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हस्तिनापुर के रामलीला मैदान में दिखा भक्ति का अद्भुत संगम, धनुष यज्ञ ने मोहा मन

लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने मंच में एक अलग ही जान डाल दी। इस संवाद में क्रोध, हास्य और वीरता का ऐसा अद्भुत मेल था कि दर्शक तालियां बजाते नहीं थके।

                       धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर मंचन

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      रामलीला मंचन को देखते हुए नगरवासी            हस्तिनापुर के रामलीला  हस्तिनापुर के रामलीलामैदान में दिखा भक्ति का अद्भुत संगम, धनुष यज्ञ ने मोहा मन

 त्रिलोक न्यूज़ विक्की    -हस्तिनापुर, 24 सितंबर 2025 — आज हस्तिनापुर का रामलीला मैदान भक्ति और उत्साह से सराबोर हो गया। शाम होते ही लोगों का हुजूम रामलीला देखने के लिए उमड़ पड़ा, और हर किसी की निगाहें मंच पर टिकी थीं। कारण था आज होने वाला धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर का ऐतिहासिक मंचन, जिसने दर्शकों को अपनी कुर्सियों पर बांधे रखा।

जैसे ही मंच पर राजा जनक ने घोषणा की कि जो भी शिव धनुष को तोड़ेगा, उसी के साथ उनकी पुत्री सीता का विवाह होगा, एक-एक करके देश-विदेश के कई दिग्गज राजा और राजकुमार सामने आए। हर किसी ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी, लेकिन कोई भी उस विशाल धनुष को हिला तक नहीं पाया। निराशा का माहौल छाने लगा, और राजा जनक मायूस हो गए।

लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने मंच में जान भर दी तभी गुरु विश्वामित्र के कहने पर प्रभु श्री राम मंच पर आए। उनका सौम्य रूप देखकर भी कुछ लोग मुस्कुराए, लेकिन जैसे ही उन्होंने धनुष की ओर कदम बढ़ाए, सारा मैदान शांत हो गया। प्रभु श्री राम ने सहजता से धनुष को उठाया और एक ही पल में उसकी प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया। धनुष के टूटने की गड़गड़ाहट इतनी तेज थी कि पूरा ब्रह्मांड गूंज उठा।

इसी समय, जब सब तरफ खुशी का माहौल था, अचानक क्रोधित परशुराम जी का आगमन हुआ। उनके क्रोध का कोई ठिकाना न था। उन्होंने लक्ष्मण जी से तीखे प्रश्न किए, जिस पर लक्ष्मण जी ने भी अपनी हाजिरजवाबी से उनके प्रश्नों का उत्तर दिया। लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने मंच में एक अलग ही जान डाल दी। इस संवाद में क्रोध, हास्य और वीरता का ऐसा अद्भुत मेल था कि दर्शक तालियां बजाते नहीं थके।

रावण-बाणासुर और जनक-लक्ष्मण संवाद ने भी दिखाया गहरा प्रभाव

आज के मंचन में रावण-बाणासुर संवाद ने अहंकार और शक्ति की कहानी बयां की, तो वहीं जनक-लक्ष्मण संवाद ने भावनात्मक गहराई दिखाई। अंत में, दासी-सुनैना संवाद ने कहानी को एक मानवीय स्पर्श दिया, जिससे दर्शकों का दिल जीत लिया।

यह मंचन केवल एक नाटक नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव था, जिसने दर्शकों को त्रेता युग में ले जाकर प्रभु श्री राम के महान चरित्र से रूबरू कराया। कल के मंचन के लिए दर्शकों में अभी से उत्सुकता दिख रही है, क्योंकि सभी को अगले महत्वपूर्ण दृश्यों का इंतजार है। जय श्री राम! आज के मंचन के बाद, श्री रामलीला कमेटी ने सभी कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के लिए एक सम्मान समारोह आयोजित किया। पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट और “जय श्री राम” के नारों से गूंज उठा। इस अवसर पर कमेटी के कई प्रमुख सदस्य जैसे श्री हरीश लाल, श्री बाल मुकुन्द बत्रा, श्री अनुज शर्मा, श्री गौरव गुर्जर, श्री सुनील कालरा, और श्री सुभाष गबरानी (बिट्टू) मौजूद थे। इन सभी ने कलाकारों की कला और समर्पण की जमकर सराहना की। अन्य उपस्थित सदस्यों में श्री सुशील यादव, श्री हरविन्द्र छाबड़ा, श्री विक्की छाबड़ा, श्री राजू नारंग, श्री मुकेश ठाकुर, श्री सागर चौधरी, श्री पवनीश चौधरी, श्री मुनीश मेहता, श्री सुरेन्द्र नारंग (किम्मा), श्री अमर बहादुर, श्री दर्शन भारद्वाज, श्री मनोज अहलावत, श्री अशोक जुनेजा, श्री मदन छाबड़ा, श्री गुलशन खट्टर, श्री देवेन्द्र चौधरी, श्री सुजीत चौधरी, श्री विक्रम चौधरी, श्री जितेन्द्र शर्मा, स० हरेन्द्र सिंह (निक्कू), श्री विशाल प्रजापति, श्री नीरज कामदार, श्री अरविन्द कुमार (बिन्नू), श्री सुशील अरोरा, श्री जे० पी० बैंसला, श्री ओमप्रकाश पपनेजा, श्री बालेश्वर प्रधान, और श्री पंकज फौजी भी शामिल थे। इन सभी ने कलाकारों को उनके अद्भुत प्रदर्शन के लिए धन्यवाद दिया।

पदाधिकारियों ने निभाई जिम्मेदारी, नगरवासियों ने जताया आभार

इस साल के रामलीला मंचन को देखकर नगरवासियों में एक विशेष उत्साह देखा गया। लोगों ने बताया कि कमेटी के पदाधिकारियों ने मंचन से लेकर व्यवस्था तक हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। स्वच्छता, सुरक्षा और दर्शकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे सभी लोग बिना किसी परेशानी के इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बन पाए।

एक नगरवासी ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, “कलाकारों ने तो अपनी कला से हम सबको भावुक कर दिया, लेकिन यह आयोजन इतना सफल और व्यवस्थित इसलिए है क्योंकि हमारी कमेटी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई है। हमें अपनी कमेटी पर गर्व है।यह आयोजन हस्तिनापुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है और इसमें भाग लेने वाले सभी लोगों के लिए एक यादगार अनुभव रहा। इस तरह के आयोजनों से कला और कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है, जो हमारी परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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