
मनरेगा को पुनः उसके स्वरूप में लागू किए जाने की मांग को लेकर कांग्रेस ने तहसील कार्यालय पर दिया ज्ञापन।
बडौद
मध्यप्रदेश कांग्रेस केश शिल्पी प्रकोष्ठ
लखन सेन के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तहसील कार्यालय पर पहुँच कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि VB-G RAM G कानून, 2025 को तत्काल वापस लेने एवं मनरेगा (MGNREGA) को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में पुनः लागू किए जाने की मांग की गई है।
भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित VB-G RAM G कानून, 2025 को बिना मजदूरों, ग्राम सभाओं, पंचायतों एवं श्रमिक संगठनों से किसी भी प्रकार का परामर्श लिए बिना लाया गया है। यह न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अवहेलना है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के संवैधानिक और आजीविका संबंधी अधिकारों पर सीधा हमला भी है।
मनरेगा अधिनियम, 2005 एक कानूनी, मांग-आधारित एवं विकेंद्रीकृत अधिकार था, जिसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में कम-से-कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई थी। इस कानून ने देश के करोड़ों गरीब ग्रामीण परिवारों—विशेषकर महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, भूमिहीन मजदूरों एवं वंचित वर्गों—को आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक आजीविका प्रदान की।
प्रस्तावित VB-G RAM G कानून, 2025, मनरेगा के इस अधिकार-आधारित स्वरूप को समाप्त कर उसे एक बजट-नियंत्रित योजना में परिवर्तित कर देता है। इसमें काम, बजट और प्राथमिकताएँ केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाएँगी, जिसका अर्थ होगा—
“पहले बजट, फिर काम”, जबकि मनरेगा की मूल भावना थी—
“काम की मांग, तो काम की गारंटी”।
यह बदलाव मनरेगा की आत्मा पर सीधा प्रहार है।
इसके अतिरिक्त,
60:40 लागत-साझेदारी व्यवस्था लागू किए जाने से राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों में मनरेगा के कार्य ठप होने की आशंका है।
इससे बेरोजगारी, गरीबी और ग्रामीण पलायन में अत्यधिक वृद्धि होगी l
यह व्यवस्था 73वें संविधान संशोधन के तहत ग्राम सभाओं एवं स्थानीय स्वशासन की शक्तियों को कमजोर करती है। ज्ञापन में नेमीचंद जैन प्रकाश शर्मा शंभू सिंह सिसोदिया जाकिर राणा सलीम कुरैशी मांगीलाल पटेल लखन सेन महेश अहिरवार आयुष जैन जितेंद्र राव अमित जैन शाम राव आदि कई कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहै।








