
*अखिल भारतीय खटीक समाज ने महाराजा खटवांग जयंती पर निकाली भव्य शोभायात्रा*
खण्डवा//
अखिल भारतीय खटीक समाज खंडवा अध्यक्ष श्री हुकुमचंद वर्मा ने बताया कि खटीक समाज के आराध्य देव श्री खटवांग महाराज जयंती के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय खटीक समाज युवा समिति द्वारा प्रतिभा सम्मान समारोह,सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया जिसमें सर्व प्रथम मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय खटीक समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री लक्ष्मीनारायण बोरीवाल, सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित राकेश तिवारी एवं अखिल भारतीय खटीक समाज खंडवा अध्यक्ष श्री हुकुमचंद वर्मा द्वारा महाराजा खटवांग जी की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया इसके तत्पश्चात अतिथियों का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थीयो द्वारा सुंदर प्रस्तुति दी गई और समाज में प्रतिभावान विद्यार्थीयो , खेलकूद गतिविधियों,एवं शासकीय कार्य में अपनी सेवाएं दे रहे समाज के गौरवो को प्रमाण पत्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया इसके तत्पश्चात खंडवा समाज अध्यक्ष हुकुमचंद वर्मा ने कार्यक्रम की भूमिका रखी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अखिल भारतीय खटीक समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री लक्ष्मीनारायण बोरीवाल ने समाजजन को संबोधित करते हुए कहा कि समाज को एकजुट रखने की आवश्यकता है महाराज खटवांग एक सूर्यवंशी एवं पराक्रमी राजा थे, जिन्हें राजा दिलीप एवं सम्राट के नाम से भी जाना जाता है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। महाराज खटवांग मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम के पूर्वज थे।
पृथ्वी पर उनकी धाँक थी, उन्होंने देवताओं एवं असुरों के संग्राम में भाग लिया एवं देवताओं की मदद के लिए दानवों का संहार कर देवताओं को विजयी बनाया। इससे प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें वरदान देना चाहा। तब महाराजा खटवांग ने अपनी शेष आयु (उम्र) पूछी। देवताओं ने बताया की केवल एक मुहुर्त (48 मिनट) शेष है। यह जानकर वे वायु वेग से पृथ्वी पर लौटे और अपना राजपाट एवं सांसारिक मोहमाया त्याग कर भगवान विष्णु की स्तुति की ओर वैकुण्ठ गमन कर गये। जिससे उन्हें अमरता मार्ग प्राप्त हुआ, उन्हें विष्णु पुराण एवं अन्य ग्रंथों में अत्यंत दानवीर, सत्यनिष्ठ, धर्म परायणता और ज्ञानी राजा के रूप में भी वर्णित किया गया है।
खटिक समाज एक परिश्रमी एवं ईमानदार समाज के रूप में जाना जाता है। वैदिक काल में देवता यज्ञ के समय खटिक समाज द्वारा पशु बलि का कार्य किया जाता था। खटिक समाज का इतिहास विभिन्न कालखण्डों में वर्णित है। जैसे तैमुर तंग के लुटपाट एवं अत्याचार का मुंह तोड़ जवाब देने वाला खटिक समाज था। सिकन्दर के विश्व विजय के स्वप्न को भी खटिक समाज ने चूर-चूर किया था। मुगल आक्रांत शासकों ने हिन्दु उत्पीड़न तथा हिन्दुस्तान में हिन्दुओं को हिन्दु होने का यानि हिन्दू टैक्स अथवा जजिया कर का खुलकर विरोध महान हिन्दु खटिक समाज ने किया। अंग्रेजों के विरूद्ध 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक मेरठ के तितौरिया भी खटिक समाज के ही थे। सामाजिक समरसता दर्शन की दिशा में चिन्तन के लिये बाध्य करती इस कृति से संपूर्ण हिन्दू समाज को सकारात्मक दिशा प्राप्त होगी पण्डित राकेश तिवारी ने समाज को संबोधित करते हुवे कहा है कि महाराजा खटवांग एक पराक्रमी योद्धा थे जिन्होंने धर्म की रखा के लिए अपना जीवन लगा ओर देवता ओर असुरों के संग्राम में देवताओं का साथ देकर देवताओं को विजय बनाया फिर भगत सिंह चौक सोनकर धर्मशाला से भव्य शोभायात्रा प्रारंभ होकर बजरंग चौक,जलेबी चौक, निगम तिराहा, घंटाघर, बांबे बाजार, केवलाराम चौराहा, फुलगली, टपालचाल, कहारवाड़ी, झमराल मोहल्ला सोनकर मोहल्ला होते हुए पुनः भगत सिंह चौक सोनकर धर्मशाला पहुंची इस शोभायात्रा में सामाजिक एकता का परिचय देते हुवे साथ देशभक्ति गीत ओर भगवान के भजनों पर धूमधाम से बेहद अनुशासन के साथ समाज जन निकले शोभायात्रा में आगे आगे भारत का मानचित्र ओर अश्व पर सवार भारत माता और महाराजा खटवांग की वेशभूषा में बच्चे आकर्षण का केंद्र बने जिसमे बड़ी संख्या में समाज की मातृशक्ति,वरिष्ठजन, बच्चे,युवा, उपस्थित रहे इसके बाद भोजन प्रसाद वितरण किया गया इस कार्यक्रम का संचालन समाज के हर्ष वर्मा द्वारा किया गया एवं कार्यक्रम का आभार प्रचार प्रसार मंत्री हेमराज वर्मा द्वारा किया गया इस दौरान बड़ी संख्या में समाज उपस्थित रहा।










