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वीतराग विज्ञान का घर घर हो प्रचार, बच्चों को प्रदान करें धार्मिक संस्कारो का ज्ञान, ,डॉ विवेक जैन,

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वीतराग विज्ञान का घर घर हो प्रचार, बच्चों को प्रदान करें धार्मिक संस्कारो का ज्ञान, ,डॉ
विवेक जैन,

जैनत्व शिविर के माध्यम से समाज के बच्चे सीख रहे हैं अभिषेक एवं पूजा पद्धति।

खंडवा। प्रतिवर्ष मुमुक्ष मंडल द्वारा धर्म की प्रभाव एवं समाज के बच्चों को धार्मिक विद्या एवं संस्कारों के ज्ञान को लेकर जैनत्व बाल संस्कार शिक्षण शिविर का आयोजन किया जाता है इस वर्ष भी सराफा स्थित जैन धर्मशाला में जैनत्व बाल संस्कार शिक्षण शिविर का आयोजन चल रहा है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि जैन धर्मशाला में दुसरे दिन प्रातः 6:45 प्रभात फेरी उसके पश्चात 7:15 से श्री जी का  बच्चों द्वारा अभिषेक के तत्पश्चात देव शास्त्र एवं नित्य नियम पूजन बच्चों द्वारा किया गया 9:00 बजे से छिंदवाड़ा से पधारे डॉ विवेक जी जैन द्वारा प्रवचन किया गया, दोपहर 2:00 बजे से 4:00 बजे तक विधान की पूजन भक्ति भाव के साथ की गई, एवं शाम को बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। छिंदवाड़ा से पधारे डॉ. विवेक जैन ने प्रवचन में कहा कि बड़े पुण्य भाव से हमें मनुष्य भाव प्राप्त हुआ है इसका सदैव सदुपयोग करें अपने नीति कार्यों के साथ एवं शास्त्र गुरु के प्रति अपनी भावना बनाए रखें,
आत्मज्ञान ही ज्ञान है शेष सभी अज्ञान, विश्व शांति का मूल है वीतराग विज्ञान,
वीतराग विज्ञान ही तीन लोक में सार, वीतराग विज्ञान का घर घर होय प्रचार, डॉ विवेक जैन ने कहा कि चिंतामणि रत्न की प्राप्ति से भी अतिदुर्लभ इस मनुष्य जन्म को पाकर भी यदि इस जीव ने भेद विज्ञान के बल से स्वयं को देहादिक से भिन्न देखने का पुरुषार्थ नहीं किया तो ये अवसर तो चला जायेगा और फिर पुनः जन्म मरण के अभाव रूप संसार दुख के नाश करने का ऐसा अवसर पुनः प्राप्त होना असंभव है इसीलिये आचार्य भगवान करुणा कर कहते है। कि हे भव्य जीव ! किसी भी तरह से मर पचकर भी आत्मानुभूति का पुरुषार्थ करना योग्य है अतः यदि अपना कल्याण करना चाहते हो तो छह माह के लिये प्रतिज्ञाबद्ध होकर इस शरीर को पडौसी की तरह देखकर इससे विरक्त हो जा और अपनी आत्मा में रहकर अपूर्व आनंद का सुख भोग।

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