ताज़ा ख़बरें

दयोदय तीर्थ बोरगांव खुर्द में धर्मपाल सागर जी महाराज का किया गया अंतिम संस्कार।

खास खबर

दयोदय तीर्थ बोरगांव खुर्द में धर्मपाल सागर जी महाराज का किया गया अंतिम संस्कार।

मृत्यु बनी महोत्सव, डोली में निकली अंतिम यात्रा, निवास स्थान से बोरगांव खुर्द तक।

खंडवा। मृत्यु ऐसी हो जो महोत्सव बने बुधवार को मकर संक्रांति पर्व पर खंडवा नगर में शवयात्रा नहीं डोली यात्रा निकालकर मृत्यु महोत्सव मनाते हुए अंतिम संस्कार हजारों लोगों ने देखकर नमन किया। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया की वर्षों पूर्व महाराष्ट्र के छोटे से गांव हतनुर मैं जन्म लेकर जैन समाज के ट्रस्टी श्रद्धेय धनपाल जी जैन कासलीवाल खंडवा पहुंचे और अनाज की दलाली में उन्होंने अपने कदम बढ़ाकर एक अच्छा मुकाम हासिल कर अपने दोनों सुपुत्र राजेश और संजय को भी इस कार्य में लगाकर परिपक्व किया। संक्रांति एवं मृत्यु के एक दिन को उन्हें जैन संस्कारों से संत की भांति संस्कारित किया गया एवं उनका नामकरण धनपाल सागरजी रखा गया। बुधवार के दिन प्रातः 90 वर्षीय श्री धनपाल सागर जी का देवलोक गमन हुआ। सुनील जैन ने बताया धनपाल प सागर जी जैन समाज के लिए एक सुदृढ़ आधार-स्तंभ के समान थे। उनका संपूर्ण जीवन धर्म, दान और सेवा को समर्पित रहा। वे सदैव समाज के प्रत्येक धार्मिक एवं सामाजिक कार्य में उत्साहपूर्वक अग्रणी भूमिका निभाते रहे।
सभी महाराज एवं माताजीयो की सेवा में उनकी निष्ठा, श्रद्धा और समर्पण अनुकरणीय था। सादा जीवन, संयमित आचरण और उच्च विचारों से युक्त उनका व्यक्तित्व सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहा। वे वाणी से अधिक आचरण द्वारा धर्म का उपदेश देने वाले श्रेष्ठ श्रावक थे।
अंततः उन्होंने समभाव, शांति और समाधि पूर्वक इस नश्वर देह का त्याग कर पर्याय परिवर्तन किया। उनका जीवन एवं उनके संस्कार जैन समाज के लिए सदैव मार्गदर्शक और स्मरणीय रहेंगे। मृत्यु महोत्सव डोली यात्रा उनके निवास स्थान से जैन मंदिर रामकृष्णगंज होते हुए दयोदय तीर्थ बोरगांव खुर्द पहुंची जहा मंदिर के समीप धर्मपाल सागर जी महाराज का अंतिम संस्कार उनके पुत्र राजेश संजय कासलीवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन एवं शहर के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति में उपस्थित होकर उन्हें नमन किया। समाज के पंकज छाबड़ा, सुनील जैन, आलोक सेठी, पंकज जैन महल, नवनीत अग्रवाल, अनिल बाहेती ने शब्दों के माध्यम से शोक व्यक्त करते हुए करते हुए श्रद्धांजलि दी।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!