
हिंदू समाज की एकता व समरसता पर जोर, आज ओंकारेश्वर में हुआ हिंदू सम्मेलन।
आज की आवश्यकता है प्राचीन कुटुंब व्यवस्था के मूल्यों को बनाने की, ,,स्वामी प्रणवानंद सरस्वती जी,,
ओंकारेश्वर, खंडवा। हिंदू समाज को संगठित रहकर समरस एवं आदर्शवादी समाज के निर्माण के लिए संकल्प लेने की आवश्यकता है। समाज में व्याप्त कुप्रथाओं का बहिष्कार कर जातिवाद जैसी विभाजनकारी व्यवस्थाओं को समाप्त करना होगा, ताकि सभी जातियों के बीच परस्पर प्रेम, सौहार्द और सद्भावना स्थापित हो सके। यह बात हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती जी ने कही। स्वामी जी ने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक और प्रत्येक गांव में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध तथा भारत माता के प्रति सात्विक प्रेम का भाव जागृत करना समय की मांग है। मन में देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति निष्ठा का भाव विकसित करना होगा, जिसकी शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए।संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पंच परिवर्तन के तहत सामाजिक समरसता को केंद्र में रखते हुए जाति व्यवस्था से जुड़ी किसी भी प्रकार की वैमनस्यता को समाप्त करने, भेदभाव से परे समाज का निर्माण करने तथा कुप्रथाओं का उन्मूलन कर भारत की प्राचीन कुटुम्ब व्यवस्था के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया गया। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि हिंदू सम्मेलन में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि अच्छे प्रयासों से आदर्श समाज की संकल्पना को साकार किया जा सकता है। साथ ही प्रत्येक भारतीय में स्वदेशी भाव जगाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। संतों के संदेशों का उल्लेख करते हुए प्रकृति और धरती माता के प्रति कृतज्ञता को समझाने की बात कही गई।
इस अवसर पर सन्यास आश्रम ओंकारेश्वर के महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती, परम शक्ति पीठ कोठी आश्रम से साध्वी साक्षी चेतना दीदी ,षट् दर्शन संत मंडल अध्यक्ष मंगल दास त्यागी, मालवा प्रांत पर्यावरण प्रमुख अंकित गजकेश्वर सहित साधु संत ग्राम कोठी धावड़िया गुंजारी डुकिया ओंकारेश्वर के नागरिक उपस्थित रहें।उक्त विचारों के प्रसार और सामाजिक एकता के उद्देश्य से 13 जनवरी को ओंकारेश्वर के नए बस स्टैंड पर हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति की सहभागिता रही।











