
दादाजी मंदिर के लिए संगमरमर की उपलब्धता देखने राजस्थान पहुंची बड़ी टीम।
खंडवा। श्री दादाजी धूनीवाले का बड़ा मंदिर जल्द आकार लेने लगेगा। डेढ़ नंबर के मार्बल की उपलब्धता के लिए मंदिर निर्माण समिति के सदस्य संत उत्तम स्वामी जी के साथ पूरी टीम जयपुर, मकराना और किशनगढ़ पहुंची। सभी जगह से कोटेशन के लिए कहा गया है। समाजसेवी व दादाजी भक्त सुनील जैन ने बताया कि इस महत्वपूर्ण दौरे का मतलब साफ है कि, अब वास्तविक स्थिति में मंदिर निर्माण की प्रक्रिया अब आगे बढ़ाई जा रही हैं। 100 करोड़ रुपए से अधिक भी बजट पहुंच सकता है। मार्बल खरीदने और इसकी उपलब्धता के लिए कलेक्टर, सांसद, संत उत्तम स्वामी के साथ मंदिर निर्माण समिति से जुड़े सदस्य यहां पहुंचे।
जयपुर के जैन मंदिर भी देखा, जहां बारीकी से उत्कृष्ट संगमरमर का कार्य हुआ है। जिस खदान से यहां मार्बल पहुंचा है, वहां भी जाकर वास्तविकता परखी। खदान वाले संगमरमर खंडवा तक किस रेट में, कैसे पहुंच सकते हैं? इस पर भी गहराई से बातचीत की। जिस प्रकार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को वर्षों लग गए उसी के अनुरूप दादाजी धाम पर भी मंदिर निर्माण को लेकर दादाजी की इच्छा एवं आशीर्वाद से 28 साल पुराना सपना साकार होने लगा असल में देखा जाए तो 28 साल से मार्बल के मंदिर की कल्पना खंडवा और यहां के सभी ट्रस्ट व दादाजी को मानने वाले लोग कर रहे हैं। कई बार इसके नरम गरम प्रयास भी हुए, लेकिन अब दादा दरबार के तीनों संगठन वाले अनुयाई के साथ सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल एवं कलेक्टर ऋषव गुप्ता की लंबी रुचि ने सारे रास्ते साफ कर दिए हैं। कलेक्टर और सांसद का कहना है कि वे केवल माध्यम हैं। प्रेरणा उन्हें दादाजी से ही मिल रही है। सही भी है कि व्यस्त ऐसे लोगों का जयपुर, मकराना और किशनगढ़ जाना भी बड़ी बात है। खंडवा से गई थी यह टीम समिति सदस्य महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी जी महाराज, रामेश्वर दयाल जी छोटे सरकार, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, जिलाधीश ऋषव गुप्ता, मदन भाउ ठाकरे, तपन डोंगरे, धूनीवाले आश्रम पब्लिक ट्रस्ट की ओर से रोचक नागोरी ने जयपुर पहुँचकर श्री ऋषभ जैन मंदिर देखा, एवं मंदिर ट्रस्टी डी. सी जैन एवं मंदिर के आर्किटेक्ट एवं शिल्पकार मुकेश सोमपुरा से मुलाकात कर बारीकियां देखीं।
जयपुर का संगमरमर वाला मंदिर भी देखा मंदिर का अवलोकन कर, पत्थर, मंदिर निर्माण,तकनीकी एवं आर्थिक विषयों पर बारीकी से अध्ययन किया। यह जैन मंदिर, का शिखर 108 फीट ऊंचा है। गर्भगृह के बाहर का मंडप 55 फीट का वृत्ताकार है। इसके निर्माण में कुल 1 लाख 20 हजार घनफुट मार्बल लगा है। इस मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट ने सीधे मकराना में खदान ख़रीदी और मार्बल की घड़ाई मकराना के इकबाल जी की वर्कशॉप में हुई है। मंदिर में बहुत डिटेल्ड और महीन नक्काशी का काम हुआ है, जो बहुत सुन्दर एवं दर्शनीय है। समिति सदस्यों ने मंदिर की लागत एवं पत्थर की कॉस्ट, घड़ाई की लगात, एवं मंदिर की फिटिंग की लागत इत्यादि सब बारीकी से समझी। किशनगढ़ एवं मकराना जाकर मार्बल के कई सप्लायरस के सैंपल देखे। कोटशन आमंत्रित किए । सप्लायर में मुख्यतः मकराना के गौर मार्बल पैलेस के यहाँ मार्बल की विभिन क्वालिटी देखी।
ऐसे मार्बल की रखी डिमांड
मंदिर निर्माण में लगने वाले अलग अलग पत्थरो के नाम जैसे खम्बे के भाग चौकी, थमा, सरा, पेट सारा, चार मेटा थाली, पांच मेटा थाली जिस पर पाट एवं छत आती है। शिखर में दादरी के पत्थर जैसे बत्तीसमास, सोलमास, बारह मास इत्यादि एवं तकनीकी बारीकियां समझने और हर भाग के रेट के फर्क को भी बारीकी से समझा। सुनील जैन ने बताया कि समिति सदस्यों ने हर सप्लायर के पास 1.5 नंबर मार्बल की उपलब्धता भी समझी । स्टॉक भी देखा। गौर मार्बल के पास 17 वर्क शॉप थी, जिस वर्कशॉप में देखा उसी में 5 लाख घन फुट माल उपलब्ध था।
3 साल में उपलब्ध हो पाएगा मार्बल
समिति सदस्यों ने खंडवा मंदिर में लगने वाले 1. 20 लाख घन फुट मार्बल सप्लाई 2 से 3 वर्ष में संभव है। इसके उपरांत अयोध्या राम मंदिर के गर्भगृह के मार्बल सप्लाई करने वाले रमजान भाई की वर्कशॉप देखी गई, इनका अभी 2.5 लाख घन फुट का बड़ोदा में मणि लक्ष्मी मंदिर निर्माण चल रहा है। रमजान भाई के यहाँ मार्बल क़्वालिटी एवं नक्काशी देखी गई रमजान भाई की मकराना में 23 वर्कशॉप है। रमजान भाई ने समिति की तरफ से कोई देर न
होने पर 3 वर्ष में पूरा पत्थर सप्लाई करने के लिए आश्वस्त किया है।











