*श्री श्रीधराचार्य जी महाराज ने प्रथम दिवस सुनाई भक्त चरित्र की प्रेरक कथाए*
खण्डवा। अग्रवाल परमार्थिक भवन, कल्लनगंज में परम पूज्य गुरुजी श्री श्रीधराचार्य जी महाराज की दो दिवसीय भक्त चरित्र कथा के प्रथम दिवस पर भक्तिमय वातावरण निर्मित हो गया। दोपहर 2 बजे से 6 बजे तक आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भक्ति रस में सराबोर हुए।जानकारी देते हुए समाजसेवी नारायण बाहेती व सुनील जैन ने बताया कि प्रथम दिवस पर महाराज श्री ने रामानुजाचार्य का अत्यंत प्रभावी एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि भगवान की भक्ति तो श्रेष्ठ है ही, परन्तु भगवान के भक्तों की भक्ति और अधिक श्रेष्ठ है। भगवान और भक्तों का संबंध अत्यंत मधुर होता है। भगवान को सर्वस्व मानने वाले भक्तों को आलवर कहा जाता है। उन्होंने 12 आलवरों का उल्लेख करते हुए उनके जीवन एवं भक्ति का प्रेरक वर्णन किया।
कथा के दौरान महाराज श्री ने शंकराचार्य एवं रामानुजाचार्य जी के भक्ति प्रसंगों का भी विशेष वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची भक्ति, अटूट विश्वास और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण से असंभव भी संभव हो जाता है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी जिसने भगवान का साथ नहीं छोड़ा, वही जीवन में सफल होता है। भक्तों के चरित्र का अनुसरण करने से समाज में सत्य, साहस, धैर्य और धर्म की स्थापना होती है।
कथा के दौरान “भक्त बिना भगवान नहीं” सहित विभिन्न भजनों एवं संकीर्तन से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारों के साथ कथा का आनंद लिया। मुख्य यजमान भागचंद अग्रवाल (भग्गू भाई)एवं उनके परिवारजन द्वारा व्यासपीठ का पूजन एवं आरती कर महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के प्रारंभ में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ समिति के हरिप्रसाद बंसल, रामस्वरूप बाहेती, राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल, नारायण बाहेती, विजय राठी, सुनील जैन, शैलेन्द्र अग्रवाल, अनिल बाहेती एवं राजनारायण परवाल ने महाराज श्री का स्वागत कर आशीर्वाद लिया। महाआरती एवं प्रसाद वितरण के साथ प्रथम दिवस की कथा का समापन हुआ।
इस अवसर पर राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल, भागचंद रामगोपाल अग्रवाल, गोवर्धन अग्रवाल ,किशन अग्रवाल,विनोद अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में महिलाओं एवं पुरुषों ने कथा श्रवण का लाभ लिया। समिति सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं से द्वितीय दिवस की भक्त चरित्र कथा में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भक्ति-रस, हरिकथा-सुधा एवं सत्संग-सौरभ का लाभ लेने की अपील की।












