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जर्जर भवन में संचालित हो रहा है हाइस्कूल कोथूरना ,

पूर्व में दीवार की चपेट में आने से हो चुकी है छात्र की मौत, अब टीन शेड में अध्यापन कर भविष्य गढ़ रहे विद्यार्थी

खैरलांजी। जनपद शिक्षा केन्द्र खैरलांजी के संकुल भेंडारा अंतर्गत एकीकृत शासकीय हाइस्कूल कोथूरना में कुल दर्ज संख्या 159 है। यहां वर्तमान में कक्षा पहली से लेकर कक्षा दसवीं तक कुल दस कक्षाओं का संचालन जर्जर प्राथमिक विद्यालय के भवन सहित दो अतिरिक्त कक्षों में हो रहा है जो एक प्रकार से जर्जर हो चुका है। जहां एक अतिरिक्त कक्ष में छ से आठ तक तीन कक्षाओं का संचालन होता है। एक और दूसरे अतिरिक्त कक्षों में कक्षा नवमी और दसवी का संचालन होता है। बारिश में यहां छत से पानी का सीपेज होता है। तो कई स्थानों से छत का प्लास्टर नीचे गिरना प्रारंभ हो चुका है। जिसके कारण बारिश में कक्षाओं के संचालन में शाला प्रबंधन समिति को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। बारिश में छठवीं से आठवीं तक तीनों कक्षाओं का संचालन दो ही कमरों में होता है। जिससे बच्चों और शिक्षकों दोनों को अध्ययन और अध्यापन कार्य में व्यवधान का सामना करना पड़ता है। जिस दिन बारिश नही होती और मौसम साफ होता है उस दिन कक्षा छठवीं के बच्चें बाहर टीन शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करते हैं। सातवीं और आठवीं जिन कमरों में संचालित होती है वहां भी बारिश में पानी टपकता है। कक्षा एक से पांच तक जिस भवन में संचालित होती है वह भी क्षतिग्रस्त हो चुका है और दीवारों में दरारें आ चुकी है। माध्यमिक शाला का भवन जर्जर और जीर्ण शीर्ण होने के कारण वह डिस्मेंटल लायक हो गया है। जिसके कारण उस भवन में कक्षाओं का संचालन फिलहाल बन्द कर दिया गया है।

ऐसे में कैसे बच्चों और पालकों को प्रोत्साहित किया जा सकता है

ऐसे में सोचा जा सकता है कि बच्चें किस तरह से बिना पंखे के उमस भरी गर्मी में टीन शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करते होंगे। क्या ऐसे जर्जर भवन में कोई पालक चाहेगा कि उनका बच्चा अध्यापन करे। फिर भी पालक ऐसे जीर्ण शीर्ण और जर्जर भवन में संचालित शाला में बच्चों को भेज रहे है तो ऐसे में निश्चित ही इन पालकों के हिम्मत की दाद दी जानी चाहिए जो जोखिम भरे माहौल में बच्चों को शाला भेजकर शाला प्रबन्धन और प्रशासन की मदद कर रहे है। सरकार को चाहिए कि वह ऐसे शालाओं में बच्चों के लिए भवन की व्यवस्था कर बच्चों और पालकों का हौसला बढ़ाए।

2019 से हो रहा हाइस्कूल का संचालन, नही है खुद का भवन

वर्ष 2019 से संचालित हाइस्कूल में कक्षा नवमी और दसवी के संचालन हेतु खुद का भवन तक नही है। कक्षा एक से कक्षा दसवी तक यहां कुल 159 छात्र छात्राएं अध्ययन कर अपना भविष्य गढ़ रहे है। वह भी एक जोखिम भरे माहौल में। जहां कभी भी कोई छोटी बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है। लेकिन शासन प्रशासन में बैठे हुए जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को इससे कोई सरोकार नही है। शिक्षा को लेकर इनके वादे केवल कागज तक सीमट कर रह गए है कहे तो अतिशयोक्ति नही कहा जाएगा। जमीनी हकीकत से न सरकार वाकिफ होना चाहती है और न जिम्मेदार अधिकारी। प्राचार्य द्वारा उच्चाधिकारियों को संज्ञान में लाने के बाद भी यहां परिणाम शून्य ही नजर आ रहे है।

पूर्व में एक छात्र की दीवार में दबने से हो चुकी है मौत

ज्ञात हो कि पांच से सात वर्ष पूर्व इसी शाला में छात्र की शौचालय की दीवार की चपेट आकर दब जाने से दर्दनाक मौत हो चुकी है। उसके बाद भी शासन प्रशासन के कान में अभी तक जू तक नही रेंगी है। जो शासन प्रशासन के गैर जिम्मेदाराना रवैए को उजागर करता है।

इनका कहना है

शाला भवन जर्जर हो चुका है। हमारे द्वारा नये भवन के लिए सांसद से मांग की गई है। पुनः और मांग की जाएगी।

योगेश सोनटके सरपंच ग्राम पंचायत कोथूरना

इस संबंध में हमारे द्वारा बीआरसी और डीईओ से पत्राचार किया जा चुका है। शाला भवन नही होने से बच्चों सहित शिक्षकों को भी अध्ययन और अध्यापन कार्य में व्यवधान उत्पन्न होता है।

प्रमोद पारधी प्रभारी प्राचार्य एकीकृत शासकीय हायस्कूल कोथूरना

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