
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव “एकात्म पर्व” का किया शुभारंभ
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आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति व आध्यात्मिक एकता का आधार बना- मुख्यमंत्री डॉ. यादव
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खण्डवा//
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती महाराज के साथ वैशाख शुक्ल पंचमी के उपलक्ष्य में शुक्रवार को ओंकारेश्वर में आयोजित 5 दिवसीय आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव “एकात्म पर्व” कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अद्वैत लोक एवं अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का अवलोकन कर शुभारम्भ किया, साथ ही वे वैदिक अनुष्ठान में भी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती, विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता भिड़े, स्वामी शारदानंद सरस्वती सहित वरिष्ठ संतवृंद उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के संस्कृति विभाग तथा आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के तत्वावधान में 17 अप्रैल से 21 अप्रैल तक एकात्म पर्व मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मांधाता क्षेत्र के विधायक श्री नारायण पटेल, खण्डवा की महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पिंकी सुदेश वानखेड़े, कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
मुख्यमंत्री जी ने “वेदांत सिद्धांत चंद्रिका” का किया विमोचन, वेबसाइट का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृत सेवा फाउंडेशन पुणे के श्री रोहन अच्युत कुलकर्णी द्वारा लिखित पुस्तक “वेदांत सिद्धांत चंद्रिका-विद उद्गार” का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एकात्म धाम की यात्रा, प्रकल्प और भावी स्वरूप पर केंद्रित वेबसाइट ूूूण्वदमदमेेण्उचण्हवअण्पद का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम में एकात्म यात्रा तथा अद्वैत पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया।
भगवान राम, कृष्ण और आदि शंकराचार्य के चरणों से मध्यप्रदेश की भूमि हुई धन्य
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीरामचन्द्र जी त्रेतायुग में मंदाकिनी नदी तट पर चित्रकूट धाम पधारे और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने उज्जैयिनी स्थित सांदपिनी आश्रम पधारे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि सनातन के कठिनकाल में केरल के कालड़ी से चले 8 वर्षीय बालक शंकर ओंकारेश्वर पधारे, जहां परम पूज्य गुरू गोविंदपाद जी के आशीर्वाद से “आदि शंकराचार्य” बनकर सनातन धर्म की धारा को अविरल रूप से बहाने का आधार प्रदान किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की पावन भूमि पर भगवान श्री राम, श्री कृष्ण और आदि शंकराचार्य के चरण पड़े, जिससे मध्यप्रदेश की पावन भूमि धन्य हो गई। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का आधार है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में भी होती है एकात्मता के भाव की अभिव्यक्ति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार सनातन संस्कृति के सिद्धांतों के अनुरूप समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों में भी एकात्मता के भाव की अभिव्यक्ति होती है। इसी क्रम में राज्य सरकार अंत्योदय के सिद्धांतों के क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पंच दिवसीय एकात्म पर्व में पधारे संत, मनीषी, विद्ववान एकात्मकता के वैश्विक संदेश को रेखांकित करेंगे। यह पर्व आधुनिक समाज और नई पीढ़ी को अद्वैत से जोड़ने का अभिनव और सफल प्रयास सिद्ध होगा।
प्राणी मात्र में आत्मा रूपी जो तत्व विद्मान है, वही एकात्म है
