
रिपोर्टर = भव्य जैन
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के जीएनएम में प्रवेश को लेकर मनमाने निर्णय को पलटते हुए इस संबंध में आई एन सी के निर्देशानुसार ही प्रवेश नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं। ज्ञातव्य है कि आई एन सी के नियमानुसार जीएनएम में प्रवेश के लिए किसी भी संकाय से बारहवीं उत्तीर्ण विद्यार्थी पात्र होता हैं लेकिन मध्यप्रदेश में नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने मनमाने पूर्ण तरीके से जीएनएम में प्रवेश के लिए बारहवीं में बायोलॉजी की अनिवार्यता की हुई थी, जिसके कारण अन्य संकाय से बारहवीं उत्तीर्ण विद्यार्थी इस रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम में प्रवेश से वंचित थे। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के शिक्षा से आत्मनिर्भरता प्रकल्प के राष्ट्रीय संयोजक ओम शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए बताया कि इस निर्णय से प्रदेश और विशेष रूप से इस आदिवासी अंचल के छात्रों को इस महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने का अवसर मिलेगा जिससे उन्हें रोजगार मिलने के साथ ही निश्चित रूप से स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में सुधार आएगा। इसी क्रम में सर्वोच्च न्यायालय ने जीएनएम, पोस्ट बेसिक तथा एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश परीक्षा की बाध्यता को भी समाप्त कर दिया है। आपने अंचल के विद्यार्थियों से आग्रह किया हैं कि वे माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का अधिकाधिक लाभ उठाते हुए अधिक से अधिक संख्या में इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेकर आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ाए।








