
देवझिरी भूतेश्वर महादेव स्वयंभू स्वयंभू लिंग बरूड़ भोजा खेड़ी निकट जिला खंडवा श्री महाशिवपुराण का आयोजन प्रारंभ हुआ

खण्डवा/बरूड /भोजाखेड़ी से निकली भावयात्रा कलश, यात्राके साथ हुआ, कथा में पंडित ललित किशोर दाधीच ने कहा शिवा देव नहीं महादेव है क्योंकि भगवान ने जहर पिया अमृत पीने वाला देव होता है जो हमेशा मीठा चाहता है सम्मान चाहता है सुख चाहता है एवं भोग चाहता है वही देव है परंतु जो बहिष्कृत लोगों को अपनाते हैं भूत प्रेत दुखी आत्माओं को शरण देते हैं वही महादेव है मीरा ने जहर पिया नाम अमर हो गया, तुकाराम जी को पत्थर मारे गए, नरसी मेहता को बहिष्कृत किया, निंदा की जहर पिया जो सड़क अपने जीवन में अपवान रूपी जहर को पी जाता है वही महादेव का अंश बन जाता है, भांग धतूरा प्रिया है इसका अर्थ यही है भगवान जहर को भी अमृत मानकर स्वीकार कर लेते हैं, क्रोध रूपी जहर को मुस्कुरा कर पी जाना सामने वाले के अपमान को विनम्रता से स्वीकार कर लेना परंतु जहां धर्म का विषय आता है, वहां त्रिशूल उठा लेना वहां माल से नहीं फिर भला से काम चलता है, शास्त्र से नहीं शास्त्र से काम चलता है,तब भगवान प्रलयंकारी बनते हैं देव श्री पर विराजमान आदि अनादि महादेव अविरल धारा के बाद भी तेजोमय शिवलीगहै जिनके ललाट में दिव्य त्रिपुंड लगा हुआ है दृष्टि देखने की हो तो भगवान का दिव्य रूप देव जीरी पर नजर आता है क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने पधारकर शोभा यात्रा में लाभ लेकर कथा श्रवण कर अपने आप को धन्यमाना।











