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अयोध्या में मातम: हस्तिनापुर रामलीला में ‘राम वनवास’ और ‘दशरथ मरण’ का भावुक चित्रण

शाम होते ही, मंच पर एक के बाद एक मार्मिक दृश्य जीवंत हो उठे। सबसे पहले राम-कैकई संवाद ने मंच पर तनाव का माहौल बना दिया, जहां वरदान के कारण माता कैकई के कठोर निर्णय से हर कोई स्तब्ध रह गया। इसके ठीक बाद राम-दशरथ संवाद ने दर्शकों को गहरे दुख में डुबो दिया

                           रामलीला मंचन हस्तिनापुर मेरठ 

हृदय विदारक संवादों से भरा मंचन

शाम होते ही, मंच पर एक के बाद एक मार्मिक दृश्य जीवंत हो उठे। सबसे पहले राम-कैकई संवाद ने मंच पर तनाव का माहौल बना दिया, जहां वरदान के कारण माता कैकई के कठोर निर्णय से हर कोई स्तब्ध रह गया। इसके ठीक बाद राम-दशरथ संवाद ने दर्शकों को गहरे दुख में डुबो दिया, जहां पिता और पुत्र के बीच का दर्द अश्रुओं के रूप में बह निकला। राजा दशरथ की विवशता और श्री राम की आज्ञाकारिता ने लोगों की आँखें नम कर दीं।

इसके पश्चात, राम-कौशल्या संवाद में पुत्र के वन गमन की खबर सुनकर माँ कौशल्या का करुण विलाप और पुत्र की कर्तव्यनिष्ठा का चित्रण अत्यंत हृदयविदारक था।

विदाई और त्याग की पराकाष्ठा

मंचन में, राम-सीता संवाद और राम-लक्ष्मण संवाद में प्रेम, त्याग और अटूट सहचर्य की भावना को दर्शाया गया। सीता माता द्वारा पति के साथ वन जाने का दृढ़ संकल्प और लक्ष्मण जी का भ्रातृप्रेम, जो उन्हें वनवास में साथ जाने के लिए प्रेरित करता है, दर्शकों को भाव-विभोर कर गया।

श्री रामलीला मंचन को देखते हुए नगरवासी

इसके उपरांत, लक्ष्मण-सुमित्रा संवाद ने माता सुमित्रा के त्याग और अपने पुत्र को धर्म की राह पर चलने की शिक्षा देने के अद्भुत दृश्य को प्रस्तुत किया।

निषादराज केवट और दशरथ मरण भावुक संवादों की श्रंखला के बीच, राम-केवट संवाद ने एक नई ऊर्जा का संचार किया। निषादराज केवट का निश्छल प्रेम और उनकी भक्ति ने भक्तिरस को प्रवाहित किया। इस दृश्य के उपरांत, मंचन ने दुखद मोड़ लिया, जब पुत्र वियोग में अयोध्या के महाराजा दशरथ मरण का चित्रण किया गया। यह दृश्य इतना करुणापूर्ण था कि इसने दर्शक दीर्घा में सन्नाटा ला दिया।

रामलीला समिति के अध्यक्ष ने बताया कि आज का चित्रण विशेष रूप से संवादों की गहराई और भावनात्मक अभिव्यक्ति पर केंद्रित था, जिसने दर्शकों को रामकथा के मर्म से गहराई से जोड़ा।

राम वनवास मंचन पर पदाधिकारी बोले: “यह केवल लीला नहीं, आदर्शों का पाठ है”

हस्तिनापुर, रामलीला मैदानः श्री रामलीला कमेटी, हस्तिनापुर द्वारा आयोजित आज के ‘राम वनवास’ के मार्मिक मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। मंचन की सफलता और भावनात्मक प्रस्तुति को लेकर कमेटी के संरक्षकों, अध्यक्ष, महामंत्रियों और अन्य पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि रामलीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक आदर्शों और मूल्यों का जीवंत प्रदर्शन है।

           त्रिलोक न्यूज़ की टीम ने जानी  प्रमुख                       पदाधिकारियों की प्रतिक्रियाएँ:

संरक्षकगण श्री हरीश ललित (श्री बांके बिहारी ट्रेडिंग कम्पनी) एवं श्री बाल मुकुन्द बत्रा (व्यापार संघ अध्यक्ष) ने संयुक्त रूप से कहा, “आज का राम-दशरथ संवाद और दशरथ मरण का दृश्य अत्यंत हृदय विदारक था। हम चाहते हैं कि युवा पीढ़ी इन दृश्यों से पिता की आज्ञा और कर्तव्यपरायणता का महत्व सीखे।”

श्री अनुज शर्मा (पूर्व प्रधानाचार्य) ने कहा, “रामलीला शिक्षा का एक अनूठा माध्यम है। आज राम-कौशल्या और लक्ष्मण-सुमित्रा संवादों में जो त्याग और धैर्य दिखा, वह हमें जीवन में उतारना चाहिए।”

अध्यक्ष एवं महामंत्री  अध्यक्ष, श्री गौरव गुर्जर ने मंचन की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा, “कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से लीला को अमर कर दिया। इतने मार्मिक दृश्यों को सजीव करना बड़ी बात है। यह सब प्रभु श्रीराम की कृपा है।”

महामंत्री, श्री सुनील कालरा ने कहा, “राम वनवास केवल एक घटना नहीं है, यह त्याग, प्रेम और मर्यादा की नींव है। राम-केवट संवाद में जो निश्छल भक्ति दिखाई गई, उसने हमें मंत्रमुग्ध कर दिया।”

अन्य पदाधिकारी एवं व्यवस्थापक

वरिष्ठ उपाध्यक्ष, श्री सुशील यादव, और उपाध्यक्ष, श्री हरविन्द्र छाबड़ा ने व्यवस्थाओं पर संतोष जताते हुए कहा कि दर्शकों की भारी भीड़ के बावजूद सभी ने शांति और अनुशासन बनाए रखा।

कार्यक्रम संयोजक, श्री मुनीश मेहता, ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा, “राम, सीता और लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले कलाकारों ने अपने पात्रों को जीया है। विशेष रूप से राम-सीता संवाद में उनका अटूट प्रेम और साहस प्रेरणादायक था।”

मीडिया प्रभारी, श्री जे० पी० बैंसला, ने कहा, “आज की लीला का संदेश स्पष्ट है कि धर्म और वचन की रक्षा के लिए बड़े से बड़ा त्याग भी करना पड़ता है। हम हर घर तक यह संदेश पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं।”

 

मंच व्यवस्थापक, श्री अमर बहादुर, और फील्ड व्यवस्थापक, श्री विशाल प्रजापति, ने कहा कि कमेटी के सभी सदस्यों, विशेषकर उपाध्यक्षगण (श्री मदन छाबड़ा, श्री विक्की छाबड़ा, आदि) और मंत्रियों (श्री सुरेन्द्र नारंग, श्री हनी बत्रा, आदि) के सहयोग से ही इतना सफल और भावुक मंचन संभव हो पाया है।

कमेटी के पदाधिकारियों ने यह विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में होने वाले मंचन भी इसी तरह भव्य और आदर्शों से परिपूर्ण होंगे।

रामलीला कमेटी ने पत्रकारों को सम्मानित किया।यह सम्मान मीडिया के योगदान के लिए था।पत्रकारों ने रामलीला को जनता तक पहुँचाया।कमेटी ने मीडिया को धन्यवाद दिया।यह सम्मान, संस्कृति और मीडिया के जुड़ाव को दिखाता है।

         रामलीला कमेटी ने पत्रकारों को सम्मानित

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