इस अवसर पर श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती ने एकात्म धाम की संकल्पना को सराहा। उन्होंने कहा कि प्राणी मात्र में परमात्मा का दर्शन करने वाला ही एकात्मता सिद्ध कर सकता है। व्यक्ति में एकात्म बोध होना आवश्यक है। ब्रह्म, भगवान और आत्मा तीनों एक हैं। प्राणी मात्र में विद्यमान आत्म तत्व का ज्ञान ही एकता का आधार है। सद्-चित-आनंद का भाव ही एकता है। इस जगत से जगदीश्वर को प्राप्त करना ही हमारा ध्येय है। उन्होंने कहा कि गौमाता, धरती माता और जन्म देने वाली माता का सम्मान होना आवश्यक है। गौमाता की सेवा और रक्षा को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति, संस्कारों से समृद्ध होती है। प्राणी मात्र में आत्मा रूपी जो तत्व विद्मान है, वही एकात्म है। एकात्मा को सिद्ध करने के लिए वेदों की आवश्यकता है। वेदों में कही गई बातों का पालन करना चाहिए। वेदांत का आश्रय लेकर ही अद्वैत और एकात्मता को सिद्ध किया जा सकता है।
एकात्म का सबसे सुंदर उदाहरण है, मनुष्य का शरीर, जिसमें कई अंग हैं, लेकिन चेतना एक है
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष सुश्री निवेदिता भिड़े ने कहा कि हम सभी की आत्मा एक है, शरीर मात्र एक साधन है। मनुष्य शरीर, एकात्म का सबसे सुंदर उदाहरण है, शरीर में कई अंग हैं, लेकिन चेतना एक है। संपूर्ण विश्व में हम सभी ईश्वर की कोशिकाओं की तरह हैं, इन कोशिकाओं का प्राण ईश्वर ही है, जो सर्वथा एक है। हमारे वेदों में विद्यमान क्वांटम फिजिक्स और पर्यावरण के सिद्धांतों को विश्व आज समझ रहा है। दुनिया के लोग कहते हैं कि अगर मानव समाज की रक्षा करनी है तो भारत के वेद, उपनिषदों का अध्ययन करना होगा। चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन वेलियानाड केरल से पधारे स्वामी शारदानंद सरस्वती ने कहा कि आदि शंकराचार्य विश्वगुरु हैं, उन्होंने संन्यास ग्रहण कर सनातन धर्म को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। आचार्य शंकर ने अद्वैत सिद्धांत के माध्यम से जीवन के लिए उचित पथ का दर्शन कराया।
दीक्षा समारोह में शंकर दूत के रूप में संकल्प लेंगे 700 से अधिक युवा
आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास स्वामी श्री वेदतत्वानंद पुरी ने कहा कि आचार्य शंकर ने अद्वैत के सिद्धांत से विश्व का परिचय कराया। भारत भूमि को हमारे सिद्ध महापुरुषों ने तीर्थ बनाया। इनके योगदान को पांच दिवसीय आयोजन में सामने लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम हमारी परंपराओं पर चलते हुए विश्व शांति के लिए अद्वैत के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात एआई में अद्वैत की भूमिका पर भी मंथन होगा। कार्यक्रम में वेंकटेशम वेद विज्ञान पीठ तिरुमला से पधारे स्वामी श्री कोपाशिव सुब्रमण्यम अबधानी ने वैदिक अनुष्ठान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पांच दिनों के इस आयोजन में वैदिक परंपरा अनुसार अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। मध्यप्रदेश की धरती पर हो रहे इन अनुष्ठानों की गूंज संपूर्ण भारत और विश्व में होगी। पांच दिवसीय एकात्म पर्व वैचारिक सत्र के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया है। दीक्षा समारोह में 21 अप्रैल को देश-विदेश के 700 से अधिक युवा, शंकर दूत के रूप में संकल्प लेंगे।
आचार्य शंकर के जन्मस्थान से जनवरी 2027 से शुरू होगी एकात्म यात्रा
आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के प्रो. जयकिशोर एस. शास्त्री ने कहा कि ओंकारेश्वर में एकात्म धाम के अंतर्गत आचार्य शंकर की 108 फीट एकात्म प्रतिमा का लोकार्पण 2023 में हो चुका है। ओंकारेश्वर में लगभग 2400 करोड़ की लागत से आचार्य शंकर का अद्वैत लोक संग्रहालय का कार्य प्रगति पर है। ओंकारेश्वर को ग्लोबल सेंटर ऑफ वननेस अर्थात एकात्मता का केंद्र बनाया जा रहा है। यहां अब तक दो हजार पौधे रोपे गए हैं। न्यास द्वारा अद्वैत जागरण शिविर और आचार्य दूतों के प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सिंहस्थ 2028 से पहले भारत में एकात्म बोध के जागरण के लिए जनवरी से अप्रैल 2027 तक आचार्य शंकर के जन्मस्थान से एकात्म यात्रा निकाली जाएगी। आचार्य शंकर के जीवन पर एक फिल्म का निर्माण भी किया जा रहा है। आचार्य शंकर पर शोध के लिए फेलोशिप दी जा रही है।









