
*बाल हित सर्वोपरि: खंडवा से उठी संवेदना की आवाज, जो पूरे प्रदेश को दिशा दे रही है*

*सहायक संचालक राजेश पाटिल ने किया निरीक्षण, न्याय और करुणा के समन्वय को बताया अनुकरणीय*
*भोपाल से आई सराहना*
*खंडवा*
जब व्यवस्था में संवेदनशीलता उतर आती है और निर्णयों में करुणा स्थान बना लेती है, तब बाल अधिकार केवल काग़ज़ों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि बच्चों के सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की नींव बनते हैं। न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा ने बीते एक वर्ष में ऐसे ही मानवीय, साहसिक और प्रभावशाली कार्य किए हैं, जिन्होंने उसे प्रदेश की अग्रणी और प्रेरक संस्था के रूप में स्थापित कर दिया है।
सहायक संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग भोपाल श्री राजेश पाटिल ने खंडवा प्रवास के दौरान बाल देख-रेख संस्थाओं का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के पश्चात उन्होंने न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा (प्रथम वर्ग श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट समकक्ष) के नेतृत्व में किए गए कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि खंडवा मॉडल यह सिद्ध करता है कि जब निर्णय संवेदनशील हों और कार्रवाई त्वरित हो, तो बाल संरक्षण व्यवस्था समाज में भरोसा पैदा करती है।
*समीक्षा नहीं, समाधान की संस्कृति*
निरीक्षण के उपरांत आयोजित समीक्षात्मक बैठक केवल औपचारिक चर्चा नहीं रही, बल्कि यह आत्ममंथन, सुधार और संकल्प का मंच बनी। बैठक मध्यप्रदेश राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग के अध्यक्ष माननीय द्रविड़ मोरे के मार्गदर्शन एवं जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता के दिशा-निर्देशों में संपन्न हुई, जिसमें बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर गहराई से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी रत्ना शर्मा की उपस्थिति ने प्रशासनिक समन्वय को और सशक्त किया।
*स्मारिका: एक वर्ष की सेवा, संघर्ष और संवेदना का दस्तावेज*
इस अवसर पर न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा के एक वर्षीय कार्यों पर आधारित स्मारिका का विमोचन किया गया। यह स्मारिका माननीय द्रविड़ मोरे, जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी रत्ना शर्मा के मार्गदर्शन में तैयार की गई है।
यह केवल उपलब्धियों का संकलन नहीं, बल्कि संवेदनशील हस्तक्षेप, टूटते परिवारों को जोड़ने और संकटग्रस्त बच्चों को नया जीवन देने की जीवंत कहानी है।
*समर्पण से सशक्त होती समिति*
कार्यक्रम में न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा के सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, कविता पटेल एवं स्वप्निल जैन उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने यह संकल्प दोहराया कि हर निर्णय में बाल हित सर्वोपरि रहेगा और कोई भी बच्चा व्यवस्था की अनदेखी का शिकार नहीं बनेगा।
अनुभव और समन्वय की सहभागिता
इसके पश्चात किशोर न्याय बोर्ड सदस्य पन्नालाल गुप्ता चर्चा में शामिल हुए।
समीक्षात्मक चर्चा में बाल संरक्षण अधिकारी टीका सिंह बिल्लौरे, पुष्पेंद्र सिंह मंडलोई, धर्मेंद्र सिंह चौहान तथा लेखा शाखा के संतोष उपाध्याय की सहभागिता रही। बैठक में संस्थागत देख-रेख, पुनर्वास और वित्तीय प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।
*प्रेरणा समाज के लिए संदेश*
प्रथम वर्ग श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट समकक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा यह प्रमाणित कर रही है कि जब कानून कठोर नहीं, संवेदनशील बनता है और प्रशासन केवल आदेश नहीं, जिम्मेदारी निभाता है—तब हर बच्चा सुरक्षित ही नहीं, आत्मविश्वास से भरा सशक्त नागरिक बनता है। यही सोच खंडवा को प्रदेश में बाल संरक्षण का आदर्श मॉडल बना रही है।












