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*देहदान का संकल्प सभी दानों से महान : पं. नवल किशोरजी*

*नानी बाई के मायरे की कथा में ओंकार सिंह भिलाला ने की देहदान की घोषणा*

*देहदान का संकल्प सभी दानों से महान : पं. नवल किशोरजी*

*नानी बाई के मायरे की कथा में ओंकार सिंह भिलाला ने की देहदान की घोषणा*

खण्डवा। खण्डवा स्थित वारको सिटी में आयोजित नानी बाई के मायरे की कथा में धार्मिक वातावरण के बीच एक प्रेरणादायक क्षण तब आया, जब ओंकार सिंह भिलाला ने मानव सेवा के लिए देहदान का संकल्प लिया। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं और समाजजनों ने उनके इस निर्णय की सराहना की।
कार्यक्रम में पधारे पंडित नवल किशोरजी ने देहदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में लोग विभिन्न प्रकार के दान करते हैं—कोई धन का दान करता है, कोई वस्तुओं का दान करता है—लेकिन देहदान ऐसा महान दान है, जो मानवता के लिए सबसे बड़ा और अमूल्य योगदान माना जाता है। उन्होंने सभी उपस्थित जनों से आह्वान किया कि वे भी इस महान सेवा कार्य के लिए आगे आएं और देहदान व नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाएं।संयोजक नारायण बाहेती व समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि लायन्स नेत्रदान देहदान एवं अंगदान जनजागृति समिति द्वारा भागवत कथा व धार्मिक एवं बड़े आयोजनों में देहदान की जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है। लायन्स, सक्षम संस्था व समिति के सहयोग से यह 168 वा देहदान घोषणा पत्र भरा गया। मरणोपरांत 22 देह मेडिकल कॉलेज को दान की गई। मरणोपरांत 521 व्यक्तियों के नेत्रदान करवाये गए।
श्रीमद्भागवत कथा में देहदान समिति के सदस्यों नारायण बाहेती, अनिल बाहेती, राजीव शर्मा, सुनील जैन, सुरेंद्र सोलंकी व सदस्यों ने ओंकार सिंह भिलाला का पुत्र दीपक पुत्री ममता सोलंकी की सहमति युक्त देहदान संकल्प पत्र प्राप्त किया। ओंकारसिंह भिलाला का इस महादान के लिए सम्मान किया गया। इस दौरान अनिल बाहेती ने कहा कि समाज में देहदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति यदि नेत्रदान या देहदान का संकल्प लेना चाहता है, तो वह देहदान समिति से संपर्क कर सकता है। समिति द्वारा इस कार्य के लिए पूरी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाता है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने श्री ओंकार सिंह भिलाला के इस प्रेरणादायक निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक आदर्श पहल बताया।

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