
*बाल श्रम के खिलाफ बाल कल्याण समिति खंडवा का अभियान, दो बच्चों को स्कूल से जोड़ने की पहल*
खंडवा
बाल श्रम उन्मूलन को लेकर बाल कल्याण समिति खंडवा द्वारा शहर में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत समिति की टीम ने विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को बाल श्रम के खिलाफ जागरूक किया और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का संदेश दिया।
भ्रमण के दौरान टीम को एक गन्ने की चरखी पर कार्य करते हुए लगभग 12-13 वर्ष के दो नाबालिग बालक मिले। समिति के सदस्यों ने बच्चों एवं उनके परिजनों से संवाद स्थापित कर उन्हें शिक्षा के महत्व तथा बाल श्रम के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया।
समिति की समझाइश का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला और दोनों बच्चों को स्कूल में प्रवेश लेकर पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया गया। इस मानवीय पहल की स्थानीय नागरिकों ने भी सराहना की।
अभियान अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में संचालित हुआ, जिसमें सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल एवं स्वप्निल जैन सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। टीम ने संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए यह संदेश दिया कि हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए और बाल श्रम के खिलाफ सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
बाल श्रम अधिनियम के तहत प्रावधान
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 (संशोधित 2016) के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक व्यवसायों में कार्य पर लगाना भी दंडनीय अपराध है। इस अधिनियम के उल्लंघन पर नियोक्ता के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
समिति ने आमजन से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल श्रम होता दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा कर उनका भविष्य सुरक्षित किया जा सके।







