खरगोनमध्यप्रदेश

अम्रतकाल के अगले 25 वर्षों में भारत बनेगा महाशक्ति विधायक श्री बालकृष्ण पाटीदार

विधि महाविद्यालय में भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली मैं युगांतकारी परिवर्तन विषय पर शुरू हुआ वैचारिक मंथन

अमृतकाल के अगले 25 वर्षों में भारत बनेगा महाशक्ति”- विधायक श्री पाटीदार

 

विधि महाविद्यालय में “भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में युगांतकारी परिवर्तन” विषय पर शुरू हुआ वैचारिक मंथन

 

 खरगोन से ब्यूरो चीफ अनिल बिलवे की रिपोर्ट…

खरगोन 13 फरवरी 2026। शासकीय विधि महाविद्यालय खरगोन में “भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में युगांतकारी परिवर्तन” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में विधायक श्री बालकृष्ण पाटीदार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी की संयोजक एवं सचिव सुश्री तृप्ति सोनी ने रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य कानून के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों, सामाजिक न्याय और समकालीन विधिक चुनौतियों पर गंभीर विमर्श करना है। विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दिग्विजय सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

 

मुख्य अतिथि विधायक श्री पाटीदार ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसी शोध संगोष्ठियाँ विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि भारत आजादी के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है और आने वाले 25 वर्षों में देश को महाशक्ति बनाने की दिशा में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। प्राचार्य डॉ. जी.एस. चौहानने आपराधिक प्रवृत्तियों और कानून की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, वहीं डॉ. आर.एस. देवड़ा ने विधि महाविद्यालय की स्थापना संबंधी जानकारी साझा की।

 

प्रथम तकनीकी सत्र के दौरान मुख्य वक्ता डॉ. भूपेन्द्र करवंदे, प्राध्यापक, शासकीय योगानंद विधि महाविद्यालय रायपुर ने अमृतकाल में हुए विधिक परिवर्तनों पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए भारतीय दंड संहिता से भारतीय न्याय संहिता में हुए बदलावों को स्पष्ट किया। द्वितीय तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. कैलाश कुर्मी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में हुए महत्वपूर्ण संशोधनों पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्र में शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूर्णिमा बीसे एवं सुश्री शिवांगी निराले ने किया तथा आभार प्रदर्शन सुश्री तृप्ति जायसवाल द्वारा किया गया। डॉ रमेश चौहान, डॉ. गणेश पाटिल, गजेंद्र पाटीदार तथा शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए। अंत में प्रो. चन्द्रभान त्रिवेदी ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। इस अवसर पर प्रो. कीर्ति पटेल, प्रो. पी.एस. रावत, प्रो. शशांक गोले, प्रो. राहुल मानवे सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधार्थी, महाविद्यालय का संपूर्ण स्टाफ एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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