
- सरकार के दावों को झूठा साबित कर रहे है सरकारी अध्यापक ##
कुछ ऐसा ही मामला हमेसा सुर्खियों मे प्रसारित रखते है ग्राम पंचायत गिरधरपुर. ब्लॉक कोथावा, जनपद हरदोई के प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक जो सरकार से अपनी समय समय पर सेलेरी तो ले रहे पर उन नोनीहालो का भविष्य दाव पर लगातार लगा रहे है जमीनी स्तर पर आने वाली पीढ़ी की उम्मीदें है. जी हा ऐसा ही मामला है ग्राम गिरधरपुर के प्राथमिक विद्यालय गिरधरपुर का. जहाँ सरकार अपनी सभी सुविधावो का दावा कर रही है की कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे. बच्चों के खाने से लेकर उनके बैठने उठने. पढ़ने. स्वक्छ शौचालय, स्वक्छ पेयजल एवं खेल कूद की समुचित व्यवस्था का जिम्मा सरकार ने उठा रखा… उसी सरकार की मंसाओ को झूठा साबित करने का काम कर रहे है उन विद्यालयों मे तैनात प्रधानाचार्य एवं उनके साथ तैनात सहायक, व सिक्छामित्र अध्यापक गण, आजकल भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए जहाँ आम जनमानस की जिंदगी दांव पर लगी है वही विद्यालय मे पढ़ने वाले छोटे छोटे बच्चे भी इस समस्या को बखूबी झेल रहे है, विद्यालय के रख रखाव मे जहाँ सरकार लाखो रूपये प्रति विद्यालय को मुहैया करवा रही है,, उसी विद्यालय मे बच्चो के साथ जमीनी स्तर पर क्या क्या घटनाये घटित हो रही है उसकी चिंता ना ही अध्यापको को है ओर ना ही अभिभावकों को और ना ही ग्राम पंचायत की कमान लेने वाले प्रधान जी की, गर्मी को देखते हुए पंखो की व्यवस्था ध्वस्त, जिससे स्कूल मे पढ़ने वाले बच्चो को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है वही कुछ बच्चे गर्मी मे स्वक्छ हवा की व्यवस्था न होने से बीमार पड़ रहे है, जिसे लेकर बच्चो को स्कूल न भेजनें को मजबूर होते दिखाई दे रहे है उनके माता पिता, बच्चो का यह भी कहना है कि किसी क्लास मे अगर पंखा भी है तो सिर्फ आगे की टेबलो पर और पीछे बैठने वाले बच्चो तक हवा नहीं पहुंच पाती वही अध्या पक अपने कार्यालय मे फर्रुा टा पंखे लगाकर हवा का आनंद लेते है,, माध्या हन भोजन योजना के अंतर्गत भी बच्चो के साथ लापरवाही बर्ती जाती है कभी बिस्किट कभी चाट समोसे आदि को देकर ही छोटे छोटे बच्चो को संतुस्ट कर दिया जाता है, इस विद्यालय मे मेंन्यु के अनुसार तो कभी भोजन ही नहीं बनता, तहड़ी, खिचड़ी ही बच्चो का भोजन है,,एक कारण यह भी,रसोईयो के विद्यालय मे न आने से ऐसी समस्याएं पैदा हो रही है, गाँव निवासी राजाराम कश्यप पुत्र मनोहर कश्यप का दावा है कि विद्यालय मे वो कई वर्षो से भोजन बनाने का काम वो करते आ रहे थे पर 5,6 महीने से उन्हें वेतन न मिलने से वो और उनके साथी अब काम पर नहीं जा रहे है. जिसके बाद अब प्रधानाचार्य ने दूसरी ग्राम पंचायत के कर्मी को विद्यालय मे भोजन बनाने के लिए लगाया है, विद्यालय मे न तो स्वक्छ सौचालय, न स्वक्छ हवा और न ही बच्चो के दोपहर भोजन की समुचित व्यवस्था है, आखिर सच क्या है या तो स्कूल का सिस्टम ध्वस्त है या फिर सरकार जो दावे कर रही है वो झूठ है,या तो जिम्मेदार सरकार की आँखों मे धूल झोक रहे है. और सरकार की छवि को जनता की नजरो मे गन्दा कर रहे है!!










