
अखिल भारतीय परिसंघ के जिलाध्यक्ष सतीश वानखडे ने नव निर्मित छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन नवाँ रायपुर के प्रांगण में संविधान निर्माता डॉ भीम राव अंबेडकर के स्मृति चिन्ह भव्य प्रतिमा स्थापित करने कि मांग करते हुए जगदलपुर कलेक्टर के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन में पदाधिकारीयों नाम से ज्ञापन सौंपा l वर्ष 2000 में भारत के मानचित्र पर उभरे छत्तीसगढ़ राज्य ने अपने गठन के 25 गौरवपूर्ण वर्ष पूर्ण कर लिये है, इन वर्षों में प्रदेश ने आपके सक्षम नेतृत्व में सतत् विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। यह राज्य शासन की संवेदनशील नीतियों एवं समावेशी दृष्टिकोण के कारण राष्ट्रीय फलक पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका हैं। छत्तीसगढ़ राज्य और उसकी जनता, भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों यथा “स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व और न्याय” से अनुप्राणित होकर निरन्तर प्रगति कर रही है। यह प्रेरणा हमें संविधान के शिल्पकार, सामाजिक न्याय के महामानव, भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर से प्राप्त होती है। आपको विदित ही होगा कि बाबा साहेब 12 दिसम्बर 1945 को रायपुर पधारे थे और वर्तमान माधवराव सप्रे शाला परिसर (तत्कालीन लॉरी स्कूल) में एक ऐतिहासिक जनसभा को सम्बोधित किया था। छत्तीसगढ़ की धरती उनके चरण स्पर्श से धन्य हुई थी। आज भी उनके विचार, उनके शब्द, इस प्रदेश के जनमानस में गूंजते हैं।

डॉ. अम्बेडकर बहुविशिष्ट विद्वान, विधिवेता, अर्थशास्त्री, मानव शास्त्री, वैज्ञानिक चिंतक, समाजशास्त्री, शिक्षाविद्, भाषाविद् एवं बौद्ध दर्शन के मर्मज थे, उन्होंने जीवन पर्यन्त समाज के वंचित वर्गों को न्याय दिलाने हेतु संघर्ष किया और भारत को एक समतासूचक समाज की ओर अग्रसर करने हेतु संविधान का निर्माण किया, उनकी कृतियाँ “Annihilation of Caste” और “The Buddha and His Dhamma” आज की वैश्विक स्तर पर पढ़ी जाती हैं , राज्य के स्थापना के रजत जयंती वर्ष में हम, अनुसूचित जाति, अनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा समस्त सामाजिक समूहों के नागरिक, यह सामूहिक निवेदन करते हैं कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 25 फीट ऊँची भव्य प्रतिमा नवा रायपुर स्थित नवनिर्मित विधानसभा परिसर में स्थापित की जाए । यह प्रतिमा न केवल हमारे संविधान निर्माता को यथोचित सम्मान अर्पित करेगी, अपितु भावी पीढ़ियों को सामाजिक समता, न्याय एवं संविधान के प्रति आस्था का प्रतीक रूप में प्रेरित भी करेगी। यह पहल छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक समावेशी, संवेदनशील और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले राज्य के रूप में प्रतिष्ठित करेगी। आपसे इस पुनीत कार्य हेतु सादर आग्रह,आशा है ,, आप समारात्मक निर्णय लेकर छत्तीसगढ़ को एक नई ऐतिहासिक पहचान प्रदान करेंगे।










