
त्रिलोक न्यूज़ मध्य प्रदेश सहायक प्रमुख प्रवीण कुमार दुबे 8839125553
‘ट्रम्प की पार्टी में बहुत से ऐसे नेता हैं, जो दूसरे देशों से आने वाले लोगों से नफरत करते हैं। ट्रम्प के करीबी नेता हों या उनके सलाहकार ज्यादातर की सोच प्रवासियों के खिलाफ है। उनके लिए अमेरिका फर्स्ट सबसे बड़ा नारा है और वो उसी पर काम कर रहे हैं। अब पढ़ने या काम करने के लिए भारत से अमेरिका जाना मुश्किल हो गया है। वीजा के लिए लंबी वेटिंग चल रही है।‘
ये बात कहने वाले शख्स अमेरिका में रिपब्लिकन हिंदू कोएलिशन के मेंबर हैं। वहां की राजनीति में एक्टिव हैं। ट्रम्प के समर्थक भी हैं। ये कोएलिशन 2015 में बनाया गया था। इसका मकसद अमेरिकी राजनीति में हिंदू-अमेरिकन और इंडियन-अमेरिकन कम्युनिटी को रिपब्लिकन पार्टी के साथ जोड़ना था।
ये ग्रुप अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के लिए लॉबिंग करता है। इसका काम वहां भारतीयों के मुद्दे उठाना और भारत-अमेरिकी संबंधों को मजबूत करना है। अमेरिका में ट्रम्प के चुनाव प्रचार में रिपब्लिकन हिंदू कोएलिशन ने जमकर मेहनत की। रिपब्लिकन पार्टी की नीतियों का समर्थन किया।
ट्रम्प को राष्ट्रपति बने करीब 8 महीने का वक्त बीच चुका है, लेकिन अब तक अमेरिका में रहने वाले उन भारतीयों के हाथ निराशा ही लगी है, जिन्होंने ट्रम्प के लिए प्रचार किया और फंडिंग की। अमेरिका में भारतीयों के लिए इन 8 महीनों में क्या बदला, हमने वहां रह रहे लोगों से समझने की कोशिश की। साथ ही इस बदलाव के पीछे वजह पर भी जानी।
‘ट्रम्प को सपोर्ट करने वाले भारतीय पछता रहे’ करीब 20 साल से अमेरिका में रह रही प्रियंका (बदला हुआ नाम) बताती हैं, ‘अमेरिका में इंडियन स्टूडेंट स्टडी वीजा लेकर आ जाते हैं। ज्यादातर स्टूडेंट सोचते हैं कि उन्हें कोई नौकरी मिल जाएगी, लेकिन ज्यादातर खाली घूम रहे हैं।’
‘नामी कॉलेजों से पढ़कर आए स्टूडेंट भी अपने सीवी लेकर घूम रहे हैं, क्योंकि यहां जॉब मार्केट की हालत बहुत खस्ता चल रही है। टैरिफ बढ़ने की वजह से महंगाई बढ़ने की आशंका है। हाउसिंग मार्केट में भी सुस्ती है।‘
प्रियंका बताती हैं, ‘अमेरिका में अगर कोई भी स्टूडेंट वीजा की तय मियाद से ज्यादा रुकता है तो सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्हें भी डिपोर्ट करने की तैयारी चल रही है। वीजा रिजेक्शन पहले की तुलना में बहुत ज्यादा होने वाले हैं।‘
‘भारतीयों के लिए वीजा मुश्किल हुआ, नौकरी पर भी संकट’ प्रियंका बताती हैं, ‘अमेरिका में बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरियां जा रही हैं। H1-B वीजा पहले लॉटरी सिस्टम पर आधारित था। लिहाजा कम सैलरी वालों को भी H-1B वीजा मिल जाता था।’
‘कई भारतीय कम सैलरी पर भी आकर काम करते थे और ओवरवर्क करते थे। इसकी वजह से 9 से 5 की जॉब करने वाले अमेरिकियों को दिक्कत होती थी। उन्हें नौकरी से निकाला जाने लगा था। अब नियमों में बदलाव होगा तो H-1B वीजा सिर्फ ज्यादा सैलरी वालों को मिलेगा।’
‘अमेरिका में नौकरी और बसने का सपना, शायद सपना ही रह जाए’ 23 साल के मनप्रीत सिंह (बदला हुआ नाम) पंजाब के रहने वाले हैं। दो साल से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं। मनप्रीत ने भी पढ़ाई के रास्ते अमेरिका में बसने का प्लान बनाया था, लेकिन वीजा को लेकर बदल रहे नियमों से वो निराश हैं।
वो कहते हैं, ‘मैं जब अमेरिका आया था, तब बाइडेन प्रेसिडेंट थे। उम्मीद थी कि वीजा एक्सटेंशन मिल जाएगा और हम यहां नौकरी कर सकेंगे। बाद में ग्रीन कार्ड लेकर यहीं रह जाएंगे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अभी यहां जो भी भारतीय रह रहे हैं, उन्हें महसूस करा दिया गया है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें अपने देश लौटना ही होगा।’
अमेरिका में जॉब के लेवल पर भी अब काफी चैलेंज है। आमतौर पर अमेरिका में पढ़ने जाने वाले स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब भी करते हैं, ताकि अपना खर्च निकाल सकें। मनप्रीत बताते हैं कि अब अमेरिका के जॉब मार्केट में इतनी दिक्कत है कि जो फुलटाइम नौकरियां करते थे, उनकी नौकरियां भी जा रही हैं।
अमेरिका में वकालत पेशे से जुड़े 34 साल के एक युवा ट्रम्प सरकार पर बात करते हुए अपनी पहचान सामने नहीं लाना चाहते। उन्हें डर है कि कहीं उनका अमेरिका में रहना मुश्किल ना हो जाए या उन पर कोई कार्रवाई ना हो जाए।
वे कहते हैं, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि अमेरिका में रहते हुए हमारे आजादी से बोलने पर भी पाबंदी जैसी कोई बात हो सकती है। इसे लेकर कोई कानूनी पाबंदी तो नहीं है, लेकिन डर का माहौल इतना ज्यादा है कि कोई कुछ खुलकर नहीं बोल सकता, खासतौर पर भारतीय।’











