
निमाड़ का प्रसिद्ध गणगौर पर्व का हुआ शुभारंभ। माता के खड़े आए बाड़ी बोई गई।
दशंमी के दिन दशा माता की महिलाओं द्वारा की गई पूजा अर्चना।
गणगौर पर्व पर माहेश्वरी महिला मंडल ने पार्वती धर्मशाला में किया बाना, गाए झाले के गीत।
खंडवा। निमाड़ में गणगौर का पर्व प्रारंभ हो चुका है माता के खड़े आए हैं और बाड़ी बोई है। शुक्रवार को चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन दशा माता की पूजा अर्चना की गई। बड़ी संख्या में महिलाओं ने पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा अर्चना की एवं पीपल वृक्ष के चारों ओर ढोरा बंधा गया। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि दशा माता देवी पार्वती का स्वरूप है, जिसकी पूजा दशमी को की जाती है, यह व्रत घर की दशा सुधारने और सुख समृद्धि लाने के साथ बुरी दशा को दूर करने के लिए रखा जाता है। दशमी के दिन महिलाओं ने गले में धागे की गांठ डालकर पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा अर्चना के साथ सूत के धागे परिक्रमा करते हुए पीपल के वृक्ष को बांधे। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि अलग-अलग सामाजिक महिला मंडलों द्वारा गणगौर पर्व को लेकर कार्यक्रम किये जा रहे हैं। माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा पार्वती बाई धर्मशाला के बगीचे में गणगौर माता का बाना किया गया। कार्यक्रम में मंडल की महिलाओं ने विधि-विधान से गणगौर माता की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंडल की प्रतिभा राठी ने बताया कि शीतला सप्तमी से प्रतिदिन गणगौर माता को अलग-अलग स्थानों पर घुमाने ले जाया जाता है। वहां मंडल की सभी सदस्य माता को जल अर्पित करती हैं। इसके बाद माता को भोग लगाकर पारंपरिक झाले गीत गाए जाते हैं। इस अवसर पर कविता मुंदड़ा, प्रतिभा राठी, कंचन काकानी, प्रिया जाखेटिया, मनीषा गांधी, अनुश्री बाहेती, रत्ना राठी, रजनी काकानी, शीतल माहेश्वरी, स्मिता मुंदड़ा, कौशल्या शर्मा सहित मंडल की सदस्याएं उपस्थित रहीं।










