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*जहां संत के चरण पड़ते है वहां संस्कार पनपते है- उपाध्याय विश्रुतसागर जी*

बैंड बाजे के साथ सेठी नगर जैन मंदिर में हुआ मुनि संघ का प्रवेश

*जहां संत के चरण पड़ते है वहां संस्कार पनपते है- उपाध्याय विश्रुतसागर जी*
बैंड बाजे के साथ सेठी नगर जैन मंदिर में हुआ मुनि संघ का प्रवेश

खण्डवा//बहती नदी की धारा के समान दिगम्बर जैन संत निरन्तर गमन करते रहते हैं।जो रुक जाता है वह संसार मे परिभ्रमण करता रहता है और जो अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिये निरन्तर प्रवाहशील होता है वह संसार सागर से पार होकर एक दिन अपने लक्ष्य को प्राप्त कर ही लेता है।जैन संत संसार और शरीर की मोह माया,राग द्वेष आदि विकारी भावों को त्यागकर मोक्ष की प्राप्ति का लक्ष्य बनाते हैं।दिगम्बर जैन संत को चलते फिरते तीर्थ कहा जाता है।जैन संत जहां भी पहुँचते है वहां संस्कार पनपने लगते हैं।
उक्त बात गणाचार्य 108 श्री विरागसागर जी के शिष्य उपाध्याय श्री विश्रुतसागर जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही।मिथ्यात्व दृष्टि को समझाते हुए उन्होंने कहा कि आज हम शरीर और संसार की भौतिक वस्तुओं को अपना मानकर उनसे राग कर रहे हैं।जो कि सर्वथा नाशवान है।आज हमने लौकिक ज्ञान तो बहुत प्राप्त कर लिया है लेकिन पारमार्थिक ज्ञान की कमी रह गयी है।रागी जीव को हमेशा धोखा मिलता है। जिसे हम अपना सगा मानते है वही हमे धोखा देता है।इस शरीर को आत्मा मानना ही मिथ्यादर्शन है।
जैन धर्म में स्वाध्याय को परम औषधि कहा गया है।स्वाध्याय सतपथ का रास्ता दिखाता है तो संयम हमे उस पथ पर चलाता है।संयमी का कभी मरण नहीं होता,उसकी मृत्यु महोत्सव बन जाती है।हमे अपने संत मुनियों की चर्या से सबक लेना चाहिए कि हम मुनि आर्यिका जैसा तप नहीं कर सकते तो एक सच्चे सदाचारी श्रावक तो बन ही सकते हैं।
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि खण्डवा में चातुर्मासरत पूज्य उपाध्याय श्री विश्रुतसागरजी एवम मुनि श्री निर्वेदसागर जी सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट से बड़वाह,सनावद की यात्रा कर गुरुवार को खण्डवा पहुंचे।मुनि संघ इंदौर नाका से इंडस्ट्री एरिया,स्मार्ट सिटी,नवकार नगर,जोशी नगर,रमा कालोनी,लालचोकी होते हुए बैंड बाजे के साथ चन्द्रपभु जिनालय सेठी नगर पहुंचे।जहां समाजजनों ने द्वार द्वार पर मुनि संघ के पाद प्रक्षालन और आरती उतारकर आशीर्वाद प्राप्त किया।मुनि संघ के मंगल प्रवचन प्रातः 8:40 बजे,आहारचर्या प्रातः 10 बजे,दोपहर 3 बजे समयसार एवम आलाप पद्धति का स्वाध्याय शाम 6:30 ,बजे से आरती एवम गुरु भक्ति,रात्रि 8:45 से वैयावृत्ति होगी।मंगलाचरण सुषमा सेठी ने किया।दीप प्रज्वलन महेश जैन,कैलाशचंद जैन लोनारा,रमेश सेठी,दीपक सेठी,सुनील काला ने किया।मुनि संघ के पाद प्रक्षालन विजय इंद्रा सेठी,विनीत नेहा सेठी द्वारा एवम शास्त्र भेंट संतोष नीलम सेठी,प्रकाश सुषमा सेठी,अदिति काला,ऋषि सेठी ने किया। आहारचर्या का अवसर पंकज पायल जैन एवम दीपक पद्मा जी सेठी को मिला।संचालन पंकज जैन ने एवम आभार विजय सेठी ने माना।
*आचार्य पदारोहण दिवस एवम आचार्य छत्तीसी विधान होगा*
मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष विजय सेठी ने बताया कि सेठी नगर जिन मन्दिर में मुनि संघ के मंगल सानिध्य में शनिवार 8 नवम्बर को आचार्य विरागसागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस भक्तिभावपूर्वक मनाया जायेगा।इस अवसर पर प्रातः जिनेन्द्र अभिषेक,शांतिधारा के साथ ही 36 मण्डलीय आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन किया गया है।संगीतमय इस विधान में श्रावक श्राविकाओं द्वारा 36 अर्घ्य समर्पित कर आचार्य परमेष्ठी का गुणानुवाद किया जावेगा। रविवार 9 नवम्बर को जैन धर्मशाला सराफा में दोपहर 1 बजे से पिच्छीका परिवर्तन,कलश वितरण एवम आचार्य विरागसागर जी का 49 वां अवतरण दिवस मनाया जायेगा।

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