
अकेले नहीं गया सफर: खंडवा में लावारिस बुजुर्ग को इंसानियत ने दी अंतिम विदाई।
खंडवा। अस्पताल की एक चुप्पी भरी देहरी से शुरू हुआ एक अनदेखा सफर आखिरकार इंसानियत की गोद में समाप्त हुआ। एक लावारिस बुजुर्ग, जिनकी पहचान कोई नहीं जान सका, जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी अकेले नहीं रहे—समाजसेवियों और पुलिस ने मिलकर उन्हें वह सम्मान दिया जिसके वे हकदार थे।
एक साल अस्पताल में संघर्ष, फिर जीवन की विदाई
समाजसेवी व समिति सदस्य सुनील जैन ने बताया कि करीब 60 से 65 वर्षीय अज्ञात बुजुर्ग को 07 मई 2025 को ग्राम रोशनी (थाना खालवा) से 108 एम्बुलेंस द्वारा जिला चिकित्सालय लाया गया था। लंबे इलाज के बाद 20 मई 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
नाम नहीं मिला, लेकिन सम्मान जरूर मिला
मृत्यु के बाद थाना मोधट रोड पुलिस ने मर्ग क्रमांक 132/26 (धारा 194 BNSS) दर्ज कर परिजनों की तलाश शुरू की। कई प्रयासों के बावजूद उनकी पहचान और परिवार का कोई सुराग नहीं मिल सका।
जब समाज बना परिवार
सुनील जैन ने बताया कि वर्षों से इस प्रकार के सैकड़ो अज्ञात शवो का अंतिम संस्कार पूर्व निमाड सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति के सदस्यो सदस्यों द्वारा बिना जाति भेदभाव के विधि विधान के साथ श्रद्धांजलि अर्पीत कर किया जाता है। अंतिम संस्कार ही नहीं मृतक आत्माओ की शांति के लिए अमावस्या के दिन विद्वान पंडितों के
मंत्रोउच्चार के साथ तर्पण कार्य भी हवन के माध्यम से किया जाता है। सुनील जैन ने बताया कि अज्ञात बुजुर्ग व्यक्ति के परिजनों के न मिलने पर समाजसेवियों और पुलिसकर्मियों ने आगे बढ़कर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। 23 मई 2026 को राजा हरिश्चंद्र मुक्तिधाम में पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।
इस मानवीय कार्य में भूपेंद्र सिंह चौहान, जुबैर पटेल, यशवंत केदार, रियासत अली, मोहम्मद मुबारक पटेल तथा आरक्षक अनुराग कुशवाहा (मोधट थाना) की सराहनीय भूमिका रही।
संदेश छोड़ गई यह घटना
यह घटना केवल एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि इस बात की गवाही है कि जब पहचान मिट जाती है, तब इंसानियत नाम लेकर खड़ी हो जाती है।






