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*शताब्दी समारोह :: साधना, समर्पण व सौभाग्य की त्रिवेणी के 100 साल।*

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*शताब्दी समारोह :: साधना, समर्पण व सौभाग्य की त्रिवेणी के 100 साल।*
*251 गायत्री परिजन शामिल होने हुवे रवाना*

खण्डवा//बसन्त पंचमी 1911 को परम पूज्य गुरुदेव की साधना स्थली में प्रथम बार स्वमेव प्रज्वलित दीपक आज भी ज्यो का त्यों गायत्री तीर्थशांतिकुंज हरिद्वार में प्रज्वलित है। अखंड दीपक के 100 साल पूरे होने साथ साथ गायत्री परिवार की संस्थापिका और संचालिका माता भगवती देवी शर्मा का यह जन्म शताब्दी वर्ष है। तीसरा, गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा की तप साधना की शुरुआत के भी बसन्त पर्व पर 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस उपलक्ष्य में 20 से 24 जनवरी तक होने वाले आयोजन में देश-विदेश से चिन्हित हजारों कार्यकर्ता, साधक और आमजन शामिल होने हेतु पहुँच रहे है।
आज खंडवा जिले से डॉ मधुसूदन गीते के नेतृत्व में एडव्होकेट देवेंद्र सिंह यादव, जगदीश समेडिया, डॉ आर के सोनी, सुखपाल सिह पंवार, मोहन सिंह चौहान मुकेश मालवीय डॉक्टर अजय लाड संतोष खेडेकर डॉक्टर मुकेश अत्रे, श्रवण सिह चौहान, श्यामसिंह परिहार, के एस चौहान, अमरीश राठौर, तुलसीराम सोलंकी,अजय गुप्ता, अनिल राठौर, दिलीप राठौर गीता यादव, रुपाली पटेल,संगीता खेडेकर,मेघा लाड़, रेशम समेडिया,सुनीता चौहान, उमा सोलंकी सहित 100 परिजनो की टोली आयोजन में भाग लेने हेतु शांतिकुंज हरिद्वार रवाना हुई।
अखिल विश्व गायत्री परिवार खण्डवा जिला सहसमन्यवक एड.देवेंद्र सिंह यादव ने बताया कि आयोजन का केंद्र बिंदु युग-निर्माण, मानवीय मूल्यों का जागरण और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार रहेगा, इसके तहत कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों की झांकियां प्रदर्शित होंगी। पुस्तक मेला आयोजन का मुख्य आकर्षण होगा। इसमें पहली बार शताब्दी पुरुष 3200 पुस्तकें एक साथ देखी जा सकेंगी।
*युग सृजन कार्यक्रम -*
प्रातःकालीन सत्र के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। पहले दिन विचार-प्रेरक सत्र,
मार्गदर्शन उद्बोधन और संगठनात्मक बैठकें होंगी। वरिष्ठ मार्गदर्शक युग-निर्माण की
अवधारणा, सामाजिक पुनर्निर्माण और व्यक्ति निर्माण पर विस्तार से चर्चा करेंगे। साधना, जप और सामूहिक उपासना के कार्यक्रम भी होंगे। 22 जनवरी को दूसरा दिन विशेष रूप से प्रशिक्षण और सहभागिता को समर्पित रहेगा। इस दिन विभिन्न विषयों पर कार्यशालाएं, संवाद सत्र और अनुभव साझा करने के कार्यक्रम होंगे।
तीसरे दिन, 23 जनवरी को सामूहिक संकल्प, भविष्य की कार्ययोजना और शताब्दी वर्ष के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया जाएगा। मार्गदर्शक प्रेरक उद्बोधन देंगे। इनमें समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर रहेगा। समापन पर सामूहिक यज्ञ एवं प्रार्थना भी होगी।
पूरे आयोजन में लगभग 3 लाख से अधिक परिजनों के भाग लेने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

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