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आपातकाल भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला था, ,,जिला अध्यक्ष श्री तोमर,,

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आपातकाल भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला था, ,,जिला अध्यक्ष श्री तोमर,,

आपातकाल संविधान हत्या दिवस पर संगोष्ठी के साथ हुआ लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान।

खंडवा। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में लोकतंत्र की हत्या करते हुए पूरे देश में 21 महीने के लिए आपातकाल लगाकर देश की जनता को परेशानी में डाल दिया था। विपक्षी दलों के नेताओं को कार्यकर्ताओं को महीना तक जेल में बंद कर दिया गया। भाजपा संगठन द्वारा प्रतिवर्ष 25 जून को पूरे देश में आपातकाल संविधान हत्या दिवस बनाकर विरोध प्रकट करते हुए लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया जाता है। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि भाजपा जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर की अध्यक्षता में इंदिरा चौक स्थित भाजपा कार्यालय में आपातकाल संविधान हत्या दिवस मनाया गया और 18 महीने तक जेल में रहने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया गया। आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर ने कहा कि आपातकाल भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला था। कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटकर देश पर आपातकाल थोपा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटा था। यह घटना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे दुखद और शर्मनाक घटनाओं में से एक है। इंदिरा गांधी और संजय गांधी ने आपातकाल लगाकर न्यायालय और संविधान का अपमान किया था। इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी ने अपने निज स्वार्थों के लिए संविधान में कई संशोधन किये आपातकाल केवल इतिहास की एक घटना नहीं, बल्कि कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का आईना है।
श्री तोमर ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्थापित हुई, लेकिन कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार सत्ता पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने से भी पीछे नहीं हटे। इसी मानसिकता के कारण आपातकाल थोपा गया, जो भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला था। उन्होंने कहा कि उस समय देश न तो किसी युद्ध की स्थिति में था और न ही कोई आंतरिक परिस्थिति थी, जिसके कारण आपातकाल लगाना आवश्यक हो। वास्तव में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित किए जाने के बाद सत्ता हाथ से निकलती दिखाई देने लगी थी। इसी कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलते हुए देश पर आपातकाल थोपा गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोकतंत्र सेनानी सुरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि लोकतंत्र है तो हम हैं, लोकतंत्र नहीं होता तो हम भी नहीं होते। लोकतंत्र सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान के कारण ही आज देश लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ मजबूती से खड़ा है। भारत सदियों से संस्कृति, शिक्षा, आध्यात्म, चिकित्सा और ज्ञान का केंद्र रहा है, लेकिन लंबे समय तक विदेशी आक्रमणों और गुलामी का सामना करना पड़ा। लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के बाद देश स्वतंत्र हुआ, किंतु स्वतंत्रता के बाद भी जनता के सपनों का भारत साकार नहीं हो पाया। इंदिरा गांधी ने बिना व्यापक लोकतांत्रिक विमर्श और जनभावनाओं का सम्मान किए 25 जून 1975 की रात देश में आपातकाल लागू कर दिया। इसके बाद हजारों निर्दाेष लोगों को जेलों में डाल दिया गया खंडवा जिले में भी सैकड़ो कार्यकर्ताओं को जेल में बंद कर दिया गया। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के साथ आम नागरिक और प्रेस और मीडिया पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया खंडवा में जन्मे देश के महान गायक कलाकार किशोर दा के गीतों को भी आपातकाल के दौरान प्रतिबंध कर दिया गया। कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिवार जनों का शाल एवं श्री फल से जिला अध्यक्ष श्री तोमर के साथ पार्टी के पदाधिकारियों ने स्वागत सम्मान किया। प्रवक्ता सुनील जी ने बताया कि इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर,खंडवा की विधायक कंचन मुकेश तनवे, पंधाना विधायक छाया मोरे,खंडवा महापौर अमृता अमर यादव,जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी वानखेड़े,
पूर्व विधायक देवेंद्र वर्मा, हरीश कोटवाले, सेवादास पटेल,मीसाबंदी सुरेंद्र अग्रवाल ,महेंद्र सावनेर, मिसा बंदी दिनकर राव देशमुख, मीसाबंदी बसंत गुप्ता,जिला महामंत्री सूरज पाल सोलंकी, मीसाबंदी परिवार से अमर हुकुम चंद यादव,राजा बालगंगाधर शर्मा, कार्यक्रम संयोजक प्रियांशु चौरे, प्रवक्ता सुनील जैन, मीडिया प्रभारी मंगलेश सिंह तोमर, आनंद चौहान, मंडल अध्यक्ष रोहित मिश्रा ,कार्यालय मंत्री आशीष राजपूत , सह मंत्री भारत पटेल ,हिमांशु राज, जिला उपाध्यक्ष सुधांशु जैन,पिछड़ा मोर्चा जिला अध्यक्ष अनूप पटेल, बलदेव मौर्य,महिला मोर्चा अध्यक्ष इंदु दुबे,श्रुति जैन उपस्थित थे।

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