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किसी भी मंदिर के ऊपर लगा शिखर एवं ध्वज उस मंदिर की शान होते हैं विजय का प्रतीक है, ,मुनि श्री विश्रुत सागर,

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किसी भी मंदिर के ऊपर लगा शिखर एवं ध्वज उस मंदिर की शान होते हैं विजय का प्रतीक है, ,मुनि श्री विश्रुत सागर,

महावीर दिगंबर जैन मंदिर के शिखर पर हुआ ध्वजारोहण,

खंडवा।। हमारे द्वारा किए गए पूर्व भव के पुण्य के माध्यम से आज हमें मानव जीवन प्राप्त हुआ है उसका सदुपयोग करें दुरुपयोग नहीं। धन दौलत साथ नहीं जायेगे, जीवन में हमारे द्वारा किए गए अच्छे कर्म ही हमारे साथ जाएंगे। हमारा देश धर्म और संस्कृति पर आधारित देश है अपने जीवन चक्र के चलते कुछ समय देव शास्त्र गुरु को भी समर्पित करें जिससे पापों का नाश होकर हमें पुण्य की प्राप्ति होती रहे। यह उदगार चातुर्मास के दौरान चल रही प्रवचन माला मे विश्रुत सागर जी महाराज ने व्यक्त कीये। मुनि श्री ने कहा कि वर्षाकाल के दौरान साधु संत तो अपनी साधना तपस्या में लीन होकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं, आप सभी चातुर्मास के दौरान चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों, प्रवचनों, तत्व चर्चा में भाग लेकर अपने जीवन का भी कल्याण करें। आज के इस आधुनिक युग में धर्म और संस्कृति से दूर रहने के कारण हमारी युवा पीढ़ी भटक रही है, आज आवश्यकता है कि हम हमारे युवा पीढ़ी को भी धर्म और संस्कृति से जोड़ते हुए संस्कारित करें, ताकि उनका जीवन भी सफल हो सके। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि मुनि संघ के सानिध्य में बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर के शिखर पर मंत्रोच्चार के साथ शिखर पर ध्वजारोहण श्रावकों को द्वारा किया गया। मूलनायक भगवान महावीर स्वामी के शिखर पर युवा तरुण अनिल कुमार लोहाडिया परिवार द्वारा, भगवान पारसनाथ के शिखर पर राजेश धनपाल जैन कासलीवाल परिवार द्वारा एवं भगवान बाहुबली के शिखर पर ध्वजा रोहण करने का सौभाग्य विपुल राजेंद्र छाबड़ा परिवार को प्राप्त हुआ। ध्वजा रोहण कार्यक्रम को लेकर मुनि श्री ने कहां की मंदिर में लगा ध्वज उस मंदिर की पवित्रता की उद्घोषणा करता है। यह केवल भक्तों को यह बताने के बारे में नहीं है कि मंदिर के अंदर भगवान कौन है बल्कि यह उस मंदिर की दिव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा को भी इंगित करता है। किसी भी मंदिर का शिखर और उस पर लगा ध्वज मंदिर कि शान होते हैं। ध्वज महज एक सजावटी वस्तु नहीं बल्कि विजय का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि शीर्ष पर ध्वज फहराना उस पवित्र स्थान का प्रतीक है जहां अज्ञानता, अहंकार, ईर्ष्या और इच्छाओं के खिलाफ आध्यात्मिक लड़ाई जीती जाती है। मंदिर के शिखर पर लहराता ध्वज भक्तों के लिए एक प्रतीक के रूप में देखा जाता है कि कैसे पवित्र स्थान और आध्यात्मिक ज्ञान हमेशा विकर्षणों पर विजय प्राप्त करेंगे। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि ध्वज रोहण कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया सचिव सुनील जैन ट्रस्टी धनपाल कासलीवाल सुरेश लोहाडिया, राजेंद्र छाबड़ा, पवन रावका, प्रकाश चंद बड़जात्या, जम्मू लोहाडिया, तरुण लोहाडिया, अमर लोहाडिया, विजय सेठी, मनीष जैन,नीरज बैनाडा ,भरत छाबड़ा, विकास बड़जात्या, सुभाष सेठी, राजू बड़जात्या,कैलाश गंगवाल, प्रवीण गदिया सहित बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित थे। अंत में अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया। मुनी संघ की आहार चर्या के पुण्यार्जक आशा विजया अजय रावका, सीमा अशोक रैनी लोहाडिया रहे।

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