
,महिला दिवस पर विशेष,
मातृत्व की मिसाल: अनाथ बच्चों की ‘मां’ बनीं दीपमाला विधाणी

एक दिन के नवजात से 6 वर्ष तक के बेसहारा बच्चों को दिया सहारा,
कुपोषित-प्रीमेच्योर शिशुओं को स्वस्थ कर दिलाया परिवार का आंचल:
किलकारी शिशु गृह से देश-विदेश तक पहुंचीं नन्हीं किलकारियां।
खंडवा। कहते हैं कि मां का आंचल किसी भी बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित स्थान होता है। लेकिन जब किसी नन्हीं ज़िंदगी को जन्म के साथ ही यह सहारा नहीं मिल पाता, तब समाज में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो उनके लिए उम्मीद का घर बन जाते हैं।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया खंडवा में ऐसी ही एक संवेदनशील पहल की पहचान बनी हैं संस्था संचालक दीपमाला विधाणी, जिन्होंने अपने जीवन को अनाथ, परित्यक्त और बेसहारा बच्चों के पालन-पोषण और पुनर्वास के लिए समर्पित कर दिया है।
महिला दिवस के अवसर पर उनकी यह पहल मातृत्व, सेवा और महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक कहानी बनकर सामने आती है। सहज समागम फाउंडेशन के माध्यम से संचालित किलकारी शिशु गृह एवं विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण केंद्र वर्षों से उन बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय बना हुआ है जिन्हें जीवन की शुरुआत में ही परिवार का सहारा नहीं मिला।
स्वयं के संसाधनों से खड़ा किया सेवा का घर
दीपमाला विधाणी ने इस कार्य के लिए किसी बड़े संसाधन या सहयोग का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपने स्वयं के संसाधनों और संकल्प के बल पर संस्था के लिए भवन तैयार कराया और शासकीय नियमों तथा प्रक्रियाओं के अनुसार उसे विकसित किया। आज यह केंद्र निमाड़ क्षेत्र में दत्तक ग्रहण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संस्था के रूप में स्थापित हो चुका है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि दीपमाला द्वारा संचालित संस्था में एक दिन के नवजात से लेकर लगभग छह वर्ष तक के बच्चों को सुरक्षित आश्रय, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और पारिवारिक वातावरण दिया जाता है। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि उन्हें परिवार मिलने तक किसी भी प्रकार की कमी महसूस न हो।
प्रीमेच्योर और कुपोषित बच्चों को दिया नया जीवन
किलकारी शिशु गृह की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही है कि यहां कई ऐसे बच्चे भी आए जिन्हें शासकीय रूप से पालन-पोषण के लिए संस्था को सौंपा गया था। इनमें कई शिशु बेहद कम वजन वाले, प्रीमेच्योर जन्मे या कुपोषण की स्थिति में थे।
संस्था में इन बच्चों को विशेष देखभाल, संतुलित पोषण और चिकित्सकीय निगरानी प्रदान की गई। कई बच्चों को कुपोषण की स्थिति से बाहर निकालकर उनका वजन और स्वास्थ्य सामान्य स्तर तक लाया गया। इसके बाद दत्तक ग्रहण की कानूनी प्रक्रिया के लिए आवश्यक सभी स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों को पूरा कराया गया।
50 से अधिक बच्चों को मिला नया परिवार
सुनील जैन ने बताया कि अब तक इस केंद्र के माध्यम से लगभग 50 से अधिक बच्चों को नया जीवन और परिवार का स्नेह मिल चुका है। इन बच्चों को विधिवत कानूनी प्रक्रिया के तहत दत्तक ग्रहण के माध्यम से मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में परिवार मिले हैं।
इतना ही नहीं, संस्था से जुड़े कई बच्चों को देश के बाहर रहने वाले भारतीय परिवारों ने भी अपनाया है। आज ये बच्चे अपने नए परिवारों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण में जीवन की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
CARA के नियमों के अनुसार होती है प्रक्रिया
किलकारी शिशु गृह में दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया CARA (Central Adoption Resource Authority) के दिशा-निर्देशों और शासकीय नियमों के अनुसार की जाती है। इसमें बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य जांच, कानूनी प्रक्रिया और परिवार चयन जैसे सभी चरणों का सावधानीपूर्वक पालन किया जाता है।
संवेदनशीलता की एक मिसाल
इसी मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण हाल ही में सामने आया जब बुरहानपुर के एक अस्पताल में जन्मी एक बालिका को विशेष चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता बताई गई। जानकारी मिलने पर संस्था की टीम ने अस्पताल जाकर बालिका की स्थिति का निरीक्षण किया और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की पहल की। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार बालिका को आगे बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए इंदौर स्थानांतरित कराया गया।
कई बच्चों की बदली जिंदगी
किलकारी शिशु गृह से जुड़े ऐसे कई उदाहरण हैं जहां समय पर संरक्षण और देखभाल मिलने से बच्चों का जीवन बदल गया। कई बच्चे आज बड़े शहरों में अपने दत्तक माता-पिता के साथ पढ़ाई कर रहे हैं और सुरक्षित वातावरण में अपना भविष्य संवार रहे हैं।
“हर बच्चे को परिवार का अधिकार”
संस्था संचालक दीपमाला विधाणी का कहना है कि हर बच्चे को परिवार और स्नेह का अधिकार मिलना चाहिए। उनका मानना है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो कोई भी बच्चा असहाय नहीं रहेगा और हर नन्हीं ज़िंदगी को एक सुरक्षित भविष्य मिल सकेगा।











