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अनावश्यक वस्तु का संग्रह नहीं करना चाहिए यह संग्रह कर्म बंध करता है, ,,आचार्य विभव सागर,,

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अनावश्यक वस्तु का संग्रह नहीं करना चाहिए यह संग्रह कर्म बंध करता है, ,,आचार्य विभव सागर,,

नगर में पहली बार बड़े संघ के सानिध्य में भक्ति भाव से किया गया कल्याण मंदिर विधान का पूजन।

खंडवा। जैन धर्म की श्रमण परंपरा के अनुयायी ,जैन श्रावकों के आराध्य गुरू पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज का जन्म जयंती दिवस गुरुवार आचार्य विभवसागरजी ससंघ के सानिध्य में खंडवा शहर के बजरंग चौक महावीर जिनालय प्रांगण मे़ं अर्चना कल्याण मंदिर विधान का आयोजन हर्ष और उल्लास भक्ति भाव के साथ मनाया गया। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि प्रात : युवाओं के संग प्रात:बेला में वात्सल्य सम्मिलन पश्चात श्रीजी के अभिषेक, शांतिधारा संघ के सानिध्य में गुरुदेव के मुखारविंद से संपन्न हुई। इक्कीस पिच्छिकाओं से बने इस वृहद चतुर्विध संघ की समस्त चर्यायें आकर्षक एवं अविस्मरणीय होती हैं। दर्जनों श्रावक पडगाहन में मुनियों, आर्यिकाओं के आहार हेतु आतुर होकर आव्हान करते हुये प्रतीक्षा करते हैं।धर्म प्रभावना का शहर के लिए यह अत्यंत दुर्लभ , स्वर्णिम अवसर प्रतीत होता है। इस अवसर पर आयोजित प्रवचन माला में पूज्य आचार्य विभवसागरजी ने कर्म प्रकृति का निरूपण किया, कर्म का फल अनिवार्य रूप से प्राप्त होगा ! कोई भी कर्मों के उदय से बच नही सकता, आचार्य श्री ने कहा कि देव शास्त्र गुरु के पूजन भक्ति में हमें जहां मन को शांति मिलती है एवं हमारे पापों का विनाश होता है, कर्म केवल भक्ति,श्रद्धा और धर्म और भक्ति के माध्यम से ही काटे जा सकते है, आचार्य श्री ने कहा कि यह कल्याण मंदिर मंडल विधान करुणा दया का विधान है, हम सब ने भक्ति के साथ भगवान पारसनाथ को साक्षी मानते हुए मंडल विधान किया है निश्चित हमें पूण्य की प्राप्ति होगी। आचार्य श्री ने कहा कि खंडवा की या पवन भूमि में मैं बड़े-बड़े संतों ने पधार कर इस भूमि को पवित्र बनाया है इस प्रकार के अनुसार निश्चित हम सब के लिए एवं युवा पीढ़ी के लिए भी अच्छे परिणाम देंगे। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि सारस्वत कवि उपाधि से विभूषित पूज्य गुरूदेव विभवसागरजी महाराज ने स्वयं पार्श्वनाथ स्तुति कल्याण मंदिर स्तोत्र के काव्यात्मक हिंदी रुपांतरण का अद्वितीय कार्य संपादित किया है, यही रुपांतरण गुरूदेव की प्रवचन श्रंखला के माध्यम से श्रावकों को गुरूजी की अमृतवाणी के रूप मे प्रतिदिन प्राप्त हो रही है। पूज्य गुरूदेव ने कहा कि हमें अनावश्यक वस्तुओं का संग्रह नही करना चाहिए, यह संग्रह कर्म बंध करता है ! अनावश्यक वस्तुयें हमारे जीवन का परिचय,वास्तु और प वित्रता को मलीन करती है ! हमारे चारों और जो वस्तुयें होंगी ,वही हमारा परिचय,हमारी रुचि,हमारा ज्ञान,हमारी श्रद्धा बताती है। हमारे पास शास्त्र,गुरू,देव होंगे तो हमारा प्रत्येक द्रव्य मंगल द्रव्य बन जायेगा। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि मंडल विधान में गुरूदेव के पाद प्रक्षालन ,शास्त्र भेंट शास्त्र भेंट रिव्यम, आयुषी, शुभम गोधा इंदौर, भाई साहब वाईस ऑफ विस्मिता ग्रुप ने प्रदान किये, रजत कलश प्राप्तकर्ता मनन, श्रीमती पूर्वी जी,सन्मति,माणकचंद प्रियंका शिशोर,शशि परमलाल जी डॉ पंकज जैन,आनंद कुमार देवेंद्र कुमार,संगीता गोयल परिवार,पंचमेरु विराजमानकर्ता संगीता गोयल,नमिता प्रतीक,प्रवीण सेठी,स्तुति विज्ञाति पाटनी,मंडल निर्माणकर्ता जवाहरलाल जैन, सोधर्म इंद्र इंद्राणी रेखा महेश जैन, पूजन द्रव्य प्रदाता अविनाश अंकित जैन, पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य वंदना अविनाश जैन, वॉइस ऑफ विस्मिता श्री शांतिधारा पवन सुदीप रावका, अजय पुष्पा लुहाड़िया, प्रथम अभिषेक जितेश गंगवाल, संगीतकार शुभम जैन जबलपुर, शास्त्र भेंट दिगंबर जैन सोशल ग्रुप ने किया। शुभम जैन जबलपुर वालों ने अपनी संगीत में टीम के साथ मंडल विधान की पूजा करवाई अतिथि के रूप में सनावद से मुकेश जैन पेप्सी, प्रशांत जैन, अनुभव जैन शामिल हुए जिनका समाज द्वारा सम्मान किया गया। आयोजित इस अनुष्ठान में अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया ममता कासलीवाल वह उनकी टीम का सहयोग रहा। मंडल विधान कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया, वीरेंद्र जैन, विजय सेठी, पंकज छाबड़ा के साथ ही डॉक्टर पंकज जैन, सुनील जैन,पवन रावका, सुरेश लोहाडीया, राजेंद्र छाबड़ा कैलाश पहाड़िया, अविनाश जैन, पंकज जैन महल, प्रेमांशु चौधरी, पंकज सेठी, संतोषबोस जम्मू लोहाडिया जवाहरलाल जैन राजेश कासलीवाल अर्पित जैन रोहन सेठी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित थे।

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