
अध्यात्म से सामाजिक सरोकार: साध्वी कृष्णप्रिया का गौ-सेवा संकल्प,
भजनों की सोशल मीडिया पर धूम, आज से दादाजी की नगरी में बहेगी कथा के माध्यम से भक्ति की गंगा।
खंडवा। सनातन संस्कृति और आधुनिक डिजिटल युग के संगम में एक अलग पहचान बनाते हुए साध्वी कृष्णप्रिया आज न केवल आध्यात्मिक जगत में, बल्कि सामाजिक सेवा और डिजिटल मंचों पर भी व्यापक प्रभाव छोड़ रही हैं। मात्र 5 वर्ष की आयु में वैराग्य का संकल्प लेने वाली साध्वी कृष्णप्रिया जी महाराज ने गौ-सेवा और भक्ति को अपने जीवन का केंद्रीय उद्देश्य बना लिया है।
5 वर्ष की आयु में वैराग्य और भक्ति का संकल्प
समाजसेवी व समिति सदस्य सुनील जैन ने बताया कि दीदी कृष्ण प्रिया जी द्वारा चारों धाम और अन्य तीर्थो पर पहुंचकर परमात्मा को स्वयं कथा का श्रवण करवाया, आज सोमवार से श्री गणेश गौशाला में कृष्ण प्रिया जी गौ माता के साथ दादाजी एवं श्रद्धालुओं को भगवान कृष्ण की लीला भक्ति की कथा श्रवण कराएंगी। मूल रूप से वृंदावन की एक ब्राह्मण परिवार में जन्मी साध्वी कृष्णप्रिया का बचपन से ही भगवान कृष्ण के प्रति गहरा अनुराग रहा। बताया जाता है कि महज 5 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक मोह त्यागकर “बांके बिहारी” की भक्ति का संकल्प लिया और आध्यात्मिक मार्ग को अपना जीवन समर्पित कर दिया।
गौ-सेवा बना जीवन का मुख्य लक्ष्य
अध्यात्मिक यात्रा के दौरान एक दर्दनाक अनुभव ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। श्रीमद्भागवत कथा के दौरान सड़क दुर्घटना में घायल गाय को देखकर उनका हृदय द्रवित हुआ और तभी से गौ-सेवा उनके जीवन का प्रमुख संकल्प बन गया। सुनील जैन ने बताया कि वर्तमान में वे कथा आयोजनों से प्राप्त होने वाली धनराशि का बड़ा हिस्सा गौ-सेवा में समर्पित कर रही हैं। मथुरा और वृंदावन क्षेत्र में लगभग 1000 बेसहारा एवं घायल गायों के लिए एक विशाल गौशाला का निर्माण कार्य भी प्रगति पर बताया जा रहा है।
कथा आयोजनों से गौशाला निर्माण तक
साध्वी कृष्णप्रिया देश-विदेश में होने वाली श्रीमद्भागवत कथा, रामकथा और शिव महापुराण जैसे आयोजनों के माध्यम से प्राप्त दान का उपयोग पूरी तरह सामाजिक कार्यों में कर रही हैं। जयपुर सहित विभिन्न शहरों से श्रद्धालु इस गौ-सेवा अभियान में सहयोग दे रहे हैं। जयपुर
‘तू जप ले राधा राधा’ भजन सोशल मीडिया पर वायरल
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी साध्वी कृष्णप्रिया की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। उनकी आवाज में गाया गया भजन “तू जप ले राधा राधा” यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर व्यापक रूप से वायरल हो चुका है।
इस भजन ने यूट्यूब पर 11 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल कर लिए हैं, जबकि इंस्टाग्राम रील्स पर युवा वर्ग इसे बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। डिजिटल युग में यह भजन भक्ति और मानसिक शांति का प्रतीक बनकर उभरा है।
अध्यात्म और आधुनिकता का संतुलन
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि आज के दौर में जब युवा वर्ग आधुनिक संगीत की ओर आकर्षित है, ऐसे समय में साध्वी कृष्णप्रिया का कार्य अध्यात्म और आधुनिकता के बीच एक संतुलन स्थापित करता है। वे अध्यात्म को केवल साधना तक सीमित न रखकर उसे सामाजिक सेवा, जीव दया और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ रही हैं।
देश-विदेश में कथाओं का विस्तार
साध्वी कृष्णप्रिया ने केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, रामेश्वरम और जगन्नाथ पुरी जैसे तीर्थ स्थलों पर कथाएं प्रस्तुत कर भक्तों को आध्यात्मिक संदेश दिया है। देश-विदेश में उनके कथावाचन कार्यक्रमों की निरंतर मांग बनी हुई है।
खंडवा में पांच दिवसीय कथा का आयोजन आज से प्रारंभ,
खंडवा की दादाजी की नगरी में साध्वी कृष्णप्रिया का आगमन प्रस्तावित है। यहां गणेश गौशाला परिसर में 18 मई सोमवार आज से पांच दिवसीय “नानी बाई का मायरा” कथा का आयोजन किया जाएगा।
आयोजन समिति पूर्व निमाड सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति के संयोजक आशीष चटकेले ने बताया कि दीदी कृष्ण प्रिया जी की कथा को लेकर तैयारियां पूर्ण हो चुकी है , श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, समिति ने सभी धर्म प्रेमी बंधुओ, मातृ शक्ति से अनुरोध कीया हें अधिक मास के पुण्य अवसर पर नानी बाई को मायरो कथा सुनकर भक्ति का आनंद लेकर पुण्य प्राप्त करें,बड़ी संख्या में भक्तों के शामिल होने की संभावना है।
निष्कर्ष
गौ-सेवा, भक्ति संगीत और आध्यात्मिक कथाओं के माध्यम से साध्वी कृष्णप्रिया आज एक ऐसे आंदोलन का प्रतीक बन चुकी हैं, जो परंपरा और आधुनिकता को जोड़ते हुए समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित कर रहा है।










