
खण्डवा//खंडवा जिला महाशिवपुराण 7 जनवरी से 13 दिव्य धरा स्वयंभू लिंग भूतेश्वर महादेव के आंगन में रखी गई पंडित ललित किशोर दाधीच जी ने बताया शिव कथा है बाकी सब बृथा हे नश्वर संसार से ईश्वर की ओर जोड़ती है कथा शिव पुराण के महत्व में कथा सुनाई एक बिंदुक नाम का व्यभिचारी था संगति में पड़कर दुर्गति को प्राप्त हुआ कुसंग से पत्नी भी विकृति की ओर चली गई जीवन में सगती अच्छी होना चाहिए हम अगरबत्ती जलाते हैं वही अग्नि माचिस से निकलकर पूजनीय हो जाती है नीचे गिरी हुई अग्नि को पांव से मसल दिया जाता है अग्नि से हमारा संबंध होता है मनुष्य भी पूजीत हो जाता है जामन का सग करके दही घी बन जाता है लोहा पारस के संगति से सोना हो जाता है सोने में लगी हुई कोट टांका सोने के भाव बिक जाता है संगति अच्छी नहीं हो तो मनुष्य निंदा का पात्र बनता है बिंदुक नामक यह व्यक्ती संगति में पड़ा हुआ व्यक्ति पिशाच और प्रेत बन गया शिवजी के आदेश अनुसार तुमरू भगवान के गन ने शिव कथा सुना कर सद्गति प्रदान की भोजा खेड़ी बरूड से निकली शोभा यात्रा में क्षेत्र के भक्तगण एकत्रित होकर शिव कथा का लाभ लिया 21000 रुद्राक्ष के शिवलिंग का निर्माण एक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है जिसका नित्य प्रति महा अभिषेक हो रहा है रुद्राक्ष भगवान शिव का स्वयं स्वरूप माना गया है जो शिव के नेत्र से ही उत्पन्न हुए 11 किलो सरसों का तेल,, जो शत्रु पर विजय प्राप्त करने वाला होता है 11 किलो गिलोय, का रस जिससे व्याधि बीमारी कष्ट दूर होते हैं 11 किलो गन्ने का रस जो श्री लक्ष्मी को बढ़ाने वाला होता है ग्रहों के व्याधि के लिए कष्ट निवारण के लिए अन्न (नाज )के द्वारा अभिषेक किया जा रहा है श्री भूतेश्वर महादेव पर हो रही कथा में भक्त उमड़कर लाभ ले रहे हैं।











