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*भवन निर्माण की पूरी राशि प्राप्त कर अधूरा काम छोड़ने वाले ठेकेदारों के खिलाफ बड़ा आदेश।*

*625857 रुपए 45 दिन में अदा करने के हुवे आदेश*

*भवन निर्माण की पूरी राशि प्राप्त कर अधूरा काम छोड़ने वाले ठेकेदारों के खिलाफ बड़ा आदेश।*
*625857 रुपए 45 दिन में अदा करने के हुवे आदेश*
खण्डवा//सेवानिवृत्ति शासकीय कर्मचारी पूनम चंद सांवरे और उनकी पत्नी के नाम से खंडवा के कंचन नगर में स्थित 800 वर्गफीट प्लाट पर दो मंजिल भवन निर्माण का अनुबंध ठेकेदार कैलाश पिता रूप सिंह और कमल पिता भगवान के साथ ₹1000 प्रति स्क्वायर फीट विथ मटेरियल हुआ था।
अनुबंध के अनुसार दिनांक 01 अप्रैल 2022 तक निर्माण कार्य पूर्ण किया जाना था। ठेके की कुल राशि 1890000/-₹ दी जानी थी जिसमे से ठेकेदार कैलाश ने 744000 व ठेकेदार कमल ने 974857 रु याने दोनो के द्वारा कुल 1720857 /-₹ प्राप्त किये गए जबकि अनुबंध अनुसार कार्य पूर्ण न कर उसे अधिवेश में ही छोड़ दिया।
उपरोक्त भवन निर्माण हेतु आवेदक पूनम चंद ने बैंक फाइनेंस करवाया था और ऑनलाइन पेमेंट ठेकेदारों को दिया जाना न्यायालय में प्रमाणित किया वहीं शेष कार्य हेतु उन्होंने सिविल इंजीनियर शिवपाल मंडलोई से अपने मकान के अधूरे कार्य बाबत निरीक्षण रिपोर्ट और शेष कार्य का एस्टीमेट बनवाया जिसके अनुसार 744000 का शेष कार्य भवन में होना बाकी था।
इस संबंध में आवेदक पूनम चंद ने अपने अधिवक्ता देवेंद्र सिंह यादव के माध्यम से युक्त ठेकेदारों को कानूनी सूचना पत्र प्रेषित कर शेष कार्य पूर्ण करने अथवा अधिक प्राप्त की गई राशि मैं ब्याज के वापस करने की मांग करते हुवे जिला उपभोक्ता विवाद प्रतिष्ठान आयोग खंडवा के समक्ष ठेकेदारों के विरुद्ध याचिका प्रस्तुत की।
न्यायालय में ठेकेदारों ने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखते हुए कोई राशि बकाया न होना बताते हुए उल्टा आवेदक पर ही राशि निकलना बताई।
प्रोग्राम के संपूर्ण विचरण उपरांत विद्वान न्यायालय द्वारा मेरिट पर आदेश पारित करते हुए मकान के कुल निर्माण की लागत 11 लाख रुपए का मूल्यांकन करते हुए शेष 6 लाख 20 हजार 857 रुपए का कार्य नहीं होना पाया जिसे आदेश दिनांक से 45 दिन की अवधि में दोनों ठेकेदारों को आनुपातिक रूप से परिवादिगण को 5000/-₹ वाद व्यय सहित अदा करने के आदेश पारित किए।
यदि 45 दिन की अवधि में आदेशित राशि अदा नही की जाएगी तो उस पर आदेश दिनांक से वसूली दिनांक तक 7% वार्षिक ब्याज भी अदा करने की आदत पारित किए हैं।
परिवादी की ओर से अधिवक्ता देवेंद्र सिंह यादव द्वारा पैरवी की गई।

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