फोटोग्राफी,रोमांच और रचनात्मकता की रागात्मक अभिव्यक्ति है, ,,डॉ अरुण रमेश जोशी,,
खंडवा। कला का सर्वव्यापी और स्वीकार्य स्वरूप फोटोग्राफी है, फोटोग्राफर की दृष्टि और प्रकाश संयोजन का ज्ञान उसे सामान्य से अलग बनाता है, आजादी के संघर्ष के श्वेत-श्याम फोटोग्राफ भी सिर्फ फोटोग्राफर की दृष्टि और प्रकाश संयोजन के कारण आज भी प्रभावी है, वनमाली सृजन पीठ खंडवा द्वारा आयोजित सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर तनवीर फारूकी के एकल प्रदर्शन के अवसर पर अध्यक्षता करते हुए डॉ अरुण रमेश जोशी ने श्रोताओं को संबोधित किया। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि कार्यक्रम में कुलसचिव रवि चतुर्वेदी ने युवाओं को कला के विभिन्न आयामों से जोड़ने का आव्हान किया। शबनम शाह ने विभिन्न संस्थानों के कला के विद्यार्थियों का समन्वित शिविर लगाने का विचार दिया। मुख्य अतिथि तनवीर फारूकी ने फोटोग्राफी प्रदर्शनी मे चित्रों के माध्यम से दर्शकों को फोटोग्राफी की बारीकियों से परिचित करवाया। कार्यक्रम में शहर के कला प्रेमी नागरिक उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन वनमाली सृजन पीठ के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने किया।













