
ग्रहण की छाया में फीकी रही धुलेंडी की रौनक
मंदिरों के पट बंद, भजन-कीर्तन में लीन रहे श्रद्धालु।

बाजार खुले, पर रंग-गुलाल की खरीददारी में नहीं दिखा उत्साह।
शहर के कुछ स्थानों पर होली खेलते नजर आए युवा, आज मनेगी रंगों की होली।
खंडवा। संभवत: पहली बार होलिका दहन के दूसरे दिन पड़े ग्रहण के कारण इस वर्ष धुलेंडी का पर्व अपेक्षित उत्साह के साथ नहीं मनाया जा सका। जहां आमतौर पर रंग, गुलाल और पिचकारियों से सजी दुकानें ग्राहकों से गुलजार रहती हैं, वहीं इस बार बाजारों में रौनक कम नजर आई। व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले तो रहे, लेकिन सन्नाटा नजर आया रंगों की खरीदारी सीमित रही और सड़कों पर भी सामान्य दिनों जैसी चहल-पहल दिखाई दी। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि सोमवार रात्रि में शहर के सैकड़ो स्थान पर होलिका दहन किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में मंदिरों के पट बंद रखे गए। शहर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही ताले लगे रहे और नियमित पूजा-अर्चना स्थगित कर दी गई। मंगलवार ग्रहण का समय दोपहर 3:30 से शाम 6:45 तक था। श्रद्धालुओं ने घरों में ही भजन-कीर्तन और मंत्र जाप कर समय व्यतीत किया। कई स्थानों पर धार्मिक संगठनों द्वारा सामूहिक रूप से भजन संध्या और पाठ का आयोजन किया गया, जहां लोग आस्था के साथ शामिल हुए। ग्रहण के कारण रंग खेलने की परंपरा भी प्रभावित रही। सार्वजनिक स्थानों, चौक-चौराहों और कॉलोनियों में जहां हर वर्ष धुलेंडी के दिन युवाओं और बच्चों की टोलियां रंग-गुलाल उड़ाती नजर आती हैं, वहां इस बार सन्नाटा अधिक दिखाई दिया। कुछ स्थानों पर प्रतीकात्मक रूप से ही लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की औपचारिकता निभाई।
हालांकि, शहर के कुछ परिवारों में जहां हाल ही में शोक की स्थिति रही, वहां परंपरा के निर्वहन के लिए परिचित और रिश्तेदार सीमित रूप में पहुंचे और प्रतीकात्मक रंग-अभिनंदन किया। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि सामाजिक समरसता और परंपरा को ध्यान में रखते हुए लोगों ने मर्यादित ढंग से त्योहार की भावना को जीवित रखा।
ग्रहण काल समाप्त होने के बाद मंदिरों में विधिवत साफ-सफाई की गई। पुजारियों द्वारा शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूर्ण कर भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की गई और आरती उतारी गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के पट पुनः खोल दिए गए। शाम होते-होते कुछ स्थानों पर सामान्य गतिविधियां शुरू हो गईं, लेकिन रंगोत्सव जैसा माहौल नहीं बन सका।
व्यापारियों का कहना है कि ग्रहण के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई है। रंग, गुलाल और त्योहार से संबंधित अन्य सामग्री की बिक्री पर इसका असर पड़ा है। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि बुधवार को धुलेंडी मनाए जाने के कारण बाजारों में फिर से रौनक लौटेगी।
कुल मिलाकर इस वर्ष धुलेंडी का मुख्य उत्सव बुधवार को मनाया जाएगा। सुनील जैन ने बताया कि प्रशासन और धार्मिक संगठनों की ओर से भी लोगों से संयम और सौहार्द के साथ पर्व मनाने की अपील की गई है। शहरवासियों को उम्मीद है कि ग्रहण की छाया हटने के बाद रंगों का यह पर्व पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।








