खंडवा जिले में जल संरक्षण संवर्धन को लेकर नवाचार।
जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा अव्वल।
पिछले वर्ष की सफलता के बाद इस वर्ष भी नंबर वन बनेगा जल संरक्षण संवर्धन में खंडवा जिला
सड़कों किनारे लाखों कंटूर से रुकेगा पानी, बढ़ेगा भूजल स्तर
खंडवा। इच्छा शक्ति हो तो सभी कार्य सफल हो जाते हैं, जल ही जीवन हें के सिद्धांत को मानते हुए मध्यप्रदेश का खंडवा जिला इन दिनों जल संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत यहां वर्षा जल को सहेजने और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि पिछले वर्ष जल संरक्षण अभियान के अंतर्गत जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता, जिला पंचायत के सीईओ नागार्जुन गौड़ा के मार्गदर्शन में जिले की पूरी टीम ने इस अभियान में अपनी सक्रियता के माध्यम से मध्य प्रदेश ही नहीं देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया था, इस वर्ष भी नंबर वन बनने के लिए जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता जल संरक्षण को लेकर नवाचार करते हुए पूरी टीम के साथ इस अभियान में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, और संभावना है कि इस वर्ष भी खंडवा जिला जल संरक्षण में नंबर वन बनेगा, अभी तक की रैंक में खंडवा और डिंडोरी के बीच संघर्ष चल रहा है, समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि इस वर्ष भी अब तक पहाड़ियों और ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए जा रहे कंटूर (गड्ढों) के साथ-साथ सड़कों के किनारों पर भी लाखों कंटूर तैयार किए जा रहे हैं, ताकि बारिश का पानी बहकर न जाए, बल्कि जमीन में समा सके, खंडवा में जल संरक्षण को सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि जन आंदोलन का रूप दिया गया है। यही वजह है कि जल शक्ति मंत्रालय की रैंकिंग में यह जिला देशभर में अग्रणी बना हुआ है, जबकि मध्यप्रदेश में यह पहले स्थान पर चल रहा है। यह उपलब्धि प्रशासन और आम जनता की संयुक्त भागीदारी का परिणाम मानी जा रही है, जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता के अनुसार, जिले में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मिशन मोड में काम किया जा रहा है। खेत तालाब, कुओं के रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर, रिचार्ज शाफ्ट, बोरवेल रिचार्ज सिस्टम और रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा जा रहा है। इसका उद्देश्य एक ही है,हर बूंद पानी को सहेजना,इस अभियान की सबसे अनोखी पहल सड़कों के किनारों पर बनाए जा रहे कंटूर हैं। आमतौर पर बारिश का पानी सड़कों से बहकर सीधे नालों और नदियों में चला जाता है, लेकिन अब इन कंटूर के जरिए पानी को रोका जाएगा और धीरे-धीरे जमीन में रिसने दिया जाएगा। इससे भूजल स्तर में सुधार होगा और आने वाले समय में जल संकट की समस्या से राहत मिल सकेगी, पुराने तालाबों और जलाशयों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जहां पहले पानी का संचयन नहीं हो पाता था, वहां अब नई तकनीक और बेहतर संरचनाओं के जरिए पानी को रोका जा रहा है। जिले में अब तक एक लाख से अधिक जल संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं और करीब ढाई लाख संरचनाओं का लक्ष्य रखा गया है, खंडवा ने वर्ष 2025 में भी जल संचय के क्षेत्र में देश में पहला स्थान हासिल किया था। प्रशासन का मानना है कि अगर इसी तरह जनभागीदारी बनी रही, तो खंडवा जल संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है, सुनील जैन का कहना है कि “जल ही जीवन है और जल है तो कल है। भीषण गर्मी के बीच बारिश से पहले ही पानी सहेजने का यह प्रयास बेहद सराहनीय है.
खंडवा की यह पहल न सिर्फ जल संकट से निपटने का मजबूत समाधान बन रही है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा भी है कि अगर समय रहते पानी को सहेजा जाए, तो भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है.










