चित्त निर्मल करना है तो चित्र को बदलना होगा- शौच का अर्थ पवित्रता से है, ,,,विश्रुतसागरजी,,

दसलक्षण पर्व का चतुर्थ दिवस,निर्वाण लाडू के साथ ही मनाया उत्तम शौच धर्म।
त्याग और तपस्या के पर्युषण पर्व पर तपस्वी कर रहे हैं उपवास।
खंडवा। लोभ और लालच की प्रवृत्ति को त्यागना शौच धर्म है। धर्म के दस लक्षणो में शौच धर्म को चतुर्थ स्थान दिया गया है। दिगम्बर जैन आगम के अनुसार दसलक्षण पर्व कषाय और पापादिक क्रियाओं से बचने और उनके प्रायश्चित पर आधारित हैं।प्रारम्भ के चार धर्म उत्तम क्षमा,मार्दव,आर्जव और शौच चार कषायों क्रोध,मान, माया और लोभ पर आधारित हैं। शरीर आदि जड़ पदार्थों की बहिरंग पवित्रता स्नान आदि से मान ली जाती है लेकिन आत्मा और मन की पवित्रता के लिये शौच धर्म को अपनाना होगा।लोभ और लालच के कारण हम सर्वाधिक पाप करते है।इसीलिए लोभ को पाप का बाप कहा गया है।
यह उद्गार जैन धर्मशाला में वर्षायोग कर रहे दिगम्बर मुनिराज उपाध्याय विश्रुतसागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।उन्होंने कहा कि अपने चित्त को दूषित होने से बचाना है तो बुरे चित्र और विचारो को त्यागना होगा।तभी हम श्रेष्ठ चारित्र को धारण कर सकते हैं।आज हम सभी आकांक्षा और इच्छाओं से पूरी तरह घिरे हुए हैं।इनको पूरी करने की लालसा में हम धैर्य,सहनशीलता,संतोष आदि को भूलकर झूठ,चोरी,अशुद्ध भोजन,हिंसा,मार काट,गाली गलौच आदि पाप कार्य करते हैं।जहां संतोष नहीं है वहां शुचिता नहीं आ सकती है।वर्तमान में इस शौच धर्म का उत्कृष्ट पालन सिर्फ दिगम्बर मुनिराज ही करते हैं।यदि हम मुनिराज नहीं बन सकते तो एक श्रेष्ठ श्रावक बनकर ही इन दस धर्मों का पालन कर सकते हैं।
आत्मशुद्धि के इस पावन पर्व पर उपवास, व्रत,संयम आदि का पालन कर रहे युवाओं और समाजजनो को आशीर्वाद देते हुए मुनि श्री ने कहा कि हमारे अंदर जब तक लोभ की भावना समाप्त नहीं होगी तब तक सत्य धर्म भी नहीं आ पायेगा।क्योंकि इसी लोभ के कारण हम सत्य को सत्य मानने से परहेज करते है।प्रत्येक जीव में भगवान बनने की शक्ति है।हमे अपने आत्म वैभव को जगाकर अपनी शक्ति को पहचानना होगा।
सकल दिगम्बर जैन मुनि सेवा ट्रस्ट के प्रचार प्रमुख सुनील जैन व प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि उपाध्याय विश्रुतसागर जी के ससंघ सानिध्य में पोरवाड़ धर्मशाला सराफा में दसलक्षण पर्व भक्तिभाव पूर्वक मनाया जा रहा है।युवा सहयोगी अतुल जैन द्वारा देव शास्त्र गुरु पूजन के साथ ही पँचमेरु,सोलहकारण,दसलक्षण,रविव्रत एवम उत्तम शौच धर्म की संगीतमय पूजन करायी गयी। भादव शुक्ल अष्टमी रविवार को नवमें तीर्थंकर पुष्दन्तनाथ जी का निर्वाण कल्याणक पर पूजन एवम निर्वाण कांड का वाचन कर रेखा महेश जैन एवम तरुणा प्रवीण सेठी द्वारा धर्मशाला में लाडू अर्पित किया गया। सुनील जैन ने बताया कि तप त्याग और तपस्या के इस पर्युषण पर्व के दौरान तपस्वियों द्वारा उपवास किया जा रहे हैं कई श्रद्धालुओं द्वारा आज चौथे उपवास की तपस्या की गई। नगर के समस्त दिगंबर जैन मंदिरों में पर्व के दौरान चौथे दिन पुष्पदंत भगवान का मोक्ष दिवस मनाकर अभिषेक शांति धारा के साथ लाडू चढ़ाया गया। पर्व के चतुर्थ दिवस पर धर्मशाला में प्रातःजिनेन्द्र अभिषेक के साथ ही शांतिधारा व मुनि श्री के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य संतोष जैन,गौरव- सौरभ जैन परिवार को मिला। द्रव्य दातार एवम तत्वार्थ सूत्र के दस अर्घ्य समर्पित करने का अवसर आशिमा सौरभ जैन, रोशनी गौरव जैन,अनुपमा पुष्पेन्द्र,प्रेमांशु विदुषी जैन भामगढ़ परिवार एवम सुनीता अशोक पाटनी,अवनि- विशाल,मीनू पाटनी परिवार ने प्राप्त किया।मुनि ससंघ के कर कमलों में जिनवाणी भेंट प्रवीण जैन काका भामगढ़ वाले द्वारा की गयी। मुनि सेवा समिति के अविनाश जैन ने बताया कि पर्व के अवसर पर मुनि ससंघ के सानिध्य में प्रातः 5 बजे से ध्यान एवम योग,दोपहर में 3 बजे से तत्वार्थ सूत्र का अर्थ सहित वाचन, शाम 6 बजे प्रतिक्रमण,सामायिक एवम मंगल आरती के कार्यक्रम हो रहे है।रात्रि 7:45 से विद्वान महेश जी जैन द्वारा रत्नकरंड श्रावकाचार ग्रन्थ पर मंगल प्रवचन किया जा रहा है।सोमवार उत्तम सत्य दिवस पर सौधर्म इंद्र एवम द्रव्य दातार सुनील अदिति काला रहेंगे। रेखा सन्तोष छाबड़ा,सुषमा कांतिलाल एवम निहारिका अजय जैन द्वारा तत्वार्थ सूत्र के श्रीफल अर्पित किये जायेंगे।कार्यक्रम का संचालन पंकज महल ने किया।
पोरवाड़ दिगम्बर जैन समाज के मीडिया प्रभारी प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सराफा में पंडित निखलेश जैन के निर्देशन में आयोजित श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य सुधांशु कुमार,रुपांशु कुमार चौधरीपरिवार,अनिकेत,शाश्वत ,निखलेश जैन परिवार एवं स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य आयुष कुमार दिलीप कुमार पाटोदी परिवार को प्राप्त हुआ।












