
अपने स्वयं की पढ़ाई के बल पर रूपल ने शिक्षा के क्षेत्र में खंडवा का नाम किया रोशन।
खंडवा की रूपल जायसवाल ने यूपीएससी के रिजल्ट में 43वीं रैंक हासिल की हुआ स्वागत और सम्मान।
खंडवा। दादाजी की नगरी खंडवा में सभी विधाओं में प्रतिभाओं की कमी नहीं इन प्रतिभाओं को यदि कोई अच्छा मंच प्राप्त हो जाता है तो यह अपने हुनर का परिचय देते हुए शानदार प्रदर्शन करते हुए खंडवा का नाम देश-विदेश में रोशन करती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी खंडवा के छात्र छात्राएं शानदार प्रदर्शन कर अपने परिवार के साथ खंडवा का नाम रोशन कर रहे है। समाजसेवी को प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि खंडवा के लिए हर्ष का विषय है की रूपल जायसवाल ने अपनी मेहनत के बल पर सिविल सेवा परीक्षा में देश भर में 43 वां स्थान हासिल किया है। रूपल कलेक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहती है। रुपल ने बताया कि उसका तीसरा प्रयास था और जब इंटरव्यू की बारी आई तब इंटरव्यू में उसे खंडवा और किशोर कुमार को लेकर के काफी सवाल पूछे गए। किशोर कुमार का यह शहर कितना दीवाना है। किशोर दा की नगरी में उनका क्या है यह सब सवाल उनसे इंटरव्यू में पूछे गए थे। रूपल ने बताया कि किशोर दा ने खंडवा में जन्म लिया और देश में खंडवा का नाम रोशन किया या उनका स्मारक एवं समाधि है। सुनील जैन ने बताया कि रूपल पिता धनंजय जायसवाल का यह तीसरा प्रयास था 2023 में उसने वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई में जब उसने जाब किया तब से सुकून नहीं मिला, आईएएस बनने का सपना देखा और 2023 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा में शामिल हुए लेकिन यूपीएससी की परीक्षा वह पास नहीं कर पाई। रूपल ने यहां हार नहीं मानी और उसने 2024 में दोबारा इसकी तैयारी करते हुए परीक्षा दी। इस परीक्षा में रूपल को 512 वां स्थान प्राप्त हुआ। लेकिन इस उपलब्धि से भी रूपल संतुष्ट नहीं हुई। उसकी आंखों में कुछ और सपने थे। वह कलेक्टर बनकर लोगों की सेवाएं करना चाहती थी।लिहाजा उसने वर्ष 2025 में यूपीएससी कि परीक्षा दी इस तीसरे प्रयास में उसे 43 वां स्थान हासिल हुआ। जैसे ही इस उपलब्धि की खबर उसको एवं परिजनों को प्राप्त हुई तो पूरे परिवार में उत्साह छा गया ढोल ढमाके आतीशबाजी के साथ इस उपलब्धि का स्वागत किया गया। इस सफलता को लेकर रूपल के रिश्तेदार से लेकर मोहल्ले वाले और उसके समाज के लोग सभी काफी आनंदित और प्रफुल्लित हैं। सुनील जैन ने बताया कि रूपल का कहना है कि वह कलेक्टर बनकर आम जनता के दुख हर दर्द का निवारण करना चाहती है क्योंकि उसने खंडवा में रहकर के कई लोगों के सपनों को तिल तिल मरते हुए देखा है। रूपल के पिता सिविल इंजीनियर हैं ऐसे में अपनी छोटी सी उपलब्धि से उन्होंने अपनी बेटी को ऊंची उड़ान देने के लिए दिन रात काफी मेहनत की। बेटी ने भी बिना किसी कोचिंग का सहारा लिए घर पर ही 15 घंटे तैयारी करते हुए इस यूपीएससी एक्जाम को क्रैक किया है। रूपल ने ऑनलाइन कोचिंग के चक्कर में आने वाले बच्चों से भी अपील की है कि उनका खुद के द्वारा की गई

मेहनत ही उसे ऊंचा मुकाम हासिल करवाएगी।











