
मां नर्मदा पतित पावनी हैं इसलिए उसका आंचल स्वच्छ रखे, ,पंडित अनिल मारकंडे।
जगदंबा पूरम में चल रही नर्मदा पुराण कथा में आज मां का मनाया गया जन्मोत्सव।
खंडवा। बड़े धार्मिक उत्साह के साथ जगदम्बा पूरम माताचौक खंडवा में चल रही नर्मदा पुराण कथा को श्रद्धालु सुन रहे हैं। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि सजल महिला मंडल द्वारा आयोजित नर्मदा पुराण कथा में सोमवार को मां नर्मदा का जन्मोत्सव मनाया गया। आयोजित कथा का वाचन पंडित अनिल मार्कण्डेय जी के मुखारविंद से किया जा रहा है। सोमवार को कथा में पंडित श्री मार्कंडेयजी ने कहा कि नर्मदा तट पर साक्षात् देवताओ का निवास होता है ।वर्तमान समय में नर्मदा ही देश की एक मात्र नदी है जो निर्मल है मां का आंचल निर्मल बनाने के लिए सभी को संगठित होकर प्रयास करना चाहिए । नर्मदा संसार की एक मात्र नदी हे जिसकी परिक्रमा होती हैं और नर्मदा का कंकर कंकर शंकर हैं , मां नर्मदा के जल से निकले शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती इनको सीधे स्थापित किया जाता है तथा इन शिवलिंग को नर्मदेश्वर शिवलिंग कहा जाता है । पंडित जी ने कहा कि बिना विश्वास के भक्ति संभव नहीं है जब तक हम अपने हृदय में
नर्मदा की शक्ति का आभास ओर विश्वास समाहित नहीं कर लेते तब तक भक्ति का बीज अंकुरित नहीं हो सकता। आज कथा के दौरान मां नर्मदा का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया।











