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“पंधाना खंड के निहालवाड़ी में संपन्न हुआ विराट हिन्दू सम्मेलन।

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“पंधाना खंड के निहालवाड़ी में संपन्न हुआ विराट हिन्दू सम्मेलन।

“विश्व में एक मात्र भारत ऐसा देश है जिसमें अपने देश को माँ का दर्जा दिया है : विजेंद्र गोठी”

खण्डवा : इन दिनों पूरे जिले की बस्तियों में हिंदू सम्मेलन आयोजित किया जा रहे हैं गुरुवार को पंधाना खंड के निहालवाड़ी ग्राम में विराट हिंदू हिंदू सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें बड़ी संख्या में सनातनी एकत्रित हुए। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि सामाजिक समरसता के भाव को लेकर खंडवा जिले की 43 ग्रामीण बस्तियों एवं नगर में 25 बस्तियों में हिंदू सम्मेलन आयोजित हुए और चल रहे हैं। पंधाना खंड के निहालवाड़ी बस्ती में में आयोजित हिंदू सम्मेलन में ग्रामीण बालिकाओं ने सनातन संस्कृति पर आधारित एक भव्य प्रस्तुति के माध्यम से सनातन संस्कृति के दर्शन करवाए, संत समाज से उपस्थित हुए वक्ता निरंजन स्वामी जी ने अपने संबोधन में कहा कि “सारे हिन्दुओं को संगठित होना होगा ताकि जितनी भी आपदा विपदा चाहे वो आंतरिक हो या बाहरी हो उनसे निपटा जा सकेगा, जातिवाद और वर्गभेद सामाजिक समरसता से ही दूर होगा…,संत समाज से ही स्वामी रामेश्वरानंद जी महाराज ओंकारेश्वर ने समाजजनों को कहा कि “धर्म केवल एक ही धर्म है और वो सनातन हिन्दू धर्म है, जिस पर सबको गर्व होना चाहिए कि इस धर्म में और इस भारत भूमि पर जन्म लिया इस पर बात गर्व होना चाहिए ,सनातन धर्म ही एक धर्म हे बाकी सब मजहब है, सनातन धर्म ही विश्व कल्याण की भावना रखता है, बाकी सब मजहब जो हैं वो सिर्फ अपने में ही लगे रहते हे और अशांति पैदा करते हैं…
मातृशक्ति से उपस्थिति वक्ता अश्विनी चौधरी जी ने कहा कि “आज हिन्दू समाज ही भारत को फिर से विश्व गुरु बना सकता है, उसके लिए सबसे पहले हमको अपने स्व के भाव को जगाना पड़ेगा, हमें अपनी सामूहिक शक्ति पर विश्वास करना होगा, अपने देश में बने उत्पादों पर भरोसा करना होगा, ऑनलाइन खरीदी के बजाय लोकल दुकान से खरीदी करना होगी , हमें अपने आस पास पर्यावरण का भी ध्यान रखना होगा ये हमारा परम कर्तव्य है… और यह सब संभव होगा कुटुंब प्रबोधन को हर हिंदू परिवार में व्यवहार में लाने पर…”
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खंडवा के विभाग प्रचारक वीजेंद्र जी गोठी ने उपस्थित जनमानस को संबोधित करते हुए कहा कि “विश्व में एक मात्र भारत ऐसा देश है जिसमें अपने देश को माँ का दर्जा दिया है, ऐसी स्थिति किसी भी देश में नहीं है जहां माँ मानकर देश का नारा भारत माता की जय लगाया जाता है… भारत की भूमि वो पुण्य भूमि है जहां अपने पुनीत कार्य से मोक्ष मिल सकता है, जहां देवता भी जन्म लेने के लिए तरसते है क्योंकि हिन्दू संस्कृति केवल भारत भूमि पर ही है,
दुनिया के अंदर केवल एक ही धर्म है जो सबको समान दृष्टि से देखता है इसलिए सिर्फ हिन्दू धर्म में ही यह कहा जाता है कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्” सभी सुखी हो चाहे वो पशु और या मनुष्य सबका कल्याण हो यह संस्कृति केवल भारत में है… जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कारों का पालन करने वाला समाज ही हिन्दू समाज है…
हम गुरु तेग बहादुर जी का 350 वा बलिदान वर्ष मना रहे हैं, जिन्होने हिन्दू समाज और संस्कृति के लिए अपने और अपने शिष्यों को बलिदान दे दिया लेकिन हिन्दू संस्कृति और परम्परा को झुकने नहीं दिया और उनकी आने वाली पीड़ियों ने भी हिन्दू संस्कृति की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया, ऐसे कई महापुरुषों ने अपने बलिदान से हिन्दू संस्कृति को बचाया है…हिन्दू समाज हमेशा से देने की भावना रखता है…
बौद्धिक के उपरांत अतिथि एवं उपस्थित समाजजनों ने मिलकर पंच परिवर्तन का संकल्प लिया एवं भारत माता की सामूहिक आरती के उपरांत सबने मिलकर सहभोज किया…

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