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किन्हीं मंडी प्रांगण का निर्माण बना सवालों का अड्डा,गंभीर खामियाँ –न वाइब्रेटर, न सही सरिया,लाखों की लागत के काम में घटिया गुणवत्ता, प्रशासन चुप!

इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर सवाल

मुकेश घोड़ेशवार की रिपोर्ट

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बालाघाट जिले के खैरलांजी तहसील किन्हीं मंडी प्रांगण में 52.85 लाख की लागत से चल रहे सीमेंट सड़क और नाली निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस काम से किसानों की सुविधा बढ़नी थी, वही काम उनकी परेशानी बढ़ाने का खतरा बनता जा रहा है।

गंभीर खामियाँ – न वाइब्रेटर, न सही सरिया

निर्माण स्थल पर वाइब्रेटर का उपयोग नहीं किया जा रहा, जिसके कारण नाली की दीवारों में जगह-जगह खोखलापन साफ दिख रहा है। इतना ही नहीं, सरिया को सही अनुपात और समान दूरी पर नहीं बांधा गया। कहीं सरिया बेहद पास तो कहीं बहुत दूर। विशेषज्ञों का कहना है कि इस लापरवाही से नाली और सड़क जल्द ही धंसक सकती है, जिससे करोड़ों की जनता की गाढ़ी कमाई पानी में बह जाएगी।

इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि उपयंत्री और सहायक यंत्री समय-समय पर मॉनिटरिंग नहीं कर रहे। उनकी लापरवाही से ठेकेदार मनमाने तरीके से काम चला रहे हैं। न गुणवत्ता की परवाह, न डिज़ाइन की चिंता।

सड़क पहले ही जवाब देने लगी

करीब डेढ़ माह पहले बनी सड़क पर अभी से बारिश का पानी जमा होना शुरू हो गया है। अगर यही स्थिति रही तो धान खरीदी के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क जल्द ही गड्ढों में बदल जाएगी। इसका सीधा नुकसान किसानों और मंडी समिति दोनों को उठाना पड़ेगा।

ग्रामीणों की आपत्ति

ग्रामवासी मकसूद अली खान ने कहा –
“नाली में सरिया की दूरी एक समान नहीं रखी गई। कहीं एक फीट पर तो कहीं डेढ़ फीट पर। सड़क और नाली, दोनों में वाइब्रेटर का उपयोग नहीं हुआ है। इससे मजबूती पर सीधा असर पड़ेगा। मैं इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करूंगा।”

जिम्मेदारों की सफाई

सब इंजीनियर राजकुमार अनुरागी ने माना –
“सड़क और नाली निर्माण में वाइब्रेटर का उपयोग होना चाहिए और सरिया भी सही अनुपात में बांधी जानी चाहिए। यदि कार्य में कोई त्रुटि है तो सुधार कराया जाएगा।”
👉 सवाल यह है कि क्यों लाखों की लागत से हो रहे काम में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है? क्या प्रशासन ठेकेदारों को खुली छूट देकर किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रहा है?
अब ग्रामीणों की यही मांग है कि जांच हो, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई हो और घटिया निर्माण को तुरंत दुरुस्त किया जाए।

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