संवाददाता अखिलेश विश्वकर्मा का रिपोर्ट गढ़वा
गढ़वा से
गढ़वा सदर अस्पताल के गाइनी वार्ड में मरीजों से अवैध वसूली का धंधा चरम पर है। इसमें नर्स समेत सफाई कर्मी तक सुविधा देने के नाम पर मरीजों व उनके स्वजनों से पैसे वसूल कर रहे हैं। जबकि नर्सों द्वारा कई मरीजों को निजी अस्पताल में भी भेज देना भी आम बात है।

लेकिन अस्पताल प्रबंधन एवं स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों की चुप्पी एवं मिलीभगत से इस पर लगाम नहीं लग पा रहा है। किसी मामले के सामने आने पर जांच के नाम पर लीपापोती कर दी जाती है। वर्षाें से कई नर्सें गाइनी वार्ड में ही ड्यूटी कर रही हैं। आलम यह है कि प्रसव कक्ष में तैनात नर्सों का नर्सों की मनमानी इतनी बढ़ी हुई है। प्रसव कराने में मूसहर परिवार तक को नहीं बख्श रहे हैं।
गुरुवार की रात कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है। जब सदर अस्पताल में प्रसव के लिए आई फटेहाल जिंदगी जीने वाले मूसहर परिवार की एक महिला से 500 रुपये वसूले गए।
– जानें क्या है पूरा मामला –
डंडा थाना क्षेत्र के गड़ेरियाडीह में इन दिनों मूसहर परिवार का अस्थायी बसेरा है। उसी परिवार के राकेश मूसहर की पत्नी संजू देवी को गुुरुवार की रात में प्रसव के लिए लाया गया था। नार्मल डिलेवरी से महिला ने रात 3:30 बजे एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची का वजन 2 किग्रा 600 ग्राम है। बताया गया कि प्रसव के बाद नर्सों ने पैसे के लिए दबाव देने लगी और मरीज के स्वजनों ने 500 रुपये वसूल लिये। इस संबंध में प्रसूता संजू देवी के साथ अस्पताल आई उसकी ननद मंजू देवी ने बताया कि नर्सों के दबाव पर उन्हें पैसे देना पड़ा है।हमलोग सरकारी अस्पताल में आए थे। लेकिन यहां भी पैसे लिए गए।
– मामला के चर्चा में आने पर दवा मंगाने के लिए पैसे लेने की बात स्वीकारी नर्स –
सदर अस्पताल में गुरुवार की रात ड्यूटी में रही नर्स नीतू कुमारी एवं सुषमा कुमारी द्वारा मूसहर परिवार से प्रसव के नाम पर पैसे लिए जाने की बात के उजागर होते ही अस्पताल प्रबंधन डैमेज कंट्रोल में लग गया। इस संबंध में नर्सों ने कहा कि दवा मंगाने के लिए 500 रुपये लिए थे। नर्स नीतू ने कहा कि महिला को ब्लड कम था। इस कारण हीमासील आइवी नामक दवा मंगाने के लिए 500 रुपये लिए थे। बताया कि हीमासील की कीमत 530 रुपये है।
-पक्ष –
प्रसव के मामले में रक्त की कमी होने पर रिंगर या फिर रक्त ही चढ़ाया जाना चाहिए।
लेकिन यदि किसी चिकित्सक ने हीमासील चढ़ाने की सलाह दी होगी तो उस पर सवाल खड़ा नहीं करेंगे। डीएस ने कहा कि हीमासील सदर अस्पताल में मंगाया जाता है। मरीजों को निश्शुल्क चढ़ाया जाता है। लेकिन हो सकता है कि हीमासील स्टाक में नहीं हो, तब बाहर से मंगाने की जरूरत पड़ी हो। उन्होंने कहा कि दवा की खरीद सिविल सर्जन द्वारा की जाती है। हीमासील स्टाक में क्यों नहीं है, इस पर वे कुछ नहीं कह सकते हैं। मेरा काम सिर्फ अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था संभालना है।
– डा.हरेनचंद्र महतो, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल, गढ़वा।









