
आत्मा को परमात्मा बनाने की पहली सीढ़ी संयम है, ,,मुनि श्री विशोध सागर,,
मुनि श्री के सानिध्य में पंधाना नगर में हो रही है धर्म प्रभावना।
खंडवा।। आचार्य श्री आर्जव सागर जी मुनिराज के शिष्य गुरुदेव विशोध सागर जी महाराज महाराष्ट्र के चिखली में चातुर्मास करने के पश्चात पद विहार करते हुए बुरहानपुर से पंधाना पहुंचे। समाज जनो ने मुनि श्री की मंगल अगवानी की। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि शुक्रवार को मुनि श्री विशोद सागर जी महाराज ने पंधाना नगर के श्री पदम प्रभु जैन मंदिर में श्रावकों का एक प्रमुख ग्रंथ रत्नकरण श्रावकाचार पर प्रकाश डालते हुए कहा की यदि गृहस्थी श्रावक मुनि नहीं बन सकता, साधु नहीं बन सकता तो उसे मोक्ष मार्ग पर चलते हुए साधु की भक्ति के साथ सेवा करना चाहिए। गृहस्थी आहार दान, औषधी दान, शास्त्र दान और अभय दान के माध्यम से स्वयं अपना भी कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। मुनि श्री ने कहा
की आत्मा को परमात्मा बनाने की पहली सीढ़ी संयम है, कलयुग में संयम ग्रहण कर मोक्ष पद को सुलभता से प्राप्त किया जा सकता है। बड़े पुण्य कर्म से हमें मानव जीवन मिला है, इस मानव जीवन का सदुपयोग करें, सदैव देव शास्त्र गुरु के प्रति हमारा समर्पण रहे, जिससे हमारा जीवन सफल हो सके। सुनील जैन ने बताया कि मुनि श्री ने विनय और अनुशासन के माध्यम से भी ज्ञानावर्णी कर्मों की तीव्रता को कम करने के उपाय बताएं। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि प्रवचन के पश्चात आहार दान का सौभाग्य प्रीति गिरीश कुमार जैन के निज निवास पर महिला मंडल के सहयोग से संपन्न हुआ। मुनि श्री के प्रतिदिन प्रवचन प्रातः 8:30 बजे, आहारचर्या 10:00 बजे दोपहर को 3:00 बजे तत्व चर्चा एवं क्लास रहेगी 6:30 बजे गुरु भक्ति होगी।










