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खंडवा की अनूठी ‘भूतों की अदालत’ जहां लगती है बुरी आत्माओं की पेशी

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खंडवा की अनूठी ‘भूतों की अदालत’ जहां लगती है बुरी आत्माओं की पेशी

सैलानी बाबा की दरगाह पर होली से रंगपंचमी तक जुटते हैं हजारों लोग।

सौहार्द की मिसाल मेले में हिंदू मुस्लिम सभी धर्म के लोग पहुंचते हैं।

खंडवा- एक ओर दुनिया आधुनिक विज्ञान और तकनीक के सहारे हजारों किलोमीटर दूर बैठकर मिसाइलों से युद्ध लड़ रही है, वहीं दूसरी ओर समाज का एक हिस्सा आज भी भूत-प्रेत और अदृश्य शक्तियों पर भरोसा करता है। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में भी एक ऐसी जगह है, जहां लोग मानते हैं कि यहां बुरी आत्माओं की “अदालत” लगती है और पीड़ितों को उनसे मुक्ति मिलती है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि खंडवा से करीब 25 किलोमीटर दूर जावर क्षेत्र के सैलानी गांव में स्थित सैलानी बाबा की दरगाह को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां भूत-प्रेत, बाधा और बुरी आत्माओं से पीड़ित लोगों की पेशी होती है। लोग देश के अलग-अलग राज्यों से यहां पहुंचते हैं और बाबा से न्याय की गुहार लगाते हैं।

जब अदालत में लगती है बुरी आत्माओं की पेशी

समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि आम तौर पर अदालत को न्याय का मंदिर कहा जाता है, जहां दीवानी या फौजदारी मामलों की सुनवाई होती है। लेकिन सैलानी बाबा की दरगाह को लोग एक अलग तरह की अदालत मानते हैं। यहां न तो जमीन-जायदाद का विवाद होता है और न ही किसी अपराध की सुनवाई। यहां आने वाले लोगों का विश्वास है कि उनके शरीर में मौजूद बुरी आत्माओं को यहां पेश किया जाता है। मान्यता है कि दरगाह में बाबा के दरबार में उन आत्माओं को शरीर छोड़कर जाने का फैसला सुनाया जाता है। कई श्रद्धालु बताते हैं कि यहां आने के बाद लोगों की हालत बदल जाती है और वे ठीक होकर लौटते हैं। यही कारण है कि इस जगह की ख्याति दूर-दूर तक फैल चुकी है।

होली से रंगपंचमी तक लगता है अनोखा मेला

साल भर इस दरगाह पर श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहता है, लेकिन होली के बाद से लेकर रंगपंचमी तक यहां विशेष भीड़ उमड़ती है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से भूत-प्रेत या प्रेतबाधा से पीड़ित लोग यहां पहुंचते हैं। दरगाह परिसर में कई दिनों तक तंबू लगाकर लोग रहते हैं। पीड़ितों के परिजन उन्हें लेकर यहां आते हैं और बाबा से राहत की उम्मीद करते हैं। कई लोग बताते हैं कि पांच गुरुवार लगातार यहां आने से समस्या दूर हो जाती है, इसलिए कई परिवार लंबे समय तक यहां डेरा डालकर रहते हैं।

जंजीरों में बांधकर भी लाए जाते हैं पीड़ित

दरगाह परिसर में कई बार ऐसे दृश्य भी देखने को मिलते हैं जो लोगों को हैरान कर देते हैं। कुछ पीड़ितों को परिजन जंजीरों में बांधकर लाते हैं, तो कुछ महीनों से मानसिक या शारीरिक परेशानी से जूझ रहे होते हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार दरगाह की लोहे की चारदीवारी में विशेष शक्ति है। लोग मानते हैं कि इसे छूते ही बाहरी शक्तियां बेचैन हो जाती हैं और पीड़ित व्यक्ति अलग-अलग तरह की हरकतें करने लगता है। इसे लोग इस बात का संकेत मानते हैं कि बुरी आत्मा सामने आ रही है और बाबा से पनाह मांग रही है।

मन्नत के बकरे और मुर्गे छोड़ने की भी परंपरा

दरगाह पर आने वाले श्रद्धालु कई तरह की मन्नतें भी मांगते हैं। लोग मुर्गे और बकरे लाकर बाबा के नाम पर छोड़ देते हैं। मान्यता है कि इससे बुरी शक्तियां शांत होती हैं और पीड़ित को राहत मिलती है। कई परिवार ऐसे भी मिलते हैं जो हर साल यहां आकर धन्यवाद देने की परंपरा निभाते हैं।

87 साल पुरानी है सैलानी बाबा की दरगाह

सुनील जैन ने बताया कि बताते हैं कि यह दरगाह वर्ष 1939 में स्थापित हुई थी और इसे महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के फकीर मकदूम शाह सैलानी से जोड़ा जाता है। समय के साथ यह जगह आस्था का बड़ा केंद्र बन गई।
एक खास बात यह भी है कि यहां सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिलती है। मेले में हिंदू, मुस्लिम समेत सभी धर्मों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार होली से रंगपंचमी तक लगने वाला यह मेला लोगों को एक साथ जोड़ने का काम करता है।

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