
अब “भूमका” और “पडिहार” बनेंगे आधुनिक चिकित्सा के ब्रांड एम्बेसडर , खालवा में “ट्राइबल हीलर्स” का एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम सम्पन्न
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आदिवासी क्षेत्रों में सदियों से स्वास्थ्य चेतना की अलख जगाने वाले परंपरागत चिकित्सकों “भूमका और पडिहार” को अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के बारे में जानकारी देकर उन्हें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में तैयार किया जाएगा। बुधवार को जनपद पंचायत खालवा के सभाकक्ष में इन परंपरागत चिकित्सकों “भूमका और पडिहार” अर्थात “ट्राइबल हीलर्स” के लिए उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में अपर कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य इन परंपरागत चिकित्सकों के गहन अनुभव को वैज्ञानिक दृष्टिकोण देकर सामुदायिक स्वास्थ्य में एक ऐतिहासिक सुधार लाना है। उन्मुखीकरण कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के सहायक संचालक श्री अजय कुमार गुप्ता, जिला आयुष अधिकारी डॉ. अनिल वर्मा, स्पंदन संगठन से सीमा प्रकाश, पिरामल फाउंडेशन से सुमीत कुमार, एम्स से अमित शर्मा, आगा खां सोसायटी से अनिल बघेल के अलावा डॉ. आरती भंडुले, डॉ. गौरीशंकर तावड़े भी उपस्थित थे।
इस दौरान अपर कलेक्टर श्रीमती गौड़ा ने बताया कि आदिवासी अंचल के प्रायः हर गाँव में एक या दो परंपरागत स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा प्रदाता होते हैं। वर्षों से जंगलों के बीच रहते हुए ये अपनी एक अनूठी और समृद्ध पारंपरिक चिकित्सा पद्धति विकसित कर लेते हैं। अब समय आ गया है कि उनकी इस विरासत का सम्मान करते हुए उन्हें आधुनिक चिकित्सा पद्धति और वैज्ञानिक सोच से लैस किया जाए। उन्होंने बताया कि जिले के सुदूर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कार्यरत “भूमका और पडिहार” को प्रशिक्षण देकर उनके अनुभवों का भी लाभ लिया जाएगा। कार्यक्रम में अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख गौड़ा ने कहा कि यह कुपोषण से लड़ने की इस जंग में हम सब को साथ में लड़ना है और जो भी कुपोषित बच्चा पड़ियार के द्वारा पोषण पुनर्वास केन्द्र भेजा जाएगा उसे 100 रूपए प्रति शिशु मानदेय दिया जाएगा।
कार्यक्रम में “भूमका और पडिहार” को ग्राम स्तर पर बीमार होने वाले बच्चों और माताओं को तत्काल सरकारी डॉक्टर को भी दिखाने की सलाह देने के लिए उन्हें राजी किया गया। साथ ही कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र भेजने, बच्चों को बीमार होने पर चाचूआ ना लगाने के सम्बंध में भी “भूमका और पडिहार” को समझाया गया। इस एक दिवसीय कार्यशाला में आयुष विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास तथा जिले में महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस अवसर पर जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत “भूमका और पडिहार” अर्थात “ ट्राइबल हीलर्स” का स्वास्थ्य जांच परीक्षण भी किया गया।








