
*बाल चौपाल का नवाचार: मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग से 42 बच्चों की स्कूल में वापसी*
*बाल कल्याण समिति अध्यक्ष प्रवीण शर्मा की पहल बनी शिक्षा और बाल संरक्षण का प्रभावी माध्यम*
खंडवा//

शिक्षा से दूर हो चुके बच्चों को पुनः विद्यालयों से जोड़ने के लिए बाल कल्याण समिति अध्यक्ष एवं बाल शिक्षाविद् प्रवीण शर्मा द्वारा आयोजित की जा रही बाल चौपाल जिले में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रही है। इस पहल में मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के जरिए बच्चों और उनके अभिभावकों से संवाद कर शिक्षा के प्रति विश्वास और जागरूकता विकसित की जा रही है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत अब तक 42 ड्रॉप आउट एवं नवीन बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जा चुका है। इनमें ऐसे बच्चे भी शामिल हैं जो मानसिक तनाव, आत्मविश्वास की कमी, पारिवारिक समस्याओं अथवा सामाजिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई से दूर हो गए थे।
प्रवीण शर्मा ने बताया कि प्रत्येक ड्रॉप आउट बच्चे के पीछे कोई न कोई सामाजिक, पारिवारिक या मनोवैज्ञानिक कारण होता है। ऐसे बच्चों को केवल स्कूल भेजना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके मन की बात समझना और उनमें आत्मविश्वास जगाना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से बाल चौपाल में मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा बच्चों के संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम है। स्कूल से दूर होने वाले बच्चे बाल श्रम, बाल विवाह और शोषण जैसे जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। ऐसे में बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ना उनके अधिकारों और सुरक्षित भविष्य की रक्षा का भी महत्वपूर्ण प्रयास है।
बाल चौपाल का संदेश स्पष्ट है— किसी बच्चे को बदलने से पहले उसके मन को समझना जरूरी है।









