की गुरुवार के दिन कर ले पूजा, सब दुःख हो जायेगे दूर…..

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में गुरु को धन का कारक गृह माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उन्हें कभी धन की कमी नहीं होती। अगर आप भी चाहते है कि आप पर गुरु भगवान की कृपा बनी रहे तो उसके लिए आपको गुरुवार के दिन भगवान विष्णु के अवतार शालिग्राम की पूजा करनी चाहिए। शालिग्राम की पूजा करने से केवल आर्थिक लाभ ही नहीं होता बल्कि आपके सभी पाप भी मिट जाते है।

ऐसे करें पूजा

शालिग्राम की पूजा में सबसे पहले आपको शालिग्राम की मूर्ति को स्नान करा कर इस पर चंदन चढ़ाना चाहिए। इसके बाद मूर्ति पर फूल और अक्षत चढ़ाए। इसके बाद आप मूर्ति पर तुलसी की पत्तियों को अर्पित करके भगवान विष्णु की वंदना शुरू करें।

पूजा शुरू करने से पहले ध्यान रखना चाहिए कि पूरा घर अच्छी तरह साफ हो। केवल इतना ही नहीं बल्कि शालिग्राम को हमेशा भगवान विष्णु की मूर्ति के समीप ही रखना चाहिए।

शास्त्रों में कहा गया है कि जिस घर में रोज़ शालिग्राम की पूजा होती है वहाँ देवी लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।

आपको बता दें कि शालिग्राम के रूप में भाग विष्णु ने एक काले रंग के पत्थर का रूप ग्रहण किया था जो भारत में नहीं बल्कि नेपाल की गंडकी नदी में पाए जाते है। इस नदी को तुलसी का भी एक रुप माना जाता है।

यही कारण है कि शालिग्राम के पत्थर पर तुलसी के पत्ते चढ़ाने से अधिक लाभ होता है और भगवान विष्णु भी अधिक प्रसन्न होते है।

साथ ही शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि एक घर में केवल एक ही शालिग्राम का पत्थर होना चहिए और इसे कभी भी स्नान किये बिना नहीं छूना चाहिए।

तुलसी का पौधा पहले ही बता देता हैं घर पर आने वाले संकट, जानिये कैसे….

आज जैसे जैसे विज्ञान तरक्की करते जा रहा है वैसे वैसे ही विज्ञान के कुछ बुरे परिणाम भी सामने आ रहे है जिसकी वजह से पूरी दुनिया में लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इसी प्रदूषण से मुक्ति पाने के लिए अब बहुत से लोग अपने घरों में ही छोटे छोटे पौधे लगाने लगे है और खुद को प्रकृति से जुड़ा हुआ महसूस करते है।

आज भारत में पौधों की महत्ता इतनी ज्यादा बढ़ गयी है कि लगभग हर घर में एक पौधा जरूर देखने को मिल जाता है और जिस पौधे को सबसे ज्यादा घरों में पसंद किया जाता है उसका नाम तुलसी है। असल में तुलसी का पौधा बहुत ही ज्यादा फायदेमंद माना जाता है इसमें न केवल लक्ष्मी का वास होता है बल्कि इसमें बहुत सी बीमारियों को दूर रखने की भी क्षमता होती है।

लेकिन आपको बता दें कि तुलसी के पौधे में एक ऐसी खासियत भी होती है जिसके कारण हम अपने घर पर आने वाले संकट को पहले ही पहचान सकते है और तुलसी का पौधा इस बात का संकेत भी दे देता है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी सुख जाती है उस घर मे संकट आने वाला होता है।

आपको बता दें कि तुलसी में माँ लक्ष्मी का वास माना जाता है और जिस घर में दरिद्रता और क्लेश छाया होता है वहां लक्ष्मी मां बिल्कुल भी नहीं ठहरती। और जब मां लक्ष्मी घर से चली जाती है तो तुलसी का पौधा पूरी तरह सूख जाता है।

दरअसल ऐसा बुध के कारण होता है। बुध को क्लेश और दरिद्रता का कारक माना गया है और जब भी यह किसी घर पर हावी होता है तो सबसे पहले हरे रंग को ही प्रभावित करता है। यही कारण है कि जिस भी घर में तुलसी सुख जाती है उसका अर्थ यह होता है कि उस घर में बुध का प्रवेश हो चुका होता है।

यह वास्तु उपाय अच्छे जीवन साथी के लिए अपनाया जाता हैं….

शादी दुनिया का सबसे पवित्र बंधन माना जाता है। हर इंसान चाहता है कि उसे जीवन में भी उसे शादी को सुख प्राप्त हो और वह अपने जीवनसाथी के साथ पूरा जीवन व्यतीत करें। शादी को लेकर अक्सर लड़कियों में ज्यादा उत्सुकता देखी जाती है और इनकी शादी काफी कम उम्र में ही होने लग जाती है। हर लड़की चाहती है कि उसकी शादी ऐसे लड़के से हो जो उसे रानी बना कर रखे और उसे बहुत प्यार भी करें।

लेकिन ऐसा शुभ अवसर केवल कुछ ही लड़कियों को प्राप्त होता है। बहुत से लोग तो ऐसे भी होते है जिनके जीवन में कभी भी शादी का सपना पूरा नहीं हो पाता। लेकिन आज हम आपको वास्तुशास्त्र के कुछ ऐसे ही नियमो के बारे में बताने जा रहे है जिनका पालन करने से आपको अच्छा जीवनसाथी मिल सकता है।

आप प्रेम विवाह या परंपरागत विवाह करना चाहते है इन दोनों के लिए इन बातों का ध्यान दें-

1) अगर आप चाहते है कि आपका विवाह जल्द ही हो जाये तो इसके लिए आपको काले रंग के वस्त्र पहनने कम करने होंगे क्योंकि काले रंग को शनिदेव और राहु केतु का रंग माना जाता हूं तो विवाह में अक्सर बाधा पहुंचाते हैं।

2) वास्तुशास्त्र के अनुसार आपको अपने पलंग घर के दरवाजे के पास रखकर सोना चाहिए। ऐसा करने से आपको बिना चिंता के नींद भी आएगी और शादी के शुभ संकेत भी बनेंगे।

3) जब भी आपके घर कोई शादी का रिश्ता लेकर आये तो इस बात का ध्यान जरूर रखें कि उनका मुख घर के अंदर की दिशा की तरफ हो। ऐसा करने से घर में विवाह के लक्षण अधिक तेज होते है।

4) अगर आप चाहते है कि आपका विवाह जल्द हो जाये तो उसके लिए आपको अपने घर में सोते समय सिर को उत्तर दिशा की तरफ और पैरों को दक्षिण दिशा की तरफ रख कर सोना चाहिए।

5) अपनी इच्छा का वर या वधु पाने के लिए आपको ऐसे कमरे में सोना चाहिए जिसमें केवल एक ही दरवाजा हो। एक से अधिक दरवाजा होने पर विवाह में बाधा आ सकती है।

6) इतना ही नहीं बल्कि जिस कमरे में आप सोते है उसकी दीवारों के रंग की हल्के रंग से रंगा होना चाहिए जैसे गुलाबी, पिला, आसमानी आदि। क्योंकि इन रंगों से विवाह के संकेत तीव्र बनते है।

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शाम को पूजा करते वक्त इस बात का रखे ख्याल,

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