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सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण, भक्ति में डूबा पूरा परिसर।

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सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण, भक्ति में डूबा पूरा परिसर।

खंडवा। सावन माह के पावन अवसर पर खंडवा के मेडिकल कॉलोनी एवं प्रोफेसर कॉलोनी स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मंदिर में लगातार पांचवें वर्ष पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन का आयोजन किया गया। क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों ने मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाए और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से पूजन एवं अभिषेक किया। समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। हर उम्र के लोग इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ पार्थिव शिवलिंग निर्माण का सिलसिला दोपहर 4 बजे तक चला। इसके बाद विधि-विधान से पूजन-अभिषेक किया गया। पूरे परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष और वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई देती रही।
मिट्टी से शिवलिंग बनाए, फिर किया सामूहिक पूजन
पार्थेश्वर पूजन समिति के कौशल मेहरा ने बताया कि सिद्धेश्वर महादेव मंदिर से क्षेत्र के हजारों रहवासी जुड़े हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक और पूजन करते हैं। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि सावन माह में हर वर्ष एक दिवसीय पार्थेश्वर पूजन का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में आसपास के सैकड़ों परिवार अपने पूरे परिवार के साथ शामिल होते हैं और स्वयं मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करते हैं।
आयोजन की खास बात यह रही कि महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों सभी ने मिलकर पार्थिव शिवलिंग बनाए। यानी पूजा केवल देखने या करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर परिवार को भगवान शिव की आराधना में प्रत्यक्ष रूप से सहभागी बनने का अवसर मिला।
महापौर अमृता अमर यादव भी हुईं शामिल

आयोजन में नगर की प्रथम नागरिक महापौर अमृता अमर यादव भी सम्मिलित हुईं। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ पार्थिव शिवलिंग पूजन में सहभागिता की और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर महापौर ने उपस्थित भक्तों से कहा कि सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ का पूजन, अभिषेक और पार्थेश्वर पूजन विशेष लाभकारी एवं प्रभावी होता है। उन्होंने कहा कि सभी को इस विशेष पूजन का लाभ उठाना चाहिए और भगवान शिव की आराधना में सहभागी बनना चाहिए।
महापौर ने आयोजन समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर क्षेत्रवासियों को भगवान भोलेनाथ के विशेष पार्थेश्वर पूजन का अवसर उपलब्ध कराना सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन आस्था के साथ-साथ समाज में संस्कार और सामूहिक सहभागिता को भी मजबूत करते हैं।

पांच वर्षों से निभाई जा रही धार्मिक परंपरा

मंदिर के पुजारी पंडित आशीष गीते ने बताया कि सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में आनंद उत्सव समिति द्वारा क्षेत्रवासियों के सहयोग से पिछले पांच वर्षों से लगातार पार्थिव शिवलिंग पूजन का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आयोजन को गरिमामय स्वरूप देने में क्षेत्र के कई परिवार सहयोग करते हैं और अपने पूरे परिवार के साथ आयोजन में सहभागिता निभाते हैं। सावन माह में पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव का पूजन करने की परंपरा का विशेष महत्व है।
नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास
कौशल मेहरा ने बताया कि पार्थिव पूजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि श्रद्धालु स्वयं अपने हाथों से मिट्टी के शिवलिंग बनाते हैं। इससे बच्चों और युवा पीढ़ी को भी धार्मिक परंपराओं को करीब से समझने और उनमें सहभागिता करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि सिद्धेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र के हजारों परिवारों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन में होने वाला पार्थेश्वर पूजन अब क्षेत्र की धार्मिक परंपरा का हिस्सा बन चुका है।
शिवमय हुआ सिद्धेश्वर महादेव मंदिर
पार्थिव शिवलिंग निर्माण से लेकर पूजन-अभिषेक तक पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आया। कहीं श्रद्धालु मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण करते दिखाई दिए तो कहीं परिवार सामूहिक रूप से पूजन में जुटे रहे। वैदिक मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष ने पूरे वातावरण को शिवमय कर दिया। सुनील जैन ने बताया कि लगातार पांचवें वर्ष में आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने आस्था, परिवार और संस्कारों को एक साथ जोड़ने का संदेश दिया। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल पार्थिव शिवलिंग बनाने और पूजन करने का आयोजन नहीं रहा, बल्कि भगवान भोलेनाथ की भक्ति में सामूहिक रूप से जुड़ने का एक विशेष अवसर बन गया।
सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में सावन की इस भक्ति ने एक बार फिर दिखाया कि जब परिवार और समाज मिलकर भगवान शिव की आराधना करते हैं, तो आस्था का उत्सव और भी भव्य और जीवंत हो जाता है।

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