
सिवनी। संभावित पेयजल संकट को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती शीतला पटले ने संपूर्ण सिवनी जिला को 15 मार्च 2026 से 31 जुलाई 2026 तक जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। यह आदेश मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 (संशोधित 2002) की धारा 3 के अंतर्गत जारी किया गया है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री द्वारा अवगत कराया गया है कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित हैंडपंपों का जल स्तर लगातार कम हो रहा है। भू-जल के अत्यधिक दोहन तथा निजी नलकूपों की अधिक गहराई तक खुदाई के कारण शासकीय पेयजल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आगामी ग्रीष्म ऋतु में पेयजल संकट की संभावना बनी हुई है।
जारी आदेश के अनुसार सक्षम अनुमति के बिना किसी भी सार्वजनिक जल स्रोत जैसे नदी, नाले, बंधान, स्टॉपडेम, जलाशय और सार्वजनिक कुओं से सिंचाई या औद्योगिक कार्यों के लिए पानी का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा कलेक्टर अथवा प्राधिकृत अधिकारी की अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति या संस्था नया नलकूप खनन नहीं करा सकेगी।
नलजल योजनाओं से जल प्रदाय के दौरान घरों में मोटर पंप लगाकर प्रेशर से पानी खींचने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसी स्थिति पाए जाने पर ग्राम पंचायत और नगरीय निकाय मोटर पंप जब्त करने की कार्रवाई कर सकेंगे। साथ ही जल संरक्षण और पेयजल के समुचित उपयोग के लिए ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर द्वारा संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को विशेष परिस्थितियों में नलकूप खनन, गहरीकरण अथवा साफ-सफाई की अनुमति देने के लिए प्राधिकृत अधिकारी घोषित किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने पर अधिनियम की धारा 9 के तहत दो वर्ष तक का कारावास या दो हजार रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह आदेश 15 मार्च 2026 से 31 जुलाई 2026 तक प्रभावशील रहेगा।









