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*हिंगलाज जयंती पर 17 मार्च को भावसार समाज निकालेगा चुनरी यात्रा, होगा भंडारा*

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*हिंगलाज जयंती पर 17 मार्च को भावसार समाज निकालेगा चुनरी यात्रा, होगा भंडारा*

खंडवा। ओम हिंगुले परम हिंगुले अमृतरूपिणी, तनु शक्ति नमो: शिवे ओम हिंगुलाये नम:, जिस तरह भगवान अलग-अलग रूपों में अवतरित हुए उसी तरह मां भगवती भी हर युग में अलग-अलग नामों से अवतरित हुई। शहर के मालीकुआं स्थित मां हिंगलाज माता मंदिर इसी का एक उदाहरण है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार पत्थर की इस मूर्ति को लोग हनुमानजी समझकर पूजते थे। लेकिन एक महिला के शरीर में जब माताजी प्रकट हुई और उन्होंने बताया यह प्रतिमा मां हिंगलाज की है। तब से यहां माताजी की प्रतिमा की स्थापना कर मंदिर का निर्माण कराया गया। वर्तमान में यहां मां हिंगलाज का भव्य मंदिर है। भारत में 51 शक्तिपीठ है, पूर्व में कामाक्षी, उत्तर में ज्वालामुखी, दक्षिण में मीनाक्षी व पश्चिम में मां हिंगलाज। हिंगलाज में सती का सिर गिरा था यह स्थान 51 शक्तिपीठों में प्रधान माना गया है। यह स्थान वर्तमान में पाकिस्तान के प्रांत ब्लुचिस्तान में लासबेला जिले में स्थित है। सतीजी के सिर में हिंगुल (सिंदूर) भरा होने के कारण इनका नाम हिंगलाज पड़ा। मुख्य स्थल पाकिस्तान में होने के कारण भारत में हिंगलाज माता की स्वयंभू प्रतिमा केवल खंडवा में है। अंतरराष्ट्रीय भावसार महासभा मप्र, छत्तीसगढ़ के सचिव गणेश भावसार ने बताया कि 17 मार्च को हिंगलाज जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। मालीकुआं स्थित माता मंदिर में प्रात: मां हिंगलाज का विशेष श्रृंगार, पूजन व 12 बजे आरती के पश्चात कन्या भोज के बाद भंडारे का आयोजन होगा। रात्रि में महाआरती के बाद भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी।
हिंगलाज माता भावसार समाज की कुलदेवीं है। भावसार समाज द्वारा प्रात: 9 बजे कहारवाड़ी चौक स्थित भावसार धर्मशाला से विशाल चुनरी यात्रा शहर के प्रमुख मार्गो से होकर मालीकुआ स्थित हिंगलाज माता मंदिर पहुंचेगी। यहां माता को चुनरी ओढ़ा कर पूजन एवं आरती की जाएगी। आरती के पश्चात सभी सामाजिक बंधु जसवाडी रोड स्थित भावसार बालक धाम आश्रम मां हिंगलाज वाटिका हनुमान मंदिर पहुंचेंगे जहां दर्शन के साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन होगा।

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