
अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस पर खंडवा बना बाल संरक्षण का प्रेरक मॉडल।
350 से अधिक बच्चों को परिवारों से मिलाया, 607 बच्चों को मिला स्पॉन्सरशिप का सहारा, 15 से अधिक बाल विवाहों की रोकथाम।
खंडवा। अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस के अवसर पर जिले में बाल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों ने खंडवा को एक प्रेरक मॉडल के रूप में स्थापित किया है। मध्यप्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के मार्गदर्शन, कलेक्टर ऋषव गुप्ता के नेतृत्व एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी रत्ना शर्मा के निर्देशन में बाल कल्याण समिति खंडवा द्वारा बच्चों की सुरक्षा, पुनर्वास और अधिकारों के संरक्षण के लिए उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस प्रतिवर्ष 1 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1925 में जिनेवा में आयोजित विश्व बाल कल्याण सम्मेलन से मानी जाती है। इस दिवस का उद्देश्य बच्चों को हिंसा, शोषण, उपेक्षा, बाल श्रम, बाल विवाह एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों से संरक्षण प्रदान करने के प्रति समाज को जागरूक करना तथा प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने बताया कि जिले में बाल संरक्षण को केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व मानते हुए कार्य किया जा रहा है। समिति के सतत प्रयासों से 350 से अधिक बच्चों को सुरक्षित रूप से उनके परिवारों से पुनर्मिलन कराया गया, जिससे उन्हें पुनः पारिवारिक संरक्षण, स्नेह और सुरक्षित वातावरण प्राप्त हो सका।
वहीं आर्थिक रूप से कमजोर एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले 607 बच्चों को बाल स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ा गया, जिससे उनकी शिक्षा, पोषण और अन्य आवश्यक जरूरतों की पूर्ति सुनिश्चित हो रही है। मिशन वात्सल्य के अंतर्गत संचालित योजनाओं का लाभ पात्र बच्चों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
समिति द्वारा बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत बनाने के लिए पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास विभाग, विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सपोर्ट पर्सन कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इन कार्यशालाओं के माध्यम से विभिन्न स्टेकहोल्डर्स को बाल अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों एवं संवेदनशील मामलों के प्रभावी प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया गया।
बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई के विरुद्ध भी समिति ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए 15 से अधिक बाल विवाहों को समय रहते रुकवाया, जिससे अनेक बालिकाओं का बचपन, शिक्षा और भविष्य सुरक्षित हो सका। साथ ही संकटग्रस्त एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग एवं पारिवारिक परामर्श के माध्यम से उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य भी किया गया।
प्रवीण शर्मा ने बताया कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्राप्त सफलताएं टीम वर्क और संवेदनशील प्रशासन का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि जिले में प्राप्त उपलब्धियां मध्यप्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सतत मार्गदर्शन, कलेक्टर ऋषव गुप्ता के संवेदनशील नेतृत्व तथा जिला बाल संरक्षण अधिकारी रत्ना शर्मा के निरंतर सहयोग से संभव हो सकी हैं।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि इन उपलब्धियों में समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के साथ ही सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, स्वप्निल जैन एवं कविता पटेल का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सभी सदस्यों ने बच्चों के सर्वोत्तम हित को सर्वोपरि रखते हुए समर्पण एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य किया, जिसके सकारात्मक परिणाम जिले में दिखाई दे रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस के अवसर पर बाल कल्याण समिति ने समाज से आह्वान किया है कि प्रत्येक नागरिक बच्चों की सुरक्षा एवं अधिकारों के प्रति जागरूक बने तथा किसी भी संकटग्रस्त, असहाय अथवा संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे की जानकारी तत्काल संबंधित विभागों को उपलब्ध कराए।
प्रमुख उपलब्धिया में 350 से अधिक बच्चों का सुरक्षित पारिवारिक पुनर्मिलन, 607 बच्चों को बाल स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ, 15 से अधिक बाल विवाहों की रोकथाम, सपोर्ट पर्सन कार्यशालाओं के माध्यम से विभिन्न विभागों का प्रशिक्षण, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग एवं पुनर्वास के माध्यम से बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना,मिशन वात्सल्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन एवं जनजागरूकता हें।
“सुरक्षित बचपन, सशक्त भविष्य” केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक बच्चे की मुस्कान, सुरक्षा और सम्मान ही विकसित समाज की वास्तविक पहचान है।